मुसलमानों नबी का एखलाक पैदा करो अपने में

चक्रधरपुर : इनसान को उसका एखलाक (व्यवहार) बुलंदियों तक पहुंचाता है. हजरत अनस (रजि) फरमाते हैं कि मैंने रसूल अल्लाह की दस साल तक खिदमत की. आप (स) ने कभी न डांटा न झिड़का. कभी मिट्टी का प्याला टूट जाता पर कभी आप (स) के चेहर ए अनवर पर शिकन तक न आता. हजरत अनस […]
चक्रधरपुर : इनसान को उसका एखलाक (व्यवहार) बुलंदियों तक पहुंचाता है. हजरत अनस (रजि) फरमाते हैं कि मैंने रसूल अल्लाह की दस साल तक खिदमत की. आप (स) ने कभी न डांटा न झिड़का. कभी मिट्टी का प्याला टूट जाता पर कभी आप (स) के चेहर ए अनवर पर शिकन तक न आता.
हजरत अनस (रिज) बयान करते हैं कि रसूल अल्लाह (स.) मुझे किसी काम के लिए भेजे और मैं बच्चों के साथ खेलने लगा, देर हुई और रसूल अकरम खुद पहुंच गये. कहा अनस अभी तक काम पर नहीं गये हो, अनस (रजि) ने कहा अब जाता हूं, लेकिन रसूल अकरम (स.) के चेहरे पर शिकन तक नहीं आयी. इस तरह के एखलाक की जरूरत आज मुसलमानों को है. एखलाक ऐसा हो, जिससे इस्लाम को फायदा पहुंचे.
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