अमीर लोगों ने भी बनाया बीपीएल डिजिटल राशन कार्ड

Published at :10 Sep 2016 1:18 AM (IST)
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अमीर लोगों ने भी बनाया बीपीएल डिजिटल राशन कार्ड

जलपाईगुड़ी:जलपाईगुड़ी जिले में एक लाख 12 हजार डिजिटल राशन कार्ड रद्द कर देने का निर्णय लिया गया है. जिले के कई अमीर लोगों के साथ-साथ बैंक लेन-देन तथा अन्य विभागों में सरकारी नौकरी करने वाले लोगों ने भी दो रुपये किलो की दर से मिलने वाले खाद्य सामग्रियों के लिए बीपीएल राशन कार्ड का आवेदन […]

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जलपाईगुड़ी:जलपाईगुड़ी जिले में एक लाख 12 हजार डिजिटल राशन कार्ड रद्द कर देने का निर्णय लिया गया है. जिले के कई अमीर लोगों के साथ-साथ बैंक लेन-देन तथा अन्य विभागों में सरकारी नौकरी करने वाले लोगों ने भी दो रुपये किलो की दर से मिलने वाले खाद्य सामग्रियों के लिए बीपीएल राशन कार्ड का आवेदन किया था.

इन लोगों के कार्ड भी बनकर तैयार हो गये हैं. लेकिन इस कार्ड को लेने कोई नहीं आया. बाद में जिला प्रशासन तथा खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा इस मामले की जांच की गई तो पूरे तथ्यों का खुलासा हो गया. जलपाईगुड़ी जिले में कुल 18 लाख बीपीएल कार्ड बनाये गये हैं, जिनमें से करीब तीन लाख बीपीएल राशन कार्ड में गड़बड़ी होने की संभावना है. खाद्य एवं आपूर्ति विभाग सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जलपाईगुड़ी जिले के 18 लाख बीपीएल डिजिटल राशन कार्डों में से 15 लाख राशन कार्डों का बंटवारा हो चुका है. तीन लाख लोग अब तक कार्ड लेने नहीं आये हैं.

इस बात की जानकारी राज्य खाद्य विभाग को दे दी गई है. ख???ाद्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जलपाईगुड़ी नगरपालिका इलाके में कुल 53 हजार राशन कार्ड बनाये गये हैं. जिनमें से करीब 24 प्रतिशत राशन कार्ड अभी भी पड़ा है. अन्य इलाकों की भी यही स्थिति है. धूपगुड़ी नगरपालिका के तीन हजार राशन कार्डों में से 11 प्रतिशत राशन कार्ड, माल नगरपालिका के 16 हजार 800 राशन कार्डों में से 10 प्रतिशत राशन कार्ड तथा राजगंज ब्लॉक के दो लाख 51 राशन कार्डों में से करीब 28 प्रतिशत राशन कार्डों का बंटवारा नहीं हुआ है.

सिलीगुड़ी नगर निगम के वह वार्ड जो जलपाईगुड़ी जिले में है, वहां भी करीब 37 प्रतिशत कार्डों का बंटवारा नहीं हुआ है. विभागीय सूत्रों ने आगे बताया है कि करीब तीन लाख बचे हुए राशन कार्डों को लेकर फार्म-3 भरने का निर्देश दिया गया था. इनमें से एक लाख 83 ग्राहकों ने फार्म-3 को ठीक तरह से भरा है. उसके बाद इन ग्राहकों की जांच की गई. पता चला कि इनमें से अधिकांश लोग उच्च आय वर्ग वाले एवं सरकारी कर्मचारी हैं.

केन्द्र तथा राज्य सरकार में काम करने वाले कर्मचारियों ने भी कुछ तथ्यों को छुपाकर बीपीएल कार्ड पाने के लिए आवेदन किया है. इससे साफ है कि राज्य सरकार द्वारा दिये जाने वाले दो रुपये की दर से चावल लेने के लिए ही बीपीएल कार्ड बनाया गया है. राज्य सरकार की ओर से नवंबर से ऐसे राशन कार्ड धारकों के खिलाफ अभियान शुरू करने का निर्णय लिया गया है. पूरे राज्य के राशन दुकानों में ई-पोज मशीन लगाये जा रहे है. इस मशीन में कार्ड लगाते ही असली तथा नकली ग्राहकों की पहचान कर ली जायेगी.

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