आत्महत्या या हादसा नहीं विजय पुरती की हुई है हत्या

Updated at : 02 Jul 2017 12:19 AM (IST)
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आत्महत्या या हादसा नहीं विजय पुरती की हुई है हत्या

परिजनों व ग्रामीणों ने एक स्वर में जताया संदेह, जांच की मांग जेबी तुबिद का बॉडीगार्ड था विजय, अभी नहीं हुई थी शादी विजय के पिता, चाचा सभी आर्मी, सीआरपीएफ, पुलिस में करते थे नौकरी चाईबासा : रांची के बरियातु थाना के बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम परिसर में सिपाही विजय सिंह पूर्ति की मौत हो […]

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परिजनों व ग्रामीणों ने एक स्वर में जताया संदेह, जांच की मांग

जेबी तुबिद का बॉडीगार्ड था विजय, अभी नहीं हुई थी शादी
विजय के पिता, चाचा सभी आर्मी, सीआरपीएफ, पुलिस में करते थे नौकरी
चाईबासा : रांची के बरियातु थाना के बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम परिसर में सिपाही विजय सिंह पूर्ति की मौत हो गयी है. मृत सिपाही चाईबासा के करलाजोड़ी गांव के निवासी हैं. रांची पुलिस के अनुसार विजय सिंह पुरती की एके-47 रायफल से मौत हो गयी है. लेकिन, मृत सिपाही विजय सिंह पूर्ति के परिजन, करलाजोड़ी गांव की महिलाओं, उनकी बहन, विजय के दोस्त, गांव के मुंडा ने इसे आत्महत्या या हादसा मानने से इनकार किया है. इन लोगों का कहना है कि विजय सिंह पूर्ति काफी खुशमिजाज था.
वह अपने घर के लोगों का ही नहीं, गांव के अन्य लोगों की भी मदद किया करता था. सभी ने एक स्वर में कहा कि विजय सिंह पूर्ति की हत्या हुई है. सभी ने मामले में जांच की मांग की है.
दिसंबर से जेबी तुबिद के बॉडीगार्ड के रूप में सेवा दे रहे थे विजय : विजय सिंह पूर्ति की पोस्टिंग रांची पुलिस लाइन में थी.
बीते साल के दिसंबर से विजय पूर्व कैबिनेट सचिव व भाजपा नेता जेबी तुबिद के बॉडीगार्ड के रूप में अपनी सेवा दे रहे थे. जेबी तुबिद के चाईबासा आने पर वह हमेशा उनके साथ आते रहते थे. लेकिन, अपने गांव करलाजोड़ी नहीं आ पाते थे. अंतिम बार विजय मई में अपने गांव करलाजोड़ी आया था.
अविवाहित था विजय, किसी महिला पुलिस से ही शादी करने की थी चाहत
विजय सिंह पूर्ति की उम्र लगभग 34 साल थी. विजय की अभी शादी नहीं हुई थी. विजय की दीदी अनीता पिंगुवा ने बताया कि शादी के बारे में उससे हमेशा पूछा जाता था. विजय को अपनी पसंद की लड़की से शादी करने की छूट दी गयी थी. अनीता ने बताया कि विजय ने एक बार कहा था कि वह पुलिस में ही नौकरी करने वाली से शादी करेगा.
नरसंडा में जमीन लेने वाला था विजय
विजय चाईबासा के नरसंडा में जमीन की खरीदारी करने वाला था. अपने जीजा संग मिलकर वह नरसंडा में जमीन लेने वाला था. कुछ पैसा भी उसने जमीन के लिए दे रखी थी.
हाय…. कहां छोड़कर चला गया संजय, वो खुद को नहीं मार सकता
विजय के घर का नाम संजय था. विजय के घर में उनके बड़े पापा रहते हैं. विधवा चाची रहती हैं. घर में पूरी तरह से मायूसी छायी थी. दीदी अनीता पिंगुवा दहाड़ मारकर रो रही थी. चाची का रो-रोकर बुरा हाल था. दीदी और चाची रो-रोकर कह रही थी हाय कहां चला गया संजय. बार-बार सभी बोल रहे थे वो खुद को कभी नहीं मार सकता था.
चाईबासा के करलाजोड़ी गांव के सिपाही विजय सिंह पुरती की रांची में हुई मौत
पुलिस ने चाचा की लड़की को फोन कर दी मौत की सूचना, परिवार में छाया मातम
विजय की मौत की खबर उनके किसी भी परिजन को नहीं थी. रांची पुलिस ने टुंगरी में रहने वाली विजय की चाचा की बहन लालमुनी कुंकल को इसकी सूचना दी. लालमुनी कुंकल ने विजय की दीदी अनीता पिंगुवा को इसकी सूचना दी. सूचना मिलते ही अनीता पिंगुवा के होश उड़ गये. पूरे परिवार में मातम छा गया. अनीता चाईबासा में रहती हैं. अनीता भागी-भागी करलाजोड़ी पहुंची. यहां मौत की खबर देते ही पूरे घर व गांव में मातम छा गया. विजय की दीदी अनीता ही एक तरह से उनकी अभिभावक थी.
डेढ़ साल की उम्र में गुजर गयी थी विजय की मां, 2012 में हुई पिता की मौत: विजय जब डेढ़ साल के थे, तब उनकी मां बाली पूर्ति का निधन हो गया था. बचपन में ही बहन, चाची ने विजय की परवरिश की. शुरू से ही पुलिस सेवा में जाने के लिए प्रयासरत विजय ने वर्ष 2011 में झारखंड पुलिस की नौकरी अपने मेरिट पर ली. एक साल बाद दिसंबर 2012 में माह में पिता हरिचरण पूर्ति की भी मौत हो गयी.
विजय के सिर से मां और पिता दोनों का साया उठ चुका था. विजय एक भाई व एक बहन था. अब विजय के खुद के परिवार में उसकी बड़ी दीदी अनीता पिंगुवा रह गयी हैं. विजय की मां बाली पुरती के निधन के बाद उनके पिता ने दूसरी शादी कर ली थी. दूसरी शादी से दो बेटे हैं. दोनों ओड़िशा में रहते हैं. पिता भी अंतिम समय में ओड़िशा में ही रहते थे.
8:59 में अपने दोस्त चोकरो को विजय ने किया था फोन, फोन रिसीव नहीं कर सका था चोकरो
विजय का करीबी दोस्त गांव का ही चोकरो गोप था. चोकरो गोप को विजय ने शनिवार की सुबह 8:59 में फोन किया था. चोकरो उस समय स्नान करने गया था. चोकरो गोप की विजय से बात नहीं हो सकी. चोकरो गोप ने बताया कि उसने कॉल चेक नहीं की. इस कारण कॉल बैक भी नहीं कर सका.
दूसरी मां के बेटों से भी विजय का था अच्छा संबंध डेढ़ लाख रुपये लगाकर किया था श्राद्ध कर्म
विजय की अपनी दूसरी मां की बेटों से भी बनती थी. वह उनसे भी बात किया करता था. हाल ही में 26 मार्च को उसने डेढ़ लाख रुपये खर्च कर अपने पिता का दुलसूनूम (श्राद्ध कर्म) किया था. इसमें परिवार के सभी सदस्य जुटे थे.
विजय के पिता के छह में चार भाई पुलिस व सेना में थे, एक की नौकरी में ही हार्ट अटैक से हुई थी मौत : विजय के पिता छह भाई व एक बहन थे. जिसमें, तुराम पूर्ति आर्मी, सूरजा पूर्ति बीएमपी, गोरा पूर्ति बीएमपी तथा मंगल सिंह पूर्ति सीआरपीएफ तथा विजय के पिता हरिचरण पूर्ति आर्मी में थे. मंगल सिंह पूर्ति त्रिपुरा में कार्यरत थे. त्रिपुरा में ही उनकी हार्ट अटैक से मौत हो गयी थी. गांव के मुंडा ने चाचा मंगल सिंह पूर्ति की मौत को भी संदेहास्पद बताया है. विजय के एक चाचा विजय पूर्ति किसान तथा दूसरे सुखलाल पूर्ति ड्राइवर थे.
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