बेटे की देखभाल के लिए रुके पिता की अस्पताल में हुई मौत, हंगामा

Updated at : 13 Aug 2017 5:37 AM (IST)
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बेटे की देखभाल के लिए रुके पिता की अस्पताल में हुई मौत, हंगामा

सदर अस्पताल. मृतक की मां ने डॉक्टरों पर लगाया लापरवाही का आरोप सरायकेला के सरगीडीह का निवासी था अजीत प्रधान रात के साढ़े ग्यारह बजे अजीत को शुरू हो गयी उल्टी चाईबासा : सदर अस्पताल में इलाजरत नवजात बच्चे की देखभाल के लिए ठहरे बच्चे के पिता की इमरजेंसी कक्ष के बाहर बरामदे में मौत […]

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सदर अस्पताल. मृतक की मां ने डॉक्टरों पर लगाया लापरवाही का आरोप

सरायकेला के सरगीडीह का निवासी था अजीत प्रधान
रात के साढ़े ग्यारह बजे अजीत को शुरू हो गयी उल्टी
चाईबासा : सदर अस्पताल में इलाजरत नवजात बच्चे की देखभाल के लिए ठहरे बच्चे के पिता की इमरजेंसी कक्ष के बाहर बरामदे में मौत हो गयी, जिसको लेकर उसके परिजनों ने शनिवार सुबह अस्पताल में जमकर हंगामा किया. मामला बिगड़ते देख चिकित्सकों ने पुलिस को जानकारी दी, जिसके बाद अस्पताल पहुंची पुलिस ने मामला शांत कराया. इसके बाद परिजन बिना पोस्टमॉर्टम कराये ही शव ले गये. मृतक अजीत प्रधान सरायकेला-खरसावां जिले के सरगीडीह का निवासी था.
उसका नवजात बेटा विगत तीन अगस्त से सदर अस्पताल के स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट में भरती है. उसकी पत्नी व मां भी उसके साथ अस्पताल में ही थे. शुक्रवार रात करीब साढ़े ग्यारह बजे अजीत को अचानक उल्टी होने लगी, जिसे देख वार्ड के अन्य अटेंडरों और नाइट गार्डों ने उसे इलाज के लिए इमरजेंसी कक्ष के बाहर बरामदे में सुला दिया.
…………… मृतक के बड़े भाई वरुण कुमार ने बताया कि अजीत की अचानक तबीयत खराब होने की जानकारी रात के करीब 12 बजे मिली. जानकारी पाते ही वह गांव के अन्य लोगों के साथ रात में ही बाइक से सदर अस्पताल पहुंचा, तो भाई को इमरजेंसी कक्ष के बाहर चबूतरे पर मृत पाया. उसने आरोप लगाया कि चिकित्सक की लापरवाही के कारण अजीत की मौत हुई है. उसने कहा कि सदर अस्पताल में मृतक को अस्पताल की ओर से कपड़े से भी नहीं ढंका गया था.
इंजेक्शन देने के बाद फिर कोई देखने नहीं आया : मां
मृतक अजीत प्रधान की मां मुन्नी देवी ने बताया कि रात में अजीत प्रधान को अचानक उल्टी होने पर उसे इमरजेंसी कक्ष ले जाया गया. वहां चिकित्सक ने जांच कर उसे एक इंजेक्शन दिया, जिसके बाद उसे कोई चिकित्सक देखने नहीं आया. रात के करीब तीन बजे उसकी मौत हो गयी. उन्होंने कहा कि उसके बेटे का चिकित्सक द्वारा ठीक से इलाज किया जाता, तो उसकी जान बच सकती थी.
अटेंडर को कोई बीमारी नहीं थी. हार्ट अटैक से अजीत की मौत हुई है.
. डॉ हिमांशु भूषण बरवार, सिविल सर्जन
ड्यूटी के दौरान रात को ऐसा कोई मरीज नहीं आया था. मरीज का इलाज नहीं किया है और न ही उसकी जांच की गयी है. मरीज के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गयी थी. जानकारी मिलती तो उसका इलाज होता.
डॉ बीके सिंह, सदर अस्पताल
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