हड़िया बनाने के लिए बेच दिया आंगनबाड़ी का पौष्टिक आहार

Updated at : 20 Aug 2017 7:06 AM (IST)
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हड़िया बनाने के लिए बेच दिया आंगनबाड़ी का पौष्टिक आहार

जानवरों को खिला दिया सत्तू, मामला सारंडा के जामकुंडिया आंगनबाड़ी केंद्र का सारंडा के लगभग सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को नहीं मिल रहा पौष्टिक आहार किरीबुरू : सारंडा में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों और किशोरियों को पौष्टिक आहार नहीं मिल पा रहा है. बच्चों के लिए मिलनेवाला पौष्टिक आहार बाजार में बेच दिया […]

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जानवरों को खिला दिया सत्तू, मामला सारंडा के जामकुंडिया आंगनबाड़ी केंद्र का

सारंडा के लगभग सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को नहीं मिल रहा पौष्टिक आहार
किरीबुरू : सारंडा में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों और किशोरियों को पौष्टिक आहार नहीं मिल पा रहा है. बच्चों के लिए मिलनेवाला पौष्टिक आहार बाजार में बेच दिया जा रहा है. जामकुंडिया गांव के निवासियों ने बताया कि गांव की आंगनबाड़ी सेविका मरियम मुंडू ने किशोरियों व बच्चों का चावल गांव में ही बेच दिया है.
ग्रामीणों के अनुसार हड़िया बनानेवालों को सात सौ रुपये में चावल की बिक्री की गयी है, पैकेटबंद सत्तू जानवरों को खिला दिया गया है. ग्रामीणों के अनुसार सेविका केंद्र में अनुपस्थित भी रहती हैं, जिससे केंद्र में नियमित भोजन भी नहीं बनता है. शनिवार को केंद्र में 8-10 बच्चे ही उपस्थित थे, जबकि सहायिका व सेविका गायब थीं. केंद्र में खिचड़ी बनायी गयी थी ग्रामीणों के अनुसार जामकुंडिया एक उदाहरण मात्र है, सारंडा के लगभग सभी आंगनबाड़ी केंद्रों की कमोबेश ऐसी ही स्थिति है.
हां मैंने 700 में बेचा चावल : सेविका: इस संबंध में पूछने पर सेविका मरियम ने बताया कि चावल और सत्तू बारिश के कारण भींग गये थे, जिसके कारण उसने ग्रामीणों की उपस्थिति में चावल को हड़िया बनाने वाले को 700 रुपये में बेच दिया तथा सत्तू को बाहर फेंक दिया. सेविका ने बताया कि एक बच्चे की सब्जी के लिए तीस पैसे मिलते हैं, तथा छह माह से उन्हें वह पैसा भी नहीं मिला है. इस कारण वह बच्चों को पौष्टिक आहार नहीं दे पा रही हैं. मरियम ने बताया कि केंद्र में 34 बच्चे हैं, जबकि उन पर दो केंद्रों का प्रभार है.
सारंडा के सभी केंद्रों की स्थिति खराब : सीडीपीओ
इस संबंध में मनोहरपुर सीडीपीओ नेली टोपनो ने बताया कि सेविकाओं को कई माह से पैसा नहीं मिला है. सारंडा के लगभग सभी आंगनबाड़ी केंद्रों का हाल बुरा है. केंद्रों की व्यवस्था सुधारने का प्रयास होगा. सेविकाएं चाह लें तो स्थिति काफी हद तक सुधर जायेगी.
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