अपनी ही जमीन पर मालिकाना हक नहीं
Updated at : 11 Jun 2017 4:06 AM (IST)
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साहिबगंज बंद . खासमहल कानून से साहिबगंज के करीब एक लाख लोग प्रभावित साहिबगंज : साहिबगंज में खासमहल कानून अंगरेजों को बनाया हुआ है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आजादी के बाद अंगरेजों के बनाये कई नियमों में बदलाव किये गये. लेकिन खासमहल कानून में आज तक बदलाव नहीं हो सका. इसका परिणाम है […]
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साहिबगंज बंद . खासमहल कानून से साहिबगंज के करीब एक लाख लोग प्रभावित
साहिबगंज : साहिबगंज में खासमहल कानून अंगरेजों को बनाया हुआ है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आजादी के बाद अंगरेजों के बनाये कई नियमों में बदलाव किये गये. लेकिन खासमहल कानून में आज तक बदलाव नहीं हो सका. इसका परिणाम है कि यहां के रैयतों को अपनी जमीन पर मालिकाना हक नहीं है. इस कानून से साहिबगंज शहर की करीब एक लाख की आबादी पीड़ित है. 1930 से ही अपनी रैयती जमीन पर मलिकाना हक मांग रहे हैं. सरकार यहां की रैयती जमीन को खासमहल कहती है. जबकि इस जमीन का पूर्व में रजिस्ट्री होती थी. प्रमाण के रूप में कई रैयतों के पास उपलब्ध रजिस्ट्री एवं केवाला है.
बात दिगर है कि झारखंड बनने के बाद भी यहां के रैयतों का लगान रसीद कटता रहा जो वर्तमान में सरकार के मौखिक आदेश से बंद है. सूचना के अधिकार के तहत प्रशासन से यह जानकारी मिली है. मजे की बात यह है कि जिस जमीन को सरकार खासमहल कहती है उसका कोई वेरिफिकेशन तक नहीं है. मतलब साहिबगंज कानून से नहीं अधिकारियों के मौखिक आदेश से काश्तकारी अधिनियम की धज्जियां उड़ाते हुये राजस्व विभाग चल रहा है.
साहिबगंज की जमीन की विधानसभा की उपसमिति ने 2004 में विधानसभा को प्रतिवेदन समर्पित किया था. इसके बाद कार्यान्वयन समिति गठित हुई थी. कार्यान्वयन समिति ने भी 28 अगस्त 2006 के अपना प्रतिवेदन विधानसभा में उपस्थित कर दिया. समिति ने अपनी अनुशंसा में स्पष्ट किया था कि साहिबगंज खासमहल की भूमि नहीं है. इसके बावजूद राज्य सरकार यहां के लोगों के साथ न्याय नहीं कर पा रही है. 2001 से राजस्व लगान रखीद करना मौखिक आदेश से बंद है.
लोगों को सरकारी नक्शा रजिस्टर वन एवं टू थ्री कॉपी का नकल देना भी मौखिक आदेश से बंद किया गया है. बैक द्वारा जमीन के एवज में लोन देना भी बंद है. नतीजतन शहर का विकास थम सा गया है. बड़ी संख्या में बेरोजगारी व्याप्त है. व्यापार उद्योग धंधा समाप्त हो चुके है. साहिबगंज रैयती भूमि यह खासमहल कभी नहीं था.
इसलिये सरकार शीघ्र जमीन की रजिस्ट्री करना चालू करे व राजस्व लगान रसीद काट कर राजस्व जनता से प्राप्त करे. रजिस्टर वन एवं टू का नकल एवं नक्शा का अभिप्रमाणित प्रति लोगों को नहीं देना गलत है. पूर्व में सरकार द्वारा जमीन का अधिग्रहण भूमि अर्जन के प्रक्रिया द्वारा की जाती रही एवं रैयतों को दिया गया है मुआवजा, साहिबगंज के शहरी क्षेत्र की जमीन में उपलब्ध है गैर मजरूआ आम और गैर मजरूआ खास की भूमि,
खासमहल मैनुअल में साहिबगंज का नाम नहीं, तौजी नं0 592 का उल्लेख खासमहल के लिये किया जाता है जबकि तौजी नं0 599 साहिबगंज का है, एसपीटी एक्ट के अनुसार संताल परगना में नहीं की जा सकती खासमहल की कल्पना यह कहती है संथाल परगना गजेटियर, 1930 में दुमका आयुक्त के निर्देश पर अनुमंडल पदाधिकारी साहिबगंज द्वारा सर्वे के पश्चात सभी रैयतों को खतियान निर्गत किये गये साहिबगंज सर्वे के बाद सभी रैयतों के सर्वे का खाता नंबर दिया गया. रैयत की श्रेणी में जमाबंदी रैयत दर्ज.
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