रामघाट मामला: श्मशान घाट हटाने की मांग

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सिलीगुड़ी. एक बार फिर गरमा सकता है सिलीगुड़ी में रामघाट का मुद्दा. इस बार सरकारी परियोजना विद्युत शवदाह चूल्हा के निर्माण से नहीं, बल्कि वर्षो पुराना श्मशानघाट विवाद का कारण बन सकता है. ऐसा संकेत शनिवार को पांच नंबर वार्ड नागरिक मंच की ओर से मिला है. नागरिक मंच की ओर से कलकत्ता हाइकोर्ट में […]

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सिलीगुड़ी. एक बार फिर गरमा सकता है सिलीगुड़ी में रामघाट का मुद्दा. इस बार सरकारी परियोजना विद्युत शवदाह चूल्हा के निर्माण से नहीं, बल्कि वर्षो पुराना श्मशानघाट विवाद का कारण बन सकता है. ऐसा संकेत शनिवार को पांच नंबर वार्ड नागरिक मंच की ओर से मिला है.

नागरिक मंच की ओर से कलकत्ता हाइकोर्ट में एक अरजी भी दी गयी है और राज्य सरकार से रामघाट के जनबहुल इलाके में स्थित श्मशान क ो जल्द हटाने की मांग की गयी है. रामघाट के श्मशान से सरकारी परियोजना विद्युत शवदाह चूल्हे के निर्माण को स्थगित कर दिया गया है और इसको फूलबाड़ी स्थानांतरित कर दिया गया है.

सरकार के इस फैसले का नागरिक मंच ने स्वागत किया और पूरे वार्डवासियों की ओर से मंच ने उत्तर बंगाल विकास मंत्री गौतम देव का आभार प्रकट किया. सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट क्लब में प्रेस-वार्ता के दौरान मंच के प्रवक्ता महानंदा मंडल ने गौतम देव से रामघाट आंदोलन के एक महिला समेत 45 आंदोलनकारियों पर पुलिस द्वारा लगाये सभी मामलों को वापस लेने की अपील की. श्री मंडल ने कहा कि निगम चुनाव से पहले मंत्री ने संवाद माध्यमों के मार्फत ऐसा किये जाने का संकेत भी दिया था. इसके लिए मंत्री मार्च महीने के आठ तारीख को रामघाट में आंदोलनकारियों से मुलाकात भी करने वाले थे. लेकिन किसी कारणवश वह नहीं आये. श्री मंडल ने यह स्वीकार किया कि रामघाट स्थित श्मशान सिलीगुड़ी का वर्षो पुराना श्मशान है. करीब चार-पांच दशक पहले नूतनपाड़ा के रामघाट में महानंदा नदी के किनारे श्मशान के लिए जमुना देवी ने अपनी कई बीघा जमीन को श्मशान के लिए समाज को दान कर दिया. इस श्मशान में आज भी लकड़ी शवों का दाहसंस्कार किया जाता है.

जिस समय यहां श्मशान बना था, उस समय इस क्षेत्र में नाममात्र लोग ही रहते थे. लेकिन अब यह पूरा इलाका जनबहुल इलाका हो गया है और लकड़ी से शव जलाने पर धुएं व राख के कारण पूरा इलाका प्रदूषित हो रहा है. सरकारी परियोजना विद्युत शवदाह चूल्हा को रामघाट के श्मशान में नहीं बनाने के लिए पांच नंबर वार्ड के लोगों ने नागरिक मंच के बैनर तले लोकतांत्रिक व शांतिपूर्ण लड़ाई लड़ी थी न की खूनी लड़ाई. हम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं. कोर्ट के फैसले के अनुसार ही भावी रणनीति का खाका तैयार किया जायेगा.

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