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पूर्णिमा का दिन गुरु और शिष्य के लिए महत्वपूर्ण दिन : सुधांशुजी महाराज

Updated at : 23 Dec 2018 9:10 AM (IST)
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पूर्णिमा का दिन गुरु और शिष्य के लिए महत्वपूर्ण दिन  : सुधांशुजी महाराज

कोलकाता : पूर्णिमा का दिन गुरु और शिष्य के लिए महत्वपूर्ण दिन है. इस दिन व्यक्ति के मन पर असर पड़ता है. हर कोई पूर्ण होना चाहता है और गुरु ही हमें पूर्ण कर सकता है. गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु का दर्शन और उन्हें सुनने का अवसर ईश्वरीय कृपा से मिलता है. प्रत्येक व्यक्ति […]

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कोलकाता : पूर्णिमा का दिन गुरु और शिष्य के लिए महत्वपूर्ण दिन है. इस दिन व्यक्ति के मन पर असर पड़ता है. हर कोई पूर्ण होना चाहता है और गुरु ही हमें पूर्ण कर सकता है. गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु का दर्शन और उन्हें सुनने का अवसर ईश्वरीय कृपा से मिलता है. प्रत्येक व्यक्ति को यह सोचना चाहिये, हमारी सेवा, हमारा कर्म कितना पूर्ण हुआ.
इससे हमारी यात्रा की दूरी कम होती है मतलब ईश्वर तक पहुंचने की यात्रा.हमें अपने घर की जिम्मेदारियों को पूरा करते हुए चिंताओं को कम करना चाहिये. जिस तरह पानी अपना रास्ता बना लेता है, उसी प्रकार व्यक्ति को भगवान तक पहुंचने के लिए अपना रास्ता बना लेना चाहिये. आपका जीवन साथी आपका शरीर है, उसे स्वस्थ रखें व बुढ़ापे के लिए कुछ पैसा बचा कर रखें. प्राय: देखा गया है कि महिलाएं अपने कपड़े, आभूषण और ब्यूटी पार्लर पर ज्यादा खर्च करती हैं, सेहत पर कम. स्वस्थ शरीर होगा तो ब्यूटी पार्लर की जरूरत नहीं.
दुनिया में सबसे कीमती रिश्ता भगवान का है और भगवान का मंत्र ही गुरुमंत्र है. गुरुमंत्र को सिद्ध कर लेने पर वह कवच बन जाता है. गुरुमंत्र में अनलिमिटेड पावर है, बाकि सब लिमिटेड. ये बातें विश्‍व जागृति मिशन ट्रस्ट, कोलकाता की ओर से आयोजित कार्यक्रम में सुधांशुजी महाराज ने शनिवार को दीक्षित शिष्यों को संबोधित करते हुए कहीं.
जीवन में सत्संग आवश्यक
पूज्य सुधांशुजी महाराज ने कहा, जीवन में भगवान ने जो भी संसाधन दिया है, उसका सदुपयोग करो. हमारे हृदय में तरह-तरह की आशंकाएं उत्पन्न होती हैं, परंतु मन में शांति जरूरी है. शांति के लिए सत्संग जरूरी है.
सच्चे गुरु का आशीर्वचन मिलना भी सौभाग्य की बात है. उन्होंने कहा कि आत्मा को सशक्त करो. हमारे पास कोई धरोहर है तो वह है विचारों की शक्ति. मस्तिष्क में तरह तरह की घटनाओं का आभास होता है. ऐसी शक्ति मन में पैदा होना चाहिये. कभी-कभी निराश होकर आदमी बेवश हो जाता है. यह तब होता है, जब मन अशांत होता है. दिल से टूटा व्यक्ति सबकुछ से निराश हो जाता है. मन को शुद्ध, स्वच्छ रखना जरूरी है.
महाराजजी ने कहा कि मन को निराश करना, घबराना सेहत के लिए अच्छा नहीं है.अपनी बुद्धि को शुद्ध रखो. अकेले में जहां तक संभव हो सके, भगवान का स्मरण करो. धीरज रखना काफी कठिन काम है. चिंतन मन शरीर को शुद्ध रखता है, लेकिन उप चेतन मन में परमात्मा की शक्ति है. जिंदगी विश्‍वास पर चलता है. सफलता जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है.
हम धरती पर आये हैं तो सब कुछ कर लेंगे, यह संभव नहीं है. जहां तक संभव हो सके मन में शांति लाने का प्रयास करना चाहिये.
कथा शुरू होने से पहले बनवारी चौधरी, किशन लाल बजाज, डीएन गुप्ता, धीरज अग्रवाल, शारदा अग्रवाल आदि ने महाराजजी का माल्यार्पण कर स्वागत किया. कार्यक्रम को सफल बनाने में महेंद्र मसकरा, धीरज अग्रवाल, सुभाष मुरारका, प्रदीप रुईया, आलोक मोर, महेश मिश्र, मुरारीलाल चौधरी, किशन बजाज, विश्वनाथ चौधरी, इंदु गोयनका, सरोज गोयनका, ऊषा अग्रवाल, किरण मिश्र, कुसुम लड़िया, अनपुर्णा लुहारूका, कंचन बदेरा इत्यादि का विशेष योगदान रहा. विश्व जागृति मिशन कोलकाता के प्रमुख संचालक व इमामी कंपनी के निदेशक ने संस्था की गतिविधियों को बताते हुये कहा, मिशन लोगों की चिकित्सा, शिक्षा व अन्य कई सामाजिक सेवाएं करती हैं. इसके साथ ही साल में एक बार गुरुदेव के सभी शिष्यों व भक्तों के लिए विराट सत्संग का आयोजन भी करती है.
सत्संग से तन और मन की शुद्धि होती है व विवेक जागृत होता है. सत्संग व सेवा के माध्यम से मनुष्य ईश्वर को रिझाता है. हम अपने कर्तव्यों को पुर्ण करते हुए गुरुवचनों के अनुसार जीवन जीते हुए सहज तरीके से ईश्वर तक पहुंच सकते हैं.
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