मच्छर हैं मानव के सबसे बड़े हत्यारे, प्रतिवर्ष होती हैं करीब 20 लाख मौत

By Prabhat Khabar Digital Desk
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अंटार्कटिका, आइसलैंड और फ्रेंच पोलिनेशियन द्वीपों को छोड़ कर करीब 110 टन मच्छरों का पूरी दुनिया पर कब्जा है. हम मच्छरों से युद्ध कर रहे हैं. ये मच्छर करीब 15 घातक और दुर्बल करनेवाले जैविक हथियारों से लैस हैं. इसका उपयोग वे दुनिया की करीब साढ़े सात अरब की आबादी पर करते हैं. मच्छरों से बचने के लिए हमारा बजट करीब 7794 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष है. इसके बावजूद मानवों पर मच्छरों का घातक आक्रमण जारी है. हम मच्छरों के हमलों के खिलाफ वार भी कर रहे हैं. खास कर मलेरिया से होनेवाली मौतों में तेजी से गिरावट आ रही है. इसके बावजूद मच्छर मनुष्यों के लिए सबसे घातक शिकारी बने हुए हैं.

मच्छरों के कारण 20 लाख लोगों की होती है मौत

एक अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2000 के बाद से मच्छर के कारण मनुष्यों की होनेवाली मौतों की संख्या औसतन प्रतिवर्ष 20 लाख थी. जबकि, 4.75 लाख प्रतिवर्ष मौत का मानव होता हैं. सांप के कारण प्रतिवर्ष करीब 50 हजार मौतें होती हैं. कुत्ते और कीट से प्रतिवर्ष क्रमश: 25-25 हजार लोग मरते हैं. मगरमच्छ के कारण करीब एक हजार मौतें प्रतिवर्ष होती हैं. वहीं, जंगली जानवरों से होनेवाली मौतें बहुत कम हैं. हिप्पो के कारण 500 मौतें, शेर और हाथी के कारण क्रमश: 100-100 मौतें, शार्क और भेड़िये के कारण क्रमश: 10-10 मौतें प्रतिवर्ष हुई हैं.

मच्छर सीधे तौर पर किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं. यह जहरीली और अत्यधिक विकसित बीमारियां प्रसारित करते हैं, जो मौत का अंतहीन कारण बनते हैं. हमारे शरीर की रक्षा प्रणाली स्थानीय वातावरण के अनुकूल होती हैं. जबकि, मच्छर अंतरराष्ट्रीय सीमाओं का सम्मान नहीं करते हैं और दूसरे देशों में नयी बीमारियों को लेकर पहुंच जाते हैं.

दस सेकेंड में मच्छरों को हो जाती है रक्त नली की पहचान

जब आप अपने परिवार या दोस्तों के साथ होते हैं. लॉन में बैठते हैं. मनोरंजन में व्यस्त होते हैं, तभी मच्छरों की भनभनाहट आपको आकर्षित करती है. यह शाम का समय ही मच्छरों का सबसे पसंदीदा होता है. दस सेकेंड में ही मच्छर आपकी प्रधान रक्तनली को पहचान लेता है. उसके बाद बालों के बीच से खुद को स्थिर कर बिजली की गति से आपकी त्वचा पर हमला कर देते हैं. वह आपके 3-5 मिलीग्राम रक्त चूस लेते हैं. साथ ही अपने 20 फीसदी प्रोटीन सामग्री को ग्रहण करते हुए उसके पानी को बाहर निकालते रहते हैं. एक सूई लार में पंप कर रही होती है, जो थक्कारोधी होता है. यह आपके रक्त को काटनेवाले स्थान पर थक्का जमने से रोकता है. थक्कारोधी एक एलर्जी प्रतिक्रिया का कारण बनता है. बाद में खुजलीवाली गांठ के रूप में वह छोड़ देता है. मच्छरों को काटने से प्रजनन के लिए आवश्यक आहार मिलता है. अंडे को उगाने और परिपक्व करने के लिए उसे आपके रक्त की आवश्यकता होती है.

मलेरिया वाले एनोफिलीज मच्छर स्वेच्छा से चारा लेती हैं. आपके रक्त की कुछ बूंदें लेने के बाद वह छोड़ देती हैं. एक रक्त भोजन उसके शरीर के वजन का तीन गुना तक होता है. इसे लेने के बाद वह उर्ध्वाधर सतह पर इकट्ठा कर लेती है. धीरे-धीरे वह आपके लिए हुए रक्त से पानी निकालना जारी रखती है. इस केंद्रित रक्त का उपयोग करके वह अगले कुछ दिनों में अपने अंडे विकसित करेगी. इसके बाद जमे पानी के सतह पर करीब 200 अंडे जमा करती है.

मच्छरों का जीवनकाल एक से तीन सप्ताह का होता है

मच्छरों का जीवनकाल एक से तीन सप्ताह का होता है. इस दौरान काटना और अंडे देना जारी रखते हैं. एक मच्छर करीब दो मील तक उड़ सकता है. लेकिन, शायद ही वह कभी अपने जन्मस्थान से 400 मीटर से अधिक दूरी पर होता है. ठंड के मौसम में यह कुछ अधिक समय लेता है. लेकिन, उच्च तापमान में उसके अंडे दो या तीन दिनों के अंदर ही पानी के कीड़े बन जाते हैं और स्वस्थ वयस्क मच्छर बन कर उड़ान भरते हैं. इनमें नयी पीढ़ी की मादा मच्छर फिर अपने शिकार की तलाश में चल देती है. वयस्कता के लिए यह परिपक्वता अवधि करीब एक सप्ताह की होती है. बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी, कीड़े और कवक के साथ अनकहे दुखों-परेशानियों को जन्म देती है.

ये मच्छर हमारे आसपास ही रहते हैं. इन सूक्ष्म जीवों को खत्म करना मुश्किल है. इन्हें मारना भी हमें आत्म-पराजय और हानिकारक लगता है, जबकि इनके द्वारा दिये गये रोग हमें मारता है. जब आप इनके बारे में सोचना बंद कर देते हैं, तब ये और चालाक हो जाते हैं. इसके बाद फूड प्वॉयजनिंग, बैक्टरिया और विभिन्न कीड़े को निगल जाने की प्रतीक्षा करते है. इसके बाद जिराडिया, हैजा, टाइफाइड, पेचिश, हेपेटाइटिस सहित कई जलजनित बीमारियों को जन्म देती हैं. सामान्य सर्दी, 24 घंटे का फ्लू, इन्फ्लूएंजा, खांसी, जुकाम भी कारण बनते हैं. चेचक, खुले घाव, दूषित वस्तुओं या खांसी द्वारा बीमारियों को स्थानांतरित भी करते हैं. वे एक विकासवादी दृष्टिकोण के साथ गुप्त रूप से अपने प्रजनन को सुनिश्चित करते हैं.

मच्छर एक मादक जीव है

मच्छर एक मादक जीव है. अन्य कीड़ों की प्रकृति के विपरीत यह पौधों को परागण नहीं करता. यह मिट्टी को निष्क्रिय नहीं करता. यह अपशिष्ट को नहीं निगलता और ना ही अपरिहार्य खाद्य स्रोत के रूप में काम करता है. यह शिकारी के रूप में मानव जनसंख्या वृद्धि के खिलाफ कार्य करता है. मलेरिया जैसे घातक मच्छर के काटने से बदमाश मलेरिया परजीवी आपके जिगर के अंदर एक से दो सप्ताह तक उत्परिवर्तित और प्रजनन करेगा. इस दौरान आप कोई लक्षण नहीं दिखायेंगे. इस नये उत्परिवर्तित रूप की एक विषाक्त सेना आपके लीवर से बाहर निकल जायेगी और आपके रक्त प्रवाह पर आक्रमण करेगी. परजीवी आपके लाल रक्त कोशिकाओं से जुड़ते हैं, बाहरी बचाव में प्रवेश करते हैं और भीतर हीमोग्लोबिन पर हमला करते हैं. सेल के अंदर वे एक और कायापलट और प्रजनन चक्र से गुजरते हैं. इसके बाद आपस में गुंथी हुई रक्त कोशिकाएं फट जाती हैं. फिर दोनों लाल रक्त कोशिकाओं पर हमला करने के लिए आगे बढ़ती हैं. यह आपके रक्त प्रवाह में आराम से तैरता है. ठंड में भी आपको 105 डिग्री तक बुखार हो सकता है और आप परजीवी की मजबूत पकड़ में आ जाते हैं. आपका लीवर बढ़ जाता है. पसीने से तर-बतर हो जाते हैं. त्वचा पीला पड़ने लगता है. उल्टी भी करने लगते हैं.

मच्छर प्रजनन और मलेरिया के जीवन चक्र दोनों के लिए तापमान एक महत्वपूर्ण है. उसके सहजीवी संबंध को देखते हुए दोनों जलवायु संवेदनशील भी हैं. मच्छर अपने शरीर के तापमान को नियंत्रित नहीं कर सकते. बस 10 डिग्री तापमान के नीचे के वातावरण में जीवित नहीं रह सकते हैं. वहीं, 40 डिग्री का तापमान मच्छरों को मौत के घाट उतार देगी. आमतौर पर मच्छर 23 डिग्री तापमान में चरम पर होते हैं. अर्थात, समशीतोष्ण, गैर-उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों का मौसम मच्छरों के लिए शिकार करने और काटने के लिए अनुकूल होता है. मच्छर जितना ठंडा होता है, उतना ही सुस्त मलेरिया का प्रजनन होता है. 15 डिग्री से 21 डिग्री तापमान के बीच मलेरिया परजीवी के प्रजनन चक्र में एक महीने तक का समय लग सकता है, जो मच्छर के औसत जीवनकाल को पार कर सकता है. तब वह अपने साथ मलेरिया को भी साथ ले जाती है.

गर्म जलवायु में मच्छरों की आबादी बढ़ती है

वहीं, गर्म जलवायु साल-दर-साल मच्छरों की आबादी को बनाये रख सकती है, जो उसके रोगों के स्थानिक परिसंचरण को बढ़ावा देता है. असामान्य रूप से उच्च तापमान उन क्षेत्रों में मच्छर जनित बीमारियों के मौसमी महामारी का कारण बन सकता है. ग्लोबल वार्मिंग भी मच्छर और उसकी बीमारियों की सीमा को व्यापक बनाने में मदद करता है. बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन मच्छरों से होनवाली बीमारियों के लिए वर्ष 2000 से ही शोध कर रहा है. वर्ष 2016 में क्रेस्प मच्छर अनुसंधान पर 540 करोड़ रुपये का निवेश किया था. गेट्स फाउंडेशन का रणनीतिक लक्ष्य मलेरिया और अन्य मच्छर जनित बीमारियों का विनाश है. करीब 3,500 से अधिक मच्छरों की प्रजातियों में से केवल कुछ सौ ही गंभीर रोग के कारण बनते हैं. (द गार्डियन से साभार)

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