प्रभात खबर की मुहिम: प्लास्टिक मुक्त हो देश हमारा

Updated at : 28 Jan 2020 2:19 AM (IST)
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प्रभात खबर की मुहिम: प्लास्टिक मुक्त हो देश हमारा

सिलीगुड़ी : प्लास्टिक से होने वाला प्रदूषण पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है. अमूमन हर चीज के लिए प्लास्टिक का इस्तेमाल हो रहा है. वो चाहे दूध, तेल, घी, आटा, चावल, दाल, मसाले, कोल्ड ड्रिंक, शर्बत, स्नैक्स, दवा, कपड़े हो या फिर दैनिक जरूरत की अन्य दूसरी चीजें, आजकल इन सभी सामानों को रखने […]

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सिलीगुड़ी : प्लास्टिक से होने वाला प्रदूषण पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है. अमूमन हर चीज के लिए प्लास्टिक का इस्तेमाल हो रहा है. वो चाहे दूध, तेल, घी, आटा, चावल, दाल, मसाले, कोल्ड ड्रिंक, शर्बत, स्नैक्स, दवा, कपड़े हो या फिर दैनिक जरूरत की अन्य दूसरी चीजें, आजकल इन सभी सामानों को रखने में प्लास्टिक का इस्तेमाल हो रहा है.

देखा जाये तो प्लास्टिक जीवन का एक अहम हिस्सा बन चुका है. हालांकि प्लास्टिक के इस्तेमाल मानव जीवन पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है. ऐसे में प्लास्टिक से लोगों को छुटकारा दिलाने के लिए प्रभात खबर ने एक मुहिम शुरू की है. प्लास्टिक मुक्त हो देश हमारा.
प्रभात खबर की टीम ने इस पर एक पड़ताल की. जिसमें पाया गया कि बाजार में फल या सब्जियां खरीदने के वक्त लोग प्लास्टिक कैरीबैग का ही इस्तेमाल करते हैं. प्लास्टिक के इस्तेमाल की बड़ी वजह यह है कि टिन के डिब्बों, कपड़े के थैलों और कागज के ठोंगे के मुकाबले प्लास्टिक सस्ता पड़ता है. पर यह बहुत ही हानिकारक है.
दरअसल प्लास्टिक पर्यावरण के लिए एक गंभीर संकट बन चुका है. इस संकट से निजात दिलाने के लिए प्रभात खबर की ओर से लगातार अभियान चलाया जा रहा है. इसी अभियान के तहत सिलीगुड़ी की युवतियों व महिलओं के साथ इस पर परिचर्चा की गयी. प्रस्तुत है परिचर्चा के प्रमुख अंश:-
सरिका कुमारी: आज प्लास्टिक बहुत ही बड़ी समस्या बन चुका है. इसकी रोकथाम के लिए जागरूकता फैलाना बहुत ही जरूरी है. सभी को प्लास्टिक की जगह कपड़े के थैले का इस्तेमाल करना चाहिए. आसपास में कोई प्लास्टिक का इस्तेमाल कर रहा है तो उसे भी जागरूक करने की जरूरत है. जागरूकता फैलाने से ही प्लास्टिक पर रोकथाम संभव है. इसके लिए सभी को एक साथ आगे आना होगा.
नेहा दत्ता: घरों में कचरा रखने के लिए लोग प्लास्टिक का डस्टबिन इस्तेमाल करते हैं. वहां यदि कागज से बने लिफाफे का इस्तेमाल करें तो यह ज्यादा सही होगा. साथ ही घरों में पीने का पानी रखने के लिए मिट्टी के घड़े का इस्तेमाल करना चाहिए. इससे प्लास्टिक पर लगाम लगेगा.
रिमिता घोष: प्लास्टिक कैरीबैग से होने वाला प्रदूषण पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है. ऐसे में लोगों को जागरूक होना चाहिए. नगर निगम की ओर से भी लगातातार जागरूकता अभियान चलाये जाने की जरूरत है.जिससे आम लोगों को प्लास्टिक से होने वाले दुष्परिणाम के बारे में जानकारी हो सके.
अर्णा दास: प्लास्टिक बहुत ही हानिकारक है इसके बारे में लोगों को बहुत ही कम पता है. इसके लिए जागरूकता फैलाने की जरूरत है. हर लोगों को बाजार में खरीदारी करने के दौरान कपड़े या जूट का थैला लेकर जाना चाहिए.
यदि दुकानदार प्लास्टिक कैरीबैग में सामान दे तो उसे भी ऐसा करने से रोकें. यदि कोई दूसरा आदमी भी प्लास्टिक में सामान ले रहा है तो उसे भी मना करें. तभी प्लास्टिक से छुटकारा मिल सकता है.
सपना मिश्रा: प्लास्टिक पर एक बार में प्रतिबंध नहीं लग सकता है. क्योंकि रोजमर्रा की लगभाग हर चीज प्लास्टिक पैकिंग में ही आती है. दूध, दही हो या तेल हो. ऐसे में आम लोगों में प्लास्टिक के दुष्प्रभाव के बारे में बताना होगा. इससे ही प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है.
अदीति कुंडू: बाजार में चाय का कप भी प्लास्टिक से निर्मित होता है. उस जगह पर मिट्टी के कप का इस्तेमाल होना चाहिए. जब भी सब्जी की मार्केटिंग करने के लिए जाये जो घर से कपड़े का थैला ही लेकर जाएं. इससे दूसरे पर भी प्रभाव पड़ेगा. दूसरे भी आप को देखकर प्लास्टिक छोड़ कपड़े का थैला इस्तेमाल करेंगे.
प्रतीक्षा प्रधान: आज कल लोग मार्केटिंग करने निकलते हैं तो घर से झोला या थैला लेकर नहीं जाते है. वे जानते हैं कि दुकानदार भी प्लास्टिक का थैला दे देगा. इस सोच को बदलना होगा. सभी को घर से ही कपड़े का थैला लेकर जाने की आदत डालनी होगी. ऐसा कर धीरे-धीरे ही प्लास्टिक पर रोक लगायी जा सकती है. एक ही बार में प्लास्टिक पर रोक लगाना संभव नहीं है.
जसप्रीत छाबड़ा: पहले दुकानदार कागज के ठोंगे में ही सामान देते थे. धीरे धीरे प्लास्टिक कैरीबैग का प्रचलन शुरू होने के बाद कागज का ठोंगा बंद हो गया. दुकानदारों को फिर से कागज का ठोंगा इस्तेमाल करना चाहिए. इसके लिए नगर निगम को आगे आ कर जागरूकता फैलाने की जरूरत है. साथ ही सभी को घर से मार्केट निकलते वक्त कपड़े का थैला लेकर निकलने की आदत डालनी चाहिए.
श्रृजना राई: सब्जी खरीदने जाने वक्त सभी को कपड़े का थैला लेकर जाना चाहिए. आप को देखकर दूसरे भी कपड़े का थैला लेना शुरू करेंगे. एक दूसरे को देख कर ही जागरूकता बढेगी. ऐसे ही धीरे धीरे प्लास्टिक पर रोक लगायी जा सकती है. इसके लिए सभी को आगे आने का जरूरत है.
सुरभि तोषनीवाल: आजकल हर सामान की पैकिंग प्लास्टिक में हो रही है. इस पर रोकथाम के लिए बड़े स्तर पर जागरूकता फैलाने की जरूरत है. इसके लिए सभी को आगे आना होगा. एक बार में प्लास्टिक पर वैन नहीं हो सकता है. हर घर के लोग जब जागरूक होंगे, तभी इस पर रोक संभव है.
सिनी सरकार: घरों में कचरा रखने के लिए लोग प्लास्टिक थैले का इस्तेमाल करते हैं. उस जगह पर यदि कागज से बने लिफाफे का इस्तेमाल करें तो बहुत ही अच्छा होगा. कागज के ठोंगे या जूट के थैले का उपयोग ज्यादा हो तो प्लास्टिक पर रोक संभव है.
प्रियंका शर्मा: प्लास्टिक को लेकर जागरूकता फैलाने से ही इस पर रोक संभव है. क्योंकि हर चीज आज प्लास्टिक की पैकिंग में ही आ रही है. साथ ही हर कोई बाजार जाते समय घर से कपड़े का थैला लेकर जायें.
रीधि जिंदल: प्लास्टिक इस्तेमाल करने वालों को लेकर ठोस व कड़े कानून बनाने की आवश्यकता है. जो प्लास्टिक का थैला इस्तेमाल करे उस पर जुर्माना लगना चाहिए. कानून के डर से ही लोग प्लास्टिक थैले का इस्तेमाल करना बंद कर देंगे. जबतक लोगों में डर नहीं होगा. प्लास्टिक पर रोक लगाना बहुत ही मुश्किल है.
चौदर्शिनी दत्ता: प्लास्टिक का इस्तेमाल पर्यावरण के लिए खतरे की घंटी है. इस पर रोक लगाना बहुत ही जरूरी है. ऐसे में सभी लोगों को जागरूक होने की जरूरत है. प्लास्टिक की जगह कागज व कपड़े के थैले का इस्तेमाल करने की जरूरत है.
प्राचिता अग्रवाल: प्लास्टिक थैले का जहां उत्पादन होता है वहां से ही इसे वैन करने की जरूरत है. बाजार में प्लस्टिक का थैला आयेगा ही नहीं तो दुकानदार लोगों को कहां से देंगे. इससे प्लास्टिक पर जल्द रोक लगायी जा सकती है.
सौमंती बनर्जी: प्लास्टिक पर रोक के लिए सभी को जागरूक होने की जरूरत है. इसके दुष्परिणाम से सभी को अवगत कराना होगा. तभी लोग प्लास्टिक इस्तेमाल की आदत को छोड़ेंगे. इसके साथ ही हर किसी को कपड़े व कागज का थैला इस्तेमाल करने की आदत डालनी होगी.
बाशोबी मिश्रा: जब तक सख्त कानून नहीं बनेगा, तब तक लोग प्लास्टिक इस्तेमाल करना नहीं छोड़ेंगे.जब तक लोगो में डर नहीं होगा. तबतक लोग इस पर रोक संभव नहीं है. साथ ही सूखे व गीले कचरे को रखने के लिए अलग-अलग व्यवस्था होनी चाहिए.
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