समस्या: रात में दवा दुकान बंद रहने से बढ़ी परेशानी, इमरजेंसी में मारे-मारे फिरते हैं रोगी के परिजन

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सिलीगुड़ी. सिलीगुड़ी शहर तथा इसके आसपास के इलाकों में रात में यदि कोई बीमार पड़ जाये, तो डॉक्टर मिलना आसान है, लेकिन दवा मिलना मुश्किल. करीब 10 लाख की आबादी वाले इस शहर में रात में कहीं भी दुवा की दुकान खुली हुई नहीं मिलती है. यहां तक कि सिलीगुड़ी जिला अस्पताल के सामने कुकुरमुत्तों […]

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सिलीगुड़ी. सिलीगुड़ी शहर तथा इसके आसपास के इलाकों में रात में यदि कोई बीमार पड़ जाये, तो डॉक्टर मिलना आसान है, लेकिन दवा मिलना मुश्किल. करीब 10 लाख की आबादी वाले इस शहर में रात में कहीं भी दुवा की दुकान खुली हुई नहीं मिलती है. यहां तक कि सिलीगुड़ी जिला अस्पताल के सामने कुकुरमुत्तों की तरह उग आये दवा दुकान दिन भर तो लाखों रुपये का काम करते हैं और रात के करीब आठ बजते ही शटर गिराकर चलते बनते हैं. सिलीगुड़ी में हिलकार्ट रोड के अलावा होस्पीटल रोड में दवा की कई दुकानें हैं. इसके अलावा विधान मार्केट इलाके में भी दिन भर तो दवा की दुकानें खुली रहती है, लेकिन शाम होते ही दुकानें बंद कर दी जाती हैं.

इसके परिणाम स्वरूप यदि रात में कोई रोगी बीमार पड़ जाये, तो रोगियों के परिजनों को दवा लेने के लिए रातों भर मारे-मारे फिरना पड़ता है. कुछ नर्सिंग होम में रात को दवा मिल जाती है, लेकिन यह आम लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध नहीं होता. रोगी के परिजन नर्सिंग होम जाकर काफी मिन्नते करते हैं तब उन्हें दवा दी जाती है. ऐसे सिलीगुड़ी जिला अस्पताल के अंदर सरकारी दवा दुकान रात में खुली होती है, लेकिन यहां सभी प्रकार की दवाइयां उपलब्ध नहीं रहती है. रात में दवा दुकान नहीं खुलने को लेकर यहां के सामाजिक तथा विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों में काफी रोष है. यहां तक कि कई राजनीतिक दलों ने भी रात में कुछ दवा दुकानें खोले रखने की मांग की है.

नॉर्थ बंगाल वोलंटियरी ब्लड डोनर फोरम के अध्यक्ष तथा सिलीगुड़ी के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता सोमनाथ चटर्जी का कहना है कि सिलीगुड़ी के दवा व्यवसायियों का समाज से कोई लेना-देना नहीं है. यह लोग पूरी तरह से व्यवसाय करते हैं एवं सामाजिक कर्त्तव्यों को पूरा नहीं कर रहे. श्री चटर्जी ने कहा कि रात में कुछ स्थानों पर दवा दुकान खुले रखने की मांग को लेकर उन्होंने प्रशासन तथा दवा व्यवसायी संगठनों से बातचीत भी की थी. उसके बाद दवा व्यवसायियों ने इस मुद्दे को लेकर मीटिंग की.

इसके बावजूद दवा दुकानें नहीं खोली गई. श्री चटर्जी ने कहा कि कोलकाता में विभिन्न स्थानों पर रात में दवा दुकानें खुली मिल जायेगी. सिलीगुड़ी में रात में दवा दुकान नहीं खुलने को लेकर कई बार तो रोगियों की मौत भी हो चुकी है. उन्होंने इस मामले में कुछ नर्सिंग होम पर दवा व्यवसायियों के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया. श्री चटर्जी ने आगे कहा कि दवा दुकान नहीं खुले रहने के कारण कई बार मरीज के परिजन घबराहट में मरीज को नर्सिंग होम में भरती करा देते हैं.

इस बीच, शिव सेना ने भी रात में दवा दुकान नहीं खुले रहने को लेकर प्रशासन की आलोचना की है. शिव सेना के दार्जिलिंग जिला अध्यक्ष बबुआ घोष का कहना है कि बागडोगरा से लेकर सिलीगुड़ी के कोर्ट मोड़ तक रात के समय एक भी दवा दुकान नहीं खुली रहती है. जब मुख्य सड़कों पर स्थित दवा दुकानों की यह स्थिति है, तो मुहल्लों की दवा दुकानें कैसे खुली रहेगी. उन्होंने इस मुद्दे को लेकर सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर अशोक भट्टाचार्य तथा सिलीगुड़ी के एसडीओ राजनवीर सिंह कपूर को एक ज्ञापन भी दिया है. श्री घोष का कहना है कि यदि रात में कुछ दवा दुकानों के खोलने को लेकर कोई निर्णय नहीं होता है, तो वह आंदोलन करेंगे.

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