झारखंड के आठ जिलों में सुखाड़ तय, अन्य पर भी है सरकार की नजर, जानें कब हो सकती है घोषणा

सरकार द्वारा 15 अगस्त के बाद कभी भी सूखे को लेकर घोषणा की जा सकती है. अब तक के आंकड़ों के हिसाब से राज्य के आठ जिलों का सुखाड़ग्रस्त घोषित होना तय है.
रांची : झारखंड सरकार राहत फसल योजना के लिए पैकेज की घोषणा 15 अगस्त के बाद कभी भी कर सकती है. हेमंत सरकार पूरी तरह से इस पर नजर बनाये हुए हैं. अब तक के प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 8 जिलों का सुखाड़ घोषित होना तय है. इन जिलों में साहिबगंज, जामताड़ा, चतरा, पाकुड़, गोड्डा, पलामू, देवघर और गढ़वा शामिल हैं. इन सभी जिलों में 31 जुलाई तक सामान्य के मुकाबले 60 से 74 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है.
साथ ही फसलों की बुआई भी 33 प्रतिशत से कम होने की आशंका है. राज्य में 31 जुलाई तक धान की औसत बुआई 15.78%, मक्का की 56.32%, दलहन की 33.89, तेलहन की 36.30 प्रतिशत और मोटे अनाज की बुआई 16.61 प्रतिशत ही हुई है. राज्य सरकार की नजर अन्य जिलों पर भी बनी हुई है.
किसी जिले या क्षेत्र को सुखाड़ग्रस्त घोषित करने के लिए सामान्य रूप से दो चीजों के आकलन का प्रावधान है. सबसे पहले यह देखा जाता है कि किस जिले में 31 जुलाई तक 50 प्रतिशत से कम बारिश हुई है. इसके बाद फसलों की बुआई को आधार बनाया जाता है.
15 अगस्त तक जिन जिलों में 33 प्रतिशत से कम फसलों की बुआई (कवरेज) हुई है, उन जिलों को सुखाड़ग्रस्त घोषित किया जाता है. सुखाड़ग्रस्त घोषित करने के लिए निर्धारित इस सामान्य पैमाने के मुकाबले राज्य के 14 जिलों में सामान्य के मुकाबले 33-59 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है.
आठ जिलों में 60-74 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है. सिर्फ दो ही जिले (पूर्वी और पश्चिम सिंहभूम) में 15-18 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है. यानी सामान्य के मुकाबले 100 प्रतिशत बारिश किसी भी जिले में नहीं हुई है. बारिश की कमी से धान की बुआई प्रभावित हुई है. राज्य में धान की बुआई लक्ष्य के मुकाबले न्यूनतम 0.07 प्रतिशत और अधिकतम 57.71 प्रतिशत हुई है.
अनाज 2022 2021 2020 2019 2018
धान 15.78% 57% 73.22% 25.99% 33.68%
मक्का 56.32% 76.74% 87.08% 77.22% 72.17%
दलहन 33.89% 47.52% 60.89% 51.89% 49.23%
तेलहन 36.30% 43.85% 50.61% 46.20% 66.07%
मोटा अनाज 16.61% 27.45% 32.53% 21.12% 30.85%
50% से कम बारिश और 33% से कम फसलों की बुआई होने पर इलाके को माना जाता है सूखाग्रस्त
साहिबगंज, जामताड़ा, चतरा, पाकुड़, गोड्डा, पलामू, देवघर और गढ़वा में 31 जुलाई तक 60 से 74 % तक कम बारिश
अब तक पश्चिमी व पूर्वी सिंहभूम को छोड़ सभी जिलों में बुआई 33% से कम, हालांकि बुआई के अंतिम आंकड़े 15 अगस्त तक तय होंगे
धान के अलावा मक्का, दलहन, तेलहन और मोटे अनाज की स्थिति बेहतर है. मक्का की बुआई में सबसे बेहतर स्थिति रामगढ़ जिले की है. इस जिले में लक्ष्य के मुकाबले 110.20 प्रतिशत की बुआई हुई है. दलहन के मामले में सबसे बेहतर स्थिति लातेहार जिले की है.
इस जिले में लक्ष्य के मुकाबले दलहन की बुआई 75.25 प्रतिशत हुई है. तिलहन के मामले में सबसे बेहतर स्थिति गुमला जिले की है. इस जिले में लक्ष्य के मुकाबले तिलहन की 69.74 प्रतिशत खेती हुई है. हालांकि दुमका, देवघर, जामताड़ा, गोड्डा और साहिबगंज में तिलहन की खेती नहीं हुई है.
जिला बारिश धान बुआई
साहिबगंज -74% 6.08%
जामताड़ा -73% 0.10%
चतरा -73% 2.08%
पाकुड़ -72% 6.12%
गोड्डा -70% 5.20%
पलामू -61% 0.29%
देवघर -61% 1.06%
गढ़वा -60% 1.60%
दुमका -59% 0.44%
हजारीबाग -57% 2.30%
सिमडेगा -54% 21.13%
गुमला -54% 22.78%
लातेहार -53% 5.32%
गिरिडीह -52% 1.40%
रामगढ़ -51% 11.24%
धनबाद -51% 0.07%
जिला बारिश धान बुआई
लोहरदगा -49% 31.03%
कोडरमा -48% 9.12%
बोकारो -48% 14.31%
खूंटी -44% 16.03%
रांची -42% 9.62%
सरायकेला -33% 28.81%
प सिंहभूम -18% 57.71%
पू सिंहभूम -15% 34.78%
Posted By: Sameer Oraon
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इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.
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