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नहीं चेते, तो आधी दुनिया होगी लू की चपेट में, टूटेंगे गर्मी के रिकॉर्ड

Updated at : 20 Jun 2019 7:04 AM (IST)
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नहीं चेते, तो आधी दुनिया होगी लू की चपेट में, टूटेंगे गर्मी के रिकॉर्ड

ऑस्ट्रेलिया के मौसम वैज्ञानिकों ने जारी की रिपोर्ट, बढ़ते रहेंगे भयंकर गर्मी और लू के थपड़े नयी दिल्ली : भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है. बिहार से हर दिन लू की चपेट में आकर जान गंवाने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है. वहां पिछले […]

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ऑस्ट्रेलिया के मौसम वैज्ञानिकों ने जारी की रिपोर्ट, बढ़ते रहेंगे भयंकर गर्मी और लू के थपड़े

नयी दिल्ली : भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है. बिहार से हर दिन लू की चपेट में आकर जान गंवाने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है. वहां पिछले कुछ दिनों में 200 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं.

देश के अन्य हिस्सों में भी हालात अच्छे नहीं हैं. अगर ग्लोबल वार्मिंग पर काबू नहीं पाया गया, तो गर्मी ऐसे ही बढ़ती रहेगी. इसकी चपेट में भारत के अलावा अमेरिका तक के शहरों में हजारों मौतें हो सकती हैं.

इसके लिए ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन पर हर हाल में काबू पाना होगा. ग्रीन हाउस गैसों में कार्बनडाइऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड, सल्फर हेक्साफ्लोराइड, नाइट्रोजन ट्राइफ्लोराइड आदि गैसें आती हैं. इनका उत्सर्जन पृथ्वी के लिए खतरनाक बताया जाता है. ऑस्ट्रेलिया के मौसम विज्ञानियों द्वारा तैयार रिपोर्ट के अनुसार, कार्बन गैस का उत्सर्जन कम करना बेहद जरूरी है.

अगर ऐसा नहीं किया गया, तो गर्मी और भी ज्यादा भीषण होगी. इस बढ़ते तापमान का असर दुनिया के 58 प्रतिशत हिस्से पर पड़ेगा. लगातार गर्मी के पुराने रिकॉर्ड टूटते जायेंगे. आसमान से बरसती आग का सबसे ज्यादा नुकसान पिछड़े देशों पर होगा. ऐसा होने में ज्यादा समय भी नहीं लगेगा.

तैरते हुए सोलर फार्म करेंगे ग्रीनहाउस गैस से रक्षा : इधर, वैज्ञानिकों ने ग्रीनहाउस गैस से निबटने के लिए समुद्र में द्वीप जैसे लाखों सोलर फार्म विकसित करने की सलाह दी है.

सोलर फार्म वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने और अवशोषित गैस को सिंथेटिक ईंधन में बदलने में मदद कर सकते हैं. नॉर्वे और स्विट्जरलैंड के वैज्ञानिक कार्बन आधारित जीवाश्म ईंधन के विनाशकारी प्रभावों को कम करने के लिए समुद्र में कृत्रिम द्वीप के समान 1.1 करोड़ सोलर फार्म विकसित करेंगे.

सोलर फार्म में लगे फोटोवोल्टाइक सेल सूर्य के प्रकाश को बिजली में परिवर्तित करेंगे. इस बिजली का इस्तेमाल समुद्री जल से हाइड्रोजन और कार्बनडाइऑक्साइड के निष्कर्षण में किया जायेगा. इसके बाद हाइड्रोजन और कार्बनडाइऑक्साइड से मिथेनॉल बनाया जायेगा, जो पेट्रोल या डीजल का बेहतर विकल्प होगा.

डोमिनिक रिपब्लिक स्थित मोंटे प्लाटा सोलर प्रोजेक्ट से हजारों लोगों को हो रहा फायदा

यहां बन सकता है सोलर फार्म

07 मीटर से कम ऊंची उठती हों जहां समुद्र की लहरें

600 मीटर से अधिक गहरा नहीं हो पानी

70 द्वीप मिल कर एक वर्ग किमी करेंगे कवर

3.2 करोड़ द्वीप कर सकते हैं पृथ्वी को ग्रीनहाउस से मुक्त

सौर ऊर्जा के अग्रणी देश

सौर ऊर्जा उत्पादन (मेगावॉट में)

जर्मनी38,250

चीन 28,330

जापान 23,409

इटली 18,622

अमेरिका 17,317

भारत 12,870

फ्रांस 5,678

स्पेन 5,376

ऑस्ट्रेलिया 4,139

बेल्जियम 3,156

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