झरने के पानी से बुझ रही प्यास

Updated at : 05 Oct 2016 4:34 AM (IST)
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झरने के पानी से बुझ रही प्यास

विडंबना. उपेक्षित हैं पहाड़ों के राजा पहाड़िया, नहीं मिल रहा लाभ एक तरफ सरकार आदिम जनजाती पहाड़िया के उत्थान के लिए कई तरह ही योजनाएं चला रही है. वहीं पतना प्रखंड के पहाड़िया का जीवन स्तर जस का तस है. क्षेत्र के गांवों में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है. पतना : कभी पहाड़ों के […]

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विडंबना. उपेक्षित हैं पहाड़ों के राजा पहाड़िया, नहीं मिल रहा लाभ

एक तरफ सरकार आदिम जनजाती पहाड़िया के उत्थान के लिए कई तरह ही योजनाएं चला रही है. वहीं पतना प्रखंड के पहाड़िया का जीवन स्तर जस का तस है. क्षेत्र के गांवों में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है.
पतना : कभी पहाड़ों के राजा कहे जाने वाले पहाड़िया की स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है. उन्हें अपने मुलभूत सुविधाओं से भी वंचित होना पड़ रहा है. मामला पतना प्रखंड क्षेत्र के के आमडंडा संथाली पंचायत के उरसा पहाड़ का है. उक्त पहाड़ जमीन से करीब 6 सौ फीट ऊंचाई पर स्थित है. गांव में दो टोला है. जिसमें लगभग 60 घर की आबादी करीब 750 है. गांव के अधिकतर लोग अपना जीपन-यापन लकड़ी काटकर बरहरवा व पतना बाजारों में बेचकर करते हैं. गांव में सरकारी योजनाओं की भी स्थिति ठीक नहीं है. उक्त गांव के लोगों को काम नहीं मिलने के कारण दलालों के माध्यम से विभिन्न प्रदेशों में जाकर मजदूरी करने का काम करते हैं.
क्या कहते हैं ग्रामीण
गांव में आज तक बिजली नहीं पहुंची है.सिर्फ पोल गाड़कर छोड़ दिया गया है.
सूरजा पहाड़िया
गांव में न तो सड़क है और न कोई व्यवस्था.अब तक कच्ची सड़क पर ही चल रहे हैं. पक्की सड़क नसीब नहीं हुई है.
चमरा पहाड़िया
गांव में रोजगार नहीं है.जिस कारण अधिकतर लोग लकड़ी काटकर बेचते हैं. रोजगार के लिए लोग पलायन कर रहे हैं.
मैसी मालतो
सड़क की सुविधा नहीं, बिजली भी नहीं नसीब
झरना का पानी भरते ग्रामीण व गांव की बदहाल सड़क.
नहीं है पेयजल व विद्युत की व्यवस्था
उक्त पहाड़ पर न तो एक भी चापाकल है और न ही कुंआ. ग्रामीणों को अपना प्यास बुझाने के लिये झरने का पानी पीना पड़ता है. जून, जुलाई माह में तो झरना भी सूख जाता है. उक्त पहाड़ के लोगों को चार किलोमीटर दूर आमडंडा संथाली से पानी लाना पड़ता है. जनतिनिधियों ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया. वहीं गांव में बिजली का हाल भी खराब है. 2009 में राजीव गांधी ग्रामीण विकास योजना के तहत पोल तो लगाया गया था. किंतु अभी तक गांव में बिजली नहीं पहुंची है. कई लोगों को तो बिजली के बारे में पता तक नहीं है.
पहाड़िया समाज के उत्थान को लेकर प्रशासन काफी गंभीर है. उन्हें उचित सुविधा मुहैया करायी जायेगी.
विजय प्रकाश मरांडी, बीडीओ
एक तरफ सरकार आदिम जनजाती पहाड़िया के उत्थान के लिए कई तरह ही योजनाएं चला रही है. वहीं पतना प्रखंड के पहाड़िया का जीवन स्तर जस का तस है. क्षेत्र के गांवों में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है.
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