Guru Pushya Yoga 2021: आज बन रहा है गुरु-पुष्य नक्षत्र योग, विवाह में आ रही बाधा को ऐसे करें दूर
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 25 Nov 2021 7:53 AM
Guru Pushya Yoga 2021: इस बार गुरु पुष्य नक्षत्र योग 25 नवंबर को बन रहा है. हिंदू पंचांग के अनुसार, इस महायोग का प्रारंभ सुबह 6.44 बजे से होगा और रात 6.48 बजे तक रहेगा. इस दिन सुखद वैवाहिक जीवन के लिए पूरे दिन उपाय किया जा सकेगा.
Guru Pushya Yoga 2021: आज बन रहा है गुरु-पुष्य नक्षत्र योग, विवाह में आ रही बाधा को ऐसे करें दूर
सभी नक्षत्रों में पुष्य नक्षत्र को सबसे श्रेष्ठ माना गया है. यह शुभ मुहूर्त खरीददारी के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है. इस बार गुरु पुष्य नक्षत्र योग 25 नवंबर को बन रहा है. मान्यताओं के मुताबिक गुरु पुष्य नक्षत्र के दिन किए गए हर कार्य का उत्तम फल प्राप्त होता है. यह नक्षत्र शुभ संयोग निर्मित करता है और इस दिन विशेष उपाय व मंत्र जाप करने से जीवन के हर क्षेत्र में सफलता व अच्छे परिणाम मिलने लगते हैं.
गुरु पुष्य योग का समय
25 नवंबर को गुरु पुष्य योग के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत योग तीन महायोगों का संयोग बन रहा है. हिंदू पंचांग के अनुसार, इस महायोग का प्रारंभ सुबह 6.44 बजे से होगा और रात 6.48 बजे तक रहेगा. इस दिन सुखद वैवाहिक जीवन के लिए पूरे दिन उपाय किया जा सकेगा. मान्यता है कि इस योग में उपाय करने से शादी-विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं.
विवाह में आ रही बाधा को ऐसे करें दूर
जिन युवक-युवतियों का विवाह नहीं हो पा रहा है, किसी न किसी कारण बाधा आ रही है. विवाह की बात पक्की होते होते रह जा रही हो तो वे गुरु पुष्य नक्षत्र के दिन केले के पेड़ की जड़ निकालकर लाएं. उसे घर लाकर गंगाजल से धोकर साफ करें. फिर कच्चे दूध का स्नान कराएं और फिर शुद्ध जल से साफ करके एक पीले कपड़े पर रखें. इसका पूजन हल्दी से करें. इसके बाद ऊं ज्ञां ज्ञीं ज्ञूं स: जीवाय स्वाहा: मंत्र की एक माला जाप करें. इस जड़ को उसी कपड़े में बांधकर दाहिनी भुजा में बांध लें या चांदी के ताबीज में भरकर गले में पहन लें. तीन माह में विवाह की बात बन जाएगी.
क्या है गुरु पुष्य योग
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गुरु पुष्य योग के देवता बृहस्पति एवं स्वामी ग्रह शनि हैं, इसकी राशि कर्क 03.20 से 16. 40 अंश तक मान्य है. भारतीय खगोल मे यह 8 वां लघु संज्ञक नक्षत्र है। इसके तीन तारे है. ये तारे एक सीध मे तीर का आकार प्रदिर्शित करते है. इसे तिष्य या देव नक्षत्र भी कहते है। पुष्य का अर्थ पौषक है. 27 नक्षत्रों में सबसे प्यारा नक्षत्र माना जाता है. यह शुभ सात्विक पुरुष नक्षत्र है. इसकी जाति क्षत्रिय, योनि छाग, योनि वैर वानर, गण देव, आदि नाड़ी है. यह पूर्व दिशा का स्वामी है.
बृहस्पति / गुरु इसके देवता माने जाते है. ये सुरो (देवो) के आचार्य है। शिव-शंकर की कृपा से इन्हे ग्रहो मे गुरु का स्थान मिला है. ये इन्द्र के उपदेशक अर्थात सलाहकार है. शिव पुराण अनुसार महर्षि अंगिरस और सरूपा के पुत्र है. इनकी तीन पत्निया तारा, ममता, शुभ है। इनका रंग पीला तथा वस्त्र पीले है. ये दीर्घायु, वंशज, न्याय प्रदाता है. ये ईश्वर दिशा यानि उत्तर-पूर्व कोण ईशान के स्वामी है.
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