गलत पॉश्चर से दर्द का घर बन सकता है आपका शरीर, जानें इसके उपचार के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk
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डॉ रमणीक महाजन
निदेशक, आर्थोपेडिक्स एवं ज्वाइंट रिप्लेसमेंट, मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल, नयी दिल्ली
बॉडी पॉश्चर का मतलब होता है कि विभिन्न शारीरिक गतिविधियां करते समय आपके शरीर की स्थिति कैसी होती है. सही पॉश्चर वही है, जिसमें इस तरह से खड़ा हुआ जाये, चला जाये और बैठा जाये कि शरीर की मांसपेशियों और लिगामेंट्स पर दबाव न पड़े. हमेशा इस बात का ख्याल रखें कि रीढ़ की हड्डी सीधी रहे और शरीर के किसी अंग पर दबाव न पड़े.
गलत पॉश्चर से कमर दर्द और सर्वाइकल स्पॉन्डलाइटिस की समस्या हो जाती है, हड्डियों का विकास सामान्य से अधिक हो जाता है, जिससे हड्डियों के बढ़ जाने की समस्या हो जाती है. गलत पॉश्चर आपके स्वास्थ्य के साथ-साथ आपके लुक के लिए भी हानिकारक है. जिन लोगों का पॉश्चर सही होता है, वे ज्यादा युवा दिखायी देते हैं. जिन लोगों का पॉश्चर सही नहीं होता, वो न सिर्फ अपनी उम्र से बड़े नजर आने लगते हैं, बल्कि वे खुद ऐसा महसूस भी करने लगते हैं. उनमें आत्मविश्वास की कमी भी दिखायी देती है. सही पॉश्चर शरीर के बेहतर संतुलन के लिए भी जरूरी है.
अलग-अलग स्थितियों में बॉडी पॉश्चर
अधिकतर लोगों को यही पता नहीं होता कि सही पॉश्चर क्या होता है. इसके लिए जरूरी है कि विभिन्न स्थितियों में शरीर के सही पॉश्चर को जानें और उसे अपनी आदत में शामिल करें.
बैठने की स्थिति : हमेशा कमर व पीठ सीधी और कंधे पीछे की ओर करके बैठें. शरीर का भार दोनों नितंबों पर बराबर हो. हर 30 मिनट के बाद अपनी पोजीशन यानी स्थिति बदलें. अगर आप कुर्सी पर बैठे हों तो दोनों पैरों को फर्श पर फैला लें.
सोते समय भी रखें ख्याल : हमेशा पीठ के बल सोएं. पेट के बल सोने से गर्दन और कमर का पॉश्चर खराब हो जाता है. तकिया सिर के नीचे हो, कंधे के नीचे नहीं. ज्यादा मुलायम गद्दे पर न सोएं, इससे रीढ़ की हड्डी में तकलीफ हो सकती है.
खड़े होते समय : खड़े होते समय सीना बाहर की ओर व पेट अंदर की तरफ हो. इस बात का ध्यान रखें कि कमर सीधी हो, घुटने भी मुड़े हुए न हों. लंबे समय तक एक ही स्थिति में खड़े होने से बचें.
पढ़ते समय : पढ़ते समय सिर को किताब में न गाड़ें. इससे गर्दन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. पढ़ते समय कमर हमेशा सीधी रखें. झुक कर पढ़ने से कमर और गर्दन में दर्द होने की आशंका काफी बढ़ जाती है.
चलते समय रखें ध्यान : हम अपनी जिंदगी में पता नहीं कितने मीलों चलते हैं, लेकिन शायद ही कभी इस बात का ख्याल रखते हैं कि चलते समय हमारा पॉश्चर कैसा होता है. चलने का सबसे सही पॉश्चर है, कंधों को सीधा रखें. सिर कंधों के ऊपर हो, रीढ़ की हड्डी एकदम सीधी. चलते समय पैर सीधी रखें, घुटनों की ओर से मुड़े हुए नहीं.
दौड़ते समय इन बातों का रखें ख्याल : दौड़ते समय भी इस बात का ध्यान रखें कि आपका पॉश्चर एकदम सही हो. गलत पॉश्चर से मांसपेशियों को नुकसान पहुंच सकता है. खासकर दौड़ते समय पीठ एकदम सीधी होनी चाहिए. हाथ खुले न हों, दोनों हाथों की मुट्ठियां बंधी हुई हों और दौड़ते समय दोनों हाथों की पोजीशन एक जैसी होनी चाहिए.
योगासन भी हैं कारगर
पद्मासन : शरीर के पॉश्चर को ठीक रखने में योग भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. पद्मासन या कमल आसन बैठ कर की जाने वाली योग मुद्रा है. इस आसन को करने से मन शांत व ध्यान गहरा होता है. इससे कई शारीरिक समस्याओं से आराम मिलता है.
पद्मासन करने की प्रक्रिया
पैरों को सामने की ओर फैला कर योगा मैट या जमीन पर बैठ जाएं, ध्यान रहे रीढ़ की हड्डी सीधी रहे.
दाहिने घुटने को मोड़े और बायें जांघ पर रख दें, ध्यान रहे कि एड़ी पेट से सटी हो और पांव का तलवा ऊपर की ओर हो.
अब यही प्रक्रिया दूसरे पैर के साथ दोहराएं.
दोनों पैरों को मोड़ें, पांव विपरीत जांघों पर, हाथों को मुद्रा स्थिति में घुटनों पर रखें.
सिर सीधा व रीढ़ की हड्डी सीधी रहे.
इसी स्थिति में बने रह कर गहरी सांस लेते रहें.
पद्मासन और वज्रासन रीढ़ की हड्डी को सीधा रखने में काफी कारगर साबित होते हैं. ताड़ासन बॉडी को स्ट्रेच करने में और कमर दर्द तथा गर्दन दर्द से छुटकारा दिलाने में काफी सहायता करता है. जिन लोगों का पॉश्चर गलत है, वे सही पॉश्चर को पहचानें. इन्हें प्रतिदिन करने से शरीर का पॉश्चर बिल्कुल ठीक रहता है. इससे आत्मविश्वास भी बढ़ता है.
गलत पॉश्चर के दुष्परिणाम
कमर के निचले हिस्से और गर्दन में दर्द.
कूबड़ निकल आना.
मांसपेशियों का खींच जाना या छोटा हो जाना और लंबे समय तक ठीक से काम नहीं कर पाना.
फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित होना, जिससे शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाना.
रीढ़ की हड्डी का अलाइनमेंट बिगड़ जाना.
तंत्रिका तंत्र की कार्यप्रणाली प्रभावित होना.
लगातार झुक कर बैठना कब्ज का कारण बन सकता है.
जोड़ों में दर्द, जो आगे गठिया रोग में बदल जाता है.
कंप्यूटर-गैजेट्स प्रयोग करते समय रखें ध्यान : आज कंप्यूटर और लैपटॉप हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल करते समय एरगोनॉमिक्स ठीक रखना जरूरी है. एरगोनॉमिक्स में आता है कि आप कंप्यूटर पर काम करते समय कैसे बैठें, कंप्यूटर पर काम करते हुए कमर सीधी करके बैठें और स्क्रीन आंखों से 15 डिग्री नीचे की तरफ होना चाहिए. स्क्रीन ओर आंखों के बीच करीब 2 फुट की दूरी होनी चाहिए. हर दो घंटे के बाद एक ब्रेक जरूर लें.
उपचार
आदतें आसानी से नहीं छूटतीं हैं, खास कर बुरी आदतें, ऐसे में उपचार के लिए आये व्यक्ति को क्लिनिक में सबसे पहले सही पॉश्चर की जानकारी दी जाती है. उसे सही पॉश्चर का अभ्यास करवाया जाता है, फिर मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करवाते हैं.
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