38 आतंकित विजेता भाजपा पंचायत प्रतिनिधि छुपे बोकारो में
Updated at : 18 Jul 2018 12:50 AM (IST)
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पुरुलिया : हाल में हुए पंचायत चुनाव में भाजपा कोटे से जीते मालदा जिला के 38 प्रतिनिधि समेत कुल 46 पार्टी कर्मी बोकारो में शरण लिये हुए हैं. इनमें 22 महिलाएं हैं. 38 पंचायत प्रतिनिधियों में 27 पंचायत सदस्य, 10 पंचायत समिति सदस्य और एक जिला परिषद सदस्य हैं. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक […]
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पुरुलिया : हाल में हुए पंचायत चुनाव में भाजपा कोटे से जीते मालदा जिला के 38 प्रतिनिधि समेत कुल 46 पार्टी कर्मी बोकारो में शरण लिये हुए हैं. इनमें 22 महिलाएं हैं. 38 पंचायत प्रतिनिधियों में 27 पंचायत सदस्य, 10 पंचायत समिति सदस्य और एक जिला परिषद सदस्य हैं. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक व भाजपा के स्थानीय नेता की देखरेख में ये सभी सेक्टर आठ स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में हैं.
पंचायत प्रतिनिधियों में है खौफ :
बोकारो में शरण लेने वाले मालदा जिले के पंचायत प्रतिनिधि सहमे हुए हैं. चावल, दाल, भुजिया, सब्जी व प्याज के टुकड़ा से सजी थाली. बैठा हुआ पात. पेट में भूख, बावजूद इसके निवाला हलक से नीचे उतरने को तैयार नहीं. दिलों-दिमाग में बसा डर ऐसा कि अनजान शख्स को नजरें बार-बार पहचानने की कोशिश करती हो. पहचान स्थापित नहीं होने पर खाना की थाली छोड़ कर कमरे में घुस जाने की जल्दी.
टीएमसी कार्यकर्ता ढा रहे सितम:
मालदा के पंचायत प्रतिनिधियों ने बताया कि बंगाल में 14 मई को पंचायत स्तर का चुनाव हुआ था. 18 मई को परिणाम आया. भाजपा प्रत्याशियों ने हर जिला की कई सीटों पर जीत दर्ज की. इसके बाद सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता ममता बनर्जी के इशारे पर भाजपा कोटा के विजयी प्रत्याशियों पर कहर बरपाने लगे. घर में घुस कर मारपीट करने लगे. बंगाल पुलिस भी तृणमूल कांग्रेस के साथ है. भाजपा कार्यकर्ताओं पर टीएमसी में शामिल होने का दबाव बनाया जा रहा है. ऐसा नहीं करने पर जान से मारने की धमकी मिल रही है. इज्जत से खिलवाड़ किया जा रहा है. बंगाल में ममता की नहीं, क्रूरता की सरकार है.
बंगाल पुलिस भी नहीं करती है मदद: भाजयुमो मालदा जिला मंडल अध्यक्ष अमित घोष ने बताया कि 20 साल से भाजपा से जुड़े हैं. तीन बार पंचायत चुनाव में जीत हासिल की. लेकिन, इतना परेशान पहले नहीं किया गया. वामपंथियों के शासन काल में भी इस तरह का कहर नहीं बरपाया गया. दिन-दहाड़े हत्या कर दी जा रही है. विपक्षियों के सामने दो ही विकल्प है, या तो टीएमसी में शामिल हो जाइए या जान बचाइए.
पुलिस से संपर्क करने पर पुलिस वाले ही झूठा मुकदमा में फंसा दे रहे हैं.
लोकतंत्र की दुहाई देने वाले कभी बंगाल जाकर देख लें : नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों ने कहा कि बंगाल में लोकतंत्र नहीं, तानाशाही है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हर तरह से भाजपा को दबाने के लिए काम कर रही है. चुनाव में जीते हुए प्रत्याशियों को जब नहीं बख्शा जा रहा है, तो समझ सकते हैं कि आम लोगों को क्या सुविधा मिल रही होगी.
लोकतंत्र खतरे में है का नारा दिल्ली में बुलंद करने वालों को बंगाल जाकर देखना चाहिए. बंगाल में टीएमसी कार्यकर्ता हथियार व हिंसा के बदौलत सरकार चला रहे हैं. आम लोगों को वोट नहीं करने दिया जाता है. पंचायत सदस्य विमल राय ने कहा कि जिस प्रदेश में नॉमिनेशन नहीं करने दिया जाता, वहां लोकतंत्र की बात करना ही नहीं चाहिए.
वापसी के बाद क्या होगा कहना मुश्किल: नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों की माने तो अगस्त के पहले सप्ताह में शपथ ग्रहण समारोह है. साथ ही छह अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी होनी है. इसके बाद ही वापसी होगी. लेकिन, यह कोई नहीं बता सकता कि वापसी के बाद क्या होगा?
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