बेड़ो बासंती दुर्गा मंदिर परिसर
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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अनुयायियों से बाबा ने कहा- नौ दिनों तक उनसे संपर्क न करें मोक्ष प्राप्ति नहीं होने का दावा, प्रतिवाद के बाद लौटी पुलिस आद्रा : रघुनाथपुर थाना अंतर्गत बेड़ो बसंती दुर्गा मंदिर परिसर में बीते शनिवार की रात से जमीन से चार फुट नीचे कमला कृष्ण ब्रम्हा व्रतचारी मौनी बाबा ने समाधि ले ली है. […]
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अनुयायियों से बाबा ने कहा- नौ दिनों तक उनसे संपर्क न करें
मोक्ष प्राप्ति नहीं होने का दावा, प्रतिवाद के बाद लौटी पुलिस
आद्रा : रघुनाथपुर थाना अंतर्गत बेड़ो बसंती दुर्गा मंदिर परिसर में बीते शनिवार की रात से जमीन से चार फुट नीचे कमला कृष्ण ब्रम्हा व्रतचारी मौनी बाबा ने समाधि ले ली है. उन्होंने अपने अनुयायियों से कहा है कि उन्होंने भगवान के बुलावे पर समाधि ली है. नौ दिनों तक उन्हें किसी को स्पर्श या संपर्क नहीं करना होगा, अन्यथा उनका महाप्रयाण नहीं हो सकेगा. अनुयायियों ने उनकी सुरक्षा में पूरे मंदिर को घेर रखा है.
सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस वहां पहुंची तथा मौनी बाबा को निकालने का प्रयास किया. लेकिन अनुयायियों के विरोध के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा. इधर कई मानवाधिकार संगठनों ने इस निर्णय का विरोध करते हुए पुलिस-प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है.
मंदिर परिसर में अनुयायियों की संख्या बढ़ती जा रही है. काशीपुर थाने के मोनीहारा गांव की निवासी तथा बाबा की बहन वनलता चटर्जी ने बताया कि बचपन से ही कमल कृष्ण में भगवान के प्रति अगाध आस्था थी. धार्मिक अनुष्ठानों में उनकी रुचि थी. एक दिन अचानक कमल कृष्ण अपने घर से भाग गये. वर्षो बाद पता चला कि वह बेरो के खेलाय चंडी पहाड़ के गुफा में रहकर मां चंडी का पूजा कर रहे हैं. 10 वर्ष पहले उन्होंने बेरो स्टेशन के समक्ष बसंती दुर्गा मंदिर का निर्माण किया. मंदिर के नीचे पहले से ही उन्होंने अपना समाधि स्थल बना रखा था.
वह हमेशा ही भगवान के ध्यान में कई कई महीने मौन रहते थे. उपवास भी रखते थे और ध्यान में बैठे रहते थे. कुछ दिन पहले उन्होंने कहा था कि उनकी उम्र हो गयी है. किसी भी दिन भगवान का बुलावा आ सकता है. इसके बाद उन्होंने मौन धारण कर लिया. शुक्रवार को उन्होंने कहा कि उनका बुलावा आ गया है और उन्हें जाना ही होगा.
उन्होंने कहा कि शनिवार को वे समाधि लेंगे. समाधि पर बैठने के बाद कोई भी उन्हें नौ दिनों तक न स्पर्श करें वरना उन्हें मोक्ष प्राप्ति नहीं होगी. इसके बाद वे मंदिर परिसर में बने समाधि कक्ष में समा गये. यह स्थल जमीन से चार फुट नीचे हैं तथा वहां प्रवेश करने के लिए खुली सीढ़ी है.
उन्हें बाहर से ही देखा जा सकता है. उनके समाधि लेने के बाद उनके अनुयायी बड़ी संख्या में मंदिर परिसर में जमा हो गये. उन्होंने समाधि स्थल को घेर रखा है. इसकी सूचना पूरे इलाके में फैल गयी. खबर मिलते ही रघुनाथपुर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और मौनी बाबा को समाधि कक्ष से निकालने का प्रयास किया. लेकिन उनके अनुयायियों ने तीव्र प्रतिवाद किया.
इस कारण पुलिस को वापस लौटना पड़ा. हालांकि कुछ मानवाधिकार संस्थाओं ने कहा कि बाबा को बचाने के लिये पुलिस एवं आम जनता को हर तरह का प्रयास करना चाहिए क्योंकि जीवन अमूल्य है और इसे इस तरह नष्ट नहीं किया जाना चाहिए. बिना कानूनी अनुमति के कोई भी अपने आप को नहीं मार सकता. यह कानूनी अपराध है.
अनुयायियों ने बताया कि मौनी बाबा ने समाधि कक्ष में 50 किलो नमक डाल कर उस पर बैठ गये हैं. प्रतिदिन हजारों की संख्या में अनुयायी उनका अंतिम दर्शन करने पहुंच रहे है.
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