पर्याप्त कोयले की सप्लाई बिजली कंपनियों को

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इसीएल के तकनीकी निदेशक एके सिंह ने खारिज किया कम सप्लाई के तथ्यों को हर बिजली उत्पादक संयंत्र को एसीक्यू के सौ फीसदी कोयले की सप्लाई की गारंटी आसनसोल. इसीएल प्रबंधन ने दावा किया कि सभी बिजली उत्पादक कंपनियों को अनुबंध के अनुसार तथा कुछ मामलों में अनुबंध से भी अधिक मात्र में कोयले की […]

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इसीएल के तकनीकी निदेशक एके सिंह ने खारिज किया कम सप्लाई के तथ्यों को
हर बिजली उत्पादक संयंत्र को एसीक्यू के सौ फीसदी कोयले की सप्लाई की गारंटी
आसनसोल. इसीएल प्रबंधन ने दावा किया कि सभी बिजली उत्पादक कंपनियों को अनुबंध के अनुसार तथा कुछ मामलों में अनुबंध से भी अधिक मात्र में कोयले की सप्लाइ की जारही है. उन खबरों का भी खंडन किया गया जिनमें पर्याप्त कोयले की सप्लाइ न करने की बात कही गयी है.
तकनीकी निदेशक एके सिंह ने कहा कि कंपनी देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के ग्राहकों को कोयला सप्लाइ करने के लिए प्रतिबद्ध है. बिजली उत्पादक कंपनियां जरूरत के मुताबिक कोयला सप्लाइ के लिए कंपनी के साथ ‘फ्यूल सप्लाई एग्रीमेंट (एफएसए) करती हैं. वार्षिक अनुबंध मात्र के मुताबिक ग्राहकों को कोयला सप्लाइ की जाती है. वेस्ट बंगाल पॉवर डेवलेपमेंट कॉर्पोरेशन के बिजली घरों को एसीक्यू के मुताबिक 122 प्रतिशत कोयले की सप्लाई की गयी है. एनटीपीसी के फरक्का एवं कहलगांव ताप बिजली घरों को राजमहल क्षेत्न से कोयला सप्लाइ की जाती है.
राजमहल परियोजना में चल रहे भूमि अधिग्रहण विवाद के बावजूद फरक्का और कहलगांव बिजली घरों को उनके एसीक्यू का 99 प्रतिशत कोयले की सप्लाई की गयी है. राजमहल तथा रानीगंज क्षेत्न से भी कोयले की सप्लाई की गयी है. इसी तरह कलकत्ता इलेक्ट्रिक सप्लाई कॉर्पोरेशन तथा दामोदर वैली कॉरपोरेशन के ताप बिजली घरों को उनके एसीक्यू के 90 प्रतिशत कोयले की सप्लाई हुयी है. उत्तरी भारत में स्थित कुछ ताप विद्युत केंद्रों यथा – दादरी बिजली घर, राजीव गांधी थर्मल पावर स्टेशन, अरावली विद्युत संयंत्न, झज्जर संयंत्न इत्यादि ने कंपनी के ‘पीक प्रोडक्शन पीरियड‘ के दौरान कोयले की पर्याप्त सप्लाई की संभावना के बावजूद कोयला नहीं लिया तथा अपने पास पर्याप्त स्टॉक नहीं रखा.
दक्षिण भारत में तमिलनाडू के बिजली घर बीते वित्तीय वर्ष के अंतिम एवं वर्तमान वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही के दौरान हाल्दिया बंदरगाह में दिक्कत के कारण पर्याप्त कोयला ले नहीं गये. उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान सभी कोयला कंपनियों के उत्पादन में गिरावट आती है. विशेषकर खुली खदान परियोजनाओं को इसका सबसे ज्यादा नुकसान ङोलना पड़ता है. मानसून खत्म होते ही कोयला उत्पादन दर में फिर से सुधार आने लगता है. जुलाई में भारी बारिश से खुली खदानों से उत्पादन काफी प्रभावित हुआ.
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