ब्लू बेबी को मिला नया जीवन

Updated at : 31 May 2019 1:46 AM (IST)
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ब्लू बेबी को मिला नया जीवन

टीजीए (शरीर का नीला पड़ जाना) नामक बीमारी से था पीड़ित कोलकाता : नवजात शिशुओं और नन्हे बच्चों में आम जन्मजात विकार उसके दिल से जुड़ा होता है. शिशु के जन्म के बाद बाल रोग विशेषज्ञ बच्चे के दिल की जांच करते हैं कि उसमें से बुदबुदाहट जैसी मंद ध्वनि तो नहीं आ रही? शक […]

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टीजीए (शरीर का नीला पड़ जाना) नामक बीमारी से था पीड़ित

कोलकाता : नवजात शिशुओं और नन्हे बच्चों में आम जन्मजात विकार उसके दिल से जुड़ा होता है. शिशु के जन्म के बाद बाल रोग विशेषज्ञ बच्चे के दिल की जांच करते हैं कि उसमें से बुदबुदाहट जैसी मंद ध्वनि तो नहीं आ रही? शक होने पर इको कार्डियोग्राम किया जाता है. यदि गड़बड़ पायी जाती है, तो अक्सर वह दिल की ऐसी स्थिति होती है जिसमें तुरंत इलाज या सर्जरी की जरूरत नहीं होती, लेकिन कभी-कभी ऐसी गड़बड़ी होती है कि तुरंत सर्जरी करनी पड़ती है.
महानगर के बीएम बिड़ला हार्ट रिसर्च सेंटर में ऐसे ही एक शिशु का इलाज किया गया जो जन्मजात हृदय जनित बीमारी से जूझ रहा था. नवजात ट्रांस्पोजिशन ऑफ ग्रेटर आर्टरीज(टीजीए, शरीर नीला पड़ने लगता है) से जूझ रहा था. 38 दिन के इस शिशु की चिकित्सका पहले एक स्थानीय डॉक्टर कर रहे थे. स्थिति में सुधार नहीं होता देख अभिभावक शिशु को लेकर बीएम बिड़ला हॉस्पिटल पहुंचे थे.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जन्म के बाद ही शिशु को डिहाइड्रेशन और सांस लेने में परेशानी हो रही थी. साथ ही उसका पूरा शरीर नीला पड़ता जा रहा था.
यहां नवजात की चिकित्सा पेडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ शुभेंदु मंडल की देखरेख में शुरू हुई. वहीं शिशु की सेहत लगातार बिगड़ती जा रही थी इसलिए उसे अस्पताल में भर्ती के तुरंत बाद वेंटिलेशन पर रख दिया गया. हालत स्थिर करने के लिए प्रोस्टाग्लैंडीन शुरू की गयी. इको कार्डियोग्राम सह शरीर के अन्य अंगों का टेस्ट किया गया और रिपोर्ट चौंकानेवाली आयी क्योंकि नवजात टीजीए से पीड़ित पाया गया.
डॉ मंडल सह अस्पताल के पेडियाट्रिक एवं एडल्ट कार्डियोसर्जरी विभाग के निदेशक डॉ मनोज डागा ने नेतृत्व में शिशु की चिकित्सा शुरू हुई. चिकित्सकों ने सर्जरी करने का फैसला किया. वहीं ऑपरेशन थियेटर में ले जाने पर पर चिकित्सकों को पता चला कि उसके शरीर में पोषक तत्वों का अभाव, संक्रमण सह किडनी व लीवर में भी समस्या थी. चिकित्सक की टीम ने सूझ-बुझ के साथ सफल सर्जरी को अंजाम दिया. अब नवजात पूरी तरह से स्वस्थ्य हैं. डॉ मंडल ने बताया कि टीजीए काफी विरल व जन्मजात बीमारी है.
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