लॉकडाउन में जमाखोर व्यापारियों की पौ बारह, ना खाता, ना बही, लाला जी जो कहें, वही सही

Published by :Pritish Sahay
Updated at :28 Mar 2020 4:35 AM
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लॉकडाउन में जमाखोर व्यापारियों की पौ बारह,  ना खाता, ना बही, लाला जी जो कहें, वही सही

नफा, जमाखोर व मुनाफाखोर उठा रहे हैं. लोगों की शिकायत है कि पुलिस और प्रवर्तन शाखा को इसकी जानकारी देने के बावजूद कालाबाजारिये और मुनाफाखोर अपनी कारस्तानी से बाज़ नहीं आ रहे हैं.

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नवीन कुमार राय, कोलकाता : प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की बार- बार अपील के बावजूद ऐसे अनेक लोग हैं, जो लॉकडाउन में भी इसके लिए निर्धारित दिशानिर्देशों को नहीं मान रहे हैं. उनसे बार-बार कहा जा रहा है कि रोज़मर्रा के सामान पाने के लिए किसी अफरा-तफरी में ना रहें. लॉकडाउन में भी सारे सामान की आपूर्ति बाधित नहीं होगी और थोक में सामान खरीदने से बचें.

ऐसे सामान का संग्रह करने से अन्य ज़रूरतमंदों को तकलीफ होगी. परंतु लोग समझने को तैयार नहीं हैं. इसका नफा, जमाखोर व मुनाफाखोर उठा रहे हैं. लोगों की शिकायत है कि पुलिस और प्रवर्तन शाखा को इसकी जानकारी देने के बावजूद कालाबाजारिये और मुनाफाखोर अपनी कारस्तानी से बाज़ नहीं आ रहे हैं. इंटाली थाना इलाके के मौलाली में मजार के ठीक सामने एक नंबर कॉन्वेंट रोड पर आटा व मैदा के थोक विक्रेता के यहां कुछ ऐसा ही देखने को मिला.

रोज़ाना यहां पर गरीबों को 21 रुपये प्रति किलो के भाव से आटा मिलता था. इलाके के लोग यहां से सस्ते में आटा खरीद लेते थे. लेकिन गुरुवार से यहां पर आटा 30 से 32 रुपये किलो की दर से बिकने लगा. जब स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया, तो दुकान के कर्मचारी ने कहा कि आटा खत्म हो गया है. जब वहां मौजूद सफेद बोरों को दिखाया गया, तो उन्होंने कहा कि इनमें आटा नहीं मैदा है. जब आटा आयेगा, तभी मिलेगा. जितने दाम का आयेगा, उतने भी ही देना पड़ेगा.

उल्लेखनीय है कि लोगों के सामने फुटकर विक्रेताओं के लिए बोरो में लदा आटा जा रहा था. स्थानीय लोगों ने जब इसकी शिकायत इंटाली थाने में की, तो वहां किसी के कान पर जूं नहीं रेंगी.

इसके बाद स्थानीय लोगों ने प्रभात खबर के कार्यालय से संपर्क किया, तब प्रभात खबर की टीम मौके पर पहुंची. वहां पर उक्त व्यवसायी बेखौफ अपना धंधा जारी रखे हुए था. लेकिन जैसे ही उसे पता चला कि उसकी कारगुजारी मोबाइल कैमरे में कैद हो रही है, वह अपना खाता-बही तिजोरी में रख कर आटे की बोरी को मैदा बताने लगा. इसके बाद प्रभात खबर की टीम ईएसडी के डीसी आइपीएस अधिकारी अजय प्रसाद के पास पहुंची, जिन्होंने तुरंत कार्रवाई का आश्वासन दिया.

इस बीच, प्रभात खबर की दूसरी टीम ने इस घटनाक्रम की शिकायत इंफोर्समेंट ब्रांच से की, तो वहां से भी वैसा ही आश्वासन मिला. लेकिन खबर लिखे जाने तक क्या कार्रवाई हुई, इस पर ना तो पुलिस से कोई सूचना मिली और ना ही इंफोर्समेंट ब्रांच से कोई जानकारी दी गयी. ऐसे समय में यह कहा जा सकता है कि कुल मिला कर पूरे कोलकाता में एक ही नारा चल रहा है – ना खाता, ना बही, लाला जी जो कहें, वही सही.

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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