सिलीगुड़ी में भी बढ़ी बालू माफियाओं की सक्रियता

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सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी शहर में भी इन दिनों बालू माफिया ने अपना साम्राज्य कायम कर लिया है. सिलीगुड़ी के महानंदा, जोरापानी, महेशमारी के साथ-साथ अन्य नदियों में बालू माफियाओं का साम्राज्य कायम है. खासकर मिलनमोड़ से आगे गुलमा इलाके में बालू माफियाओं की सक्रियता काफी बढ़ गई है. इन लोगों पर अवैध रूप से बालू-पत्थर […]

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सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी शहर में भी इन दिनों बालू माफिया ने अपना साम्राज्य कायम कर लिया है. सिलीगुड़ी के महानंदा, जोरापानी, महेशमारी के साथ-साथ अन्य नदियों में बालू माफियाओं का साम्राज्य कायम है. खासकर मिलनमोड़ से आगे गुलमा इलाके में बालू माफियाओं की सक्रियता काफी बढ़ गई है. इन लोगों पर अवैध रूप से बालू-पत्थर के खनन के आरोप लग रहे हैं.

गुलमा से लेकर चम्पासारी मोड़ तक बालू एवं पत्थर की ढुलाई करने वाले दस चक्का वाहनों की धमक से इस इलाके के लोग काफी परेशान हैं. आये दिन कहीं न कहीं कोई दुर्घटना घटते रहती है. हर महीने ही कोई न कोई इन दस चक्का वाहनों की बलि चढ़ जाता है. चम्पासारी से लेकर गुलमा तक एक दर्जन से अधिक सरकारी एवं गैर सरकारी स्कूल हैं. इसके बावजूद इन वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने अथवा नकेल लगाने के लिए प्रशासन ने कहीं से भी किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की.

इन वाहनों की आवाजाही के चलते चम्पासारी गुलमा सड़क की स्थिति भी अत्यंत जजर्र हो गई है. हर वर्ष ही सड़क की मरम्मत की जाती है, लेकिन एक से दो महीने में ही सड़कों की हालत बद से बदतर हो जाती है. इस रोड पर सड़क दुर्घटना में हर महीने ही किसी न किसी की मौत होती है और उसके बाद हो-हल्ला मचने से दो-तीन दिनों तक दस चक्का वाहनों की आवाजाही बंद रहती है. लेकिन उसके बाद फिर से सुबह से लेकर रात भर इन वाहनों की आवाजाही शुरू हो जाती है. आरोप है कि एक-एक वाहन 30-30 टन तक लोड कर सड़क पर आवाजाही करते हैं. कई लोगों ने इस काम में ट्राफिक पुलिस तथा भू एवं भूराजस्व अधिकारियों पर मिलीभगत का भी आरोप लगाया है.

प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रात को नौ बजे के बाद से इन वाहनों की आवाजाही की अनुमति दी गई है, लेकिन प्रशासन का यह निर्देश पूरी तरह से बेअसर साबित हुआ है. कल गुरूवार के दिन भी चम्पासारी के निकट कदम गाछ में एक पांच वर्षीय बच्ची की मौत इसी दस चक्का वाहन से कुचलकर हो ग गई थी. उसके बाद स्थानीय लोगों ने काफी हंगामा किया. कई वाहनों में तोड़-फोड़ हुई और टोल टैक्स काउंटर को भी आग के हवाले कर दिया गया.बच्ची के शव को सड़क पर रखकर जोरदार प्रदर्शन किया गया. हादसे की सूचना पाते ही पुलिस उपायुक्त (डीसीपी, ट्राफिक) श्याम सिंह व प्रधान नगर थाना के इंस्पेक्टर तपन भट्टाचार्य दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे थे और उत्तेजित माहौल को नियंत्रित करने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी.

स्थानीय लोगों ने मिलन मोड़-चम्पासारी रूट पर दिन के बजाय रात में भारी वाहनों के परिचालन की मांग की है. इससे पहले भी बजरी लदे ट्रकों के कारण इस इस रूट पर कई हादसे हो चुके हैं. प्रशासन से कई बार इस रूट पर दिन में भारी वाहनों के परिचालन पर रोक लगाने की गुजारिश की गई, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. पिछले एक वर्षो में कई लोग इन्हीं ट्रकों की चपेट में आकर मारे जा चुके हैं. स्थानीय लोगों ने कई बार इन ट्रकों को दिन में चलने पर रोक लगाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया और प्रशासन से भी गुहार लगायी,लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ.

उसके बाद मौके पर वार्ड नंबर 46 के काउंसिलर शिखा राय ने कहा कि बड़े वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए कई बार पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों से अनुरोध किया गया, लेकिन इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई. इस बीच, माकपा ने मिलनमोड़ में सक्रिय बालू माफियाओं पर नकेल लगाने की मांग प्रशासनिक अधिकारियों से की है. माकपा नेता मुकुल सेनगुप्ता के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने आज यहां एडीएम को इस संबंध में एक ज्ञापन भी दिया है. दूसरी तरफ कल हुई दुर्घटना के बाद आज चम्पासारी इलाके में स्थिति सामान्य है. टोल टैक्स काउंटर निर्माण भी शुरू हो गया है. आज यहां दस चक्का वाहनों की आवाजाही भी देखने को नहीं मिली.

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