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अधूरी पढ़ाई के कारण स्कूलों में भाषण देने में होती थी शर्मिंदगी, 62 साल की उम्र में बीए की परीक्षा देने पहुंचे विधायक

Updated at : 03 Mar 2021 8:33 AM (IST)
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अधूरी पढ़ाई के कारण स्कूलों में भाषण देने में होती थी शर्मिंदगी, 62 साल की उम्र में बीए की परीक्षा देने पहुंचे विधायक

पढ़ाई के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती. राजस्थान के उदयपुर के भाजपा विधायक फूल सिंह मीणा ने यह सिद्ध कर दिया. अब तक दो बार विधायक बने मीणा की उम्र साठ साल है. 40 साल पहले हालात के आगे पढ़ाई छूट गयी थी, मगर जज्बा कायम रहा. लिहाजा, उन्होंने वर्धमान महावीर ओपेन यूनिवर्सिटी में बजाप्ता दाखिला लिया.

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  • 40 साल पहले छूटी पढ़ाई

  • 62 साल की उम्र में बीए की परीक्षा देने पहुंचे विधायक

  • स्कूलों में भाषण देने में होती थी शर्मिंदगी

पढ़ाई के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती. राजस्थान के उदयपुर के भाजपा विधायक फूल सिंह मीणा ने यह सिद्ध कर दिया. अब तक दो बार विधायक बने मीणा की उम्र साठ साल है. 40 साल पहले हालात के आगे पढ़ाई छूट गयी थी, मगर जज्बा कायम रहा. लिहाजा, उन्होंने वर्धमान महावीर ओपेन यूनिवर्सिटी में बजाप्ता दाखिला लिया. उन्होंने विषय के तौर पर राजनीतिशास्त्र का चयन किया और मंगलवार को उदयपुर परीक्षा केंद्र पर बतौर परीक्षार्थी पहुंचे. उन्होंने परीक्षा दी भी.

दरअसल, उच्च शिक्षा पाना उनका सपना था, मगर समय और घर में हालात ने स्कूल से ही पढ़ाई छोड़ने को मजबूर कर दिया. स्कूल छूटने के काफी समय बाद वे राजनीति में आ गये. पहले पार्षद बने. फिर विधायक चुन लिये गये. पढ़ाई पूरी नहीं कर पाने का मलाल रहा. उनकी पढ़ाई की तमन्ना को उनकी बेटियों ने हौसला दिया. लिहाजा, उन्होंने दोबारा पढ़ाई शुरू की. स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने बीए में दाखिला लिया. उनकी तमन्ना है कि वे आगे भी पढ़ाई जारी रखें और पीएचडी की डिग्री हासिल करें.

मीणा ने साफ-साफ बताते हैं कि जब पहली बार विधायक बने, तो उन्हें स्कूलों के कार्यक्रमों में बतौर अतिथि बुलाया जाता था. तब उन्हें बच्चों के सामने भाषण देने में शर्मिंदगी महसूस होती थी. उन्हें लगता था कि वे खुद ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं और बच्चों को पढ़ने की शिक्षा दे रहे हैं. अब वे जहां भी जाते हैं, बच्चों के साथ-साथ बड़ों को भी पढ़ने की सलाह देते हैं.

स्कूल में छूट गई थी पढ़ाई : मीणा ने बताया कि पिता की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी आने से उन्हें स्कूली पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी. परिवार चलाने के लिए वे खेती करने लगे. 2013 में उन्होंने पहली बार विधायकी का चुनाव लड़ा. इसमें जीत भी गए. इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बेटियों से मिली प्रेरणा से उन्होंने फिर पढ़ाई शुरू की. फूल सिंह मीणा उदयपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से दूसरी बार भाजपा विधायक बने हैं. इससे पहले वह उदयपुर नगर निगम में पार्षद थे.

दिन भर के कार्यक्रमों के बाद फूल सिंह मीणा घर पहुंचते हैं. इसके बाद बेटियां उन्हें पढ़ाती हैं.आज के दौर में मीणा आम लोगों के लिए प्रेरणा के स्रोत बन चुके हैं. वैसे बुजुर्ग लोग, जो अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाये हैं, वह सभी इनसे प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने और पढ़ाई करने की सोच रहे हैं. सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में विधायक मीणा उदाहरण बन गये हैं.

बेटियों को पढ़ाने में कसर नहीं छोड़ी : मीणा ने बताया कि बेटियों ने 2013 में ओपन स्कूल से 10वीं कक्षा के लिए फार्म भरवा दिया. विधायक बनने के बाद व्यस्तता बढ़ गयी और वह 2014 में परीक्षा नहीं दे पाए. बेटियों ने 2015 में फिर से फार्म भर दिया. इस बार उन्होंने 10वीं की परीक्षा पास कर ली. इसके बाद 2016-2017 में वह 12वीं में पास हो गए. अभी वह ग्रेजुएशन में लास्ट इयर की परीक्षा दे रहे हैं.

मेधावी छात्राओं को प्लेन का सफर कराते हैं : फूल सिंह मीणा सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं को 80 फीसदी से ज्यादा अंक लाने पर प्लेन का सफर कराते हैं. वे 2016 से यह मुहिम चला रहे हैं. मीणा अब तक 50 से ज्यादा छात्राओं को प्लेन से जयपुर ले जा चुके हैं. वहां उन्हें विधानसभा भवन दिखाने ले जाते हैं. छात्राओं को मुख्यमंत्री और अधिकारियों से भी मिलवाया जाता है.

Posted by: Pritish Sahay

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