इंटरमीडिएट स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के अभ्यर्थियों ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र, कर डाली ये मांग

अभ्यर्थियों ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में राज्य में फैली बेरोजगारी का जिक्र करते हुए बताया है कि कैसे 5000 पंचायत सचिव पद के अभ्यर्थी कानून, कोर्ट, सरकारों के बीच पीस कर रह गये हैं. सिर्फ पंचायत सचिव अभ्यर्थी ही नहीं, बल्कि अन्य प्रतियोगिता परीक्षा के हजारों अभ्यर्थियों कैरियर अंधकारमय हो गया है.
Jharkhand News, Ranchi News रांची : झारखंड इंटरमीडिएट स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के पंचायत सचिव पद के अभ्यर्थियों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिख मार्मिक गुहार लगायी है. उन्होंने लिखा है कि हमें बचा लें. अभ्यर्थियों ने अनुरोध किसी है कि उनकी समस्याओं का समाधान हो या उन्हें मृत्यु दंड दिये जायें.
अभ्यर्थियों ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में राज्य में फैली बेरोजगारी का जिक्र करते हुए बताया है कि कैसे 5000 पंचायत सचिव पद के अभ्यर्थी कानून, कोर्ट, सरकारों के बीच पीस कर रह गये हैं. सिर्फ पंचायत सचिव अभ्यर्थी ही नहीं, बल्कि अन्य प्रतियोगिता परीक्षा के हजारों अभ्यर्थियों कैरियर अंधकारमय हो गया है.
अभ्यर्थी कुंदन कुमार, आलोक यादव, नेहा परवीन, गौरव सिन्हा, अमन शाह आदि ने बताया कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की ओर से 2017 में कुल 3088 पदों के लिए पंचायत सचिव व निम्नवर्गीय लिपिक पद का विज्ञापन निकाला गया था.
बहाली की सारी प्रक्रिया सितंबर 2019 में पूर्ण कर ली गयी थी, लेकिन अंतिम परिणाम/फाइनल रिजल्ट आयोग ने जारी नहीं किया. अभ्यर्थियों ने राष्ट्रपति से उच्चतम न्यायालय में लंबित एसएलपी (सी) 12490/2020 सत्यजीत कुमार बनाम झारखंड सरकार केस की शीघ्र सुनवाई कराने का आग्रह किया है. अभ्यर्थियों का कहना है कि उच्चतम न्यायालय में केस के लंबित होने के कारण वर्ष 2017 में शुरू हुई पंचायत सचिव /निम्नवर्गीय लिपिक भर्ती प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है.
केस के लंबित होने से राज्य में तृतीय व चतुर्थ वर्ग स्तरीय पदों पर होनेवाली अन्य सभी बहाली प्रक्रिया भी स्थगित पड़ी हुई है. उल्लेखनीय है कि 21 सितंबर 2020 को झारखंड हाइकोर्ट के लार्जर बेंच की ओर से सोनी कुमारी केस में फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार की नियोजन नीति को निरस्त कर दिया था. अनुसूचित जिलों में चल रही नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द कर दिया था. सत्यजीत कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर झारखंड हाइकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है, जो लंबित है.
Posted By : Sameer Oraon
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