पोशाक सप्लायर दो, बिल एक

Updated at : 10 Jul 2016 5:52 AM (IST)
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पोशाक सप्लायर दो, बिल एक

गड़बड़झाला . विद्यालयों में फर्जी बिल पर पैसा निकासी का मामला अब प्रशासन जुटा मामले की जांच कराने को साहिबगंज : जिले में सत्र 2015-16 में हुए स्कूलों में पोशाक वितरण में काफी अनियमितता बरती गयी है. इसका खुलासा तब हुआ जब जिला कार्यालय को सभी स्कूलों से बिल वाउचर प्राप्त हुआ. यह जानकारी जिला […]

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गड़बड़झाला . विद्यालयों में फर्जी बिल पर पैसा निकासी का मामला

अब प्रशासन जुटा मामले की जांच कराने को
साहिबगंज : जिले में सत्र 2015-16 में हुए स्कूलों में पोशाक वितरण में काफी अनियमितता बरती गयी है. इसका खुलासा तब हुआ जब जिला कार्यालय को सभी स्कूलों से बिल वाउचर प्राप्त हुआ. यह जानकारी जिला शिक्षा परियोजना के डीपीओ सह जिला शिक्षा अधीक्षक जयगोविंद सिंह ने दी. श्री सिंह ने बताया कि इन दिनों फर्जी बिल पर पैसा निकासी का प्रचलन बड़ी तेजी से बढ़ा है. यदि जिला के अधिकारी बारीकी से चीजों को नहीं देख रहे हैं
तो उसे भी जेल की हवा खानी पड़ सकती है. श्री सिंह ने बताया कि ऐसे-ऐसे सप्लायर हैं जो एक ही बिल वाउचर को एक ही तिथि में कई स्कूलों को दिया है. जिसमें बरहरवा के शिल्पी इंटर प्राइजेज और उधवा के राइर्ट्स सप्लायर भी शामिल है. शिल्पी इंटर प्राइजेज ने बिल संख्या 61 से ही 7 फरवरी को प्राइमरी स्कूल कोयरीपाड़ा को 58,800 रुपये का पोशाक सप्लाई बिल दिया. इसके साथ-साथ इसी फर्म द्वारा बिल संख्या 61 से उत्क्रमित मध्य विद्यालय बटाइल को भी 24 जनवरी 2016 को 96400 रुपये का सप्लाई बिल वाउचर देता है. जबकि दोनों बिल का रजिस्ट्रेशन संख्या एसजे 702 और वैट संख्या 20362705019 है. इसी प्रकार राइटर टेलर और राइटर वस्त्रालय में भी समानता है.
दोनों एजेंसी समान भाउचर बिल का इस्तेमाल कर स्कूलों को बिल दिया है. जैसे कि राइटर टेलर का बिल संख्या 49 यूपीएस मसलदपुर बरहरवा को दिया है. तो राइटर वस्त्रालय ने भी बिल संख्या 49 ही यूपी एस मसलंदपुर विद्यालय को दिया है. और ऐसा एक दो में नहीं बल्कि सैकड़ों स्कूलों के वाउचर में ऐसा पाया गया है.
जो जांच का विषय है. इसके अलावे प्रिंस फैशन एजेंसी और कई एजेंसी है जिसने इस कार्य को अंजाम दिया है. जब तक पोशाक वितरण का पूरा स्थल जांच नहीं किया जायेगा तब तक मामला पूरी तरह से सामने नहीं आयेगा. बहरहाल अभी यह मामला छोटे स्तर पर दिख रहा है. लेकिन उच्चस्तरीय जांच में करोड़ों का पोशाक घोटाला सामने आ सकता है.
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