अवैध बालू खनन से बिहार के पूर्व डीएसपी ने इकट्ठा की करोड़ों की दौलत, अब रांची स्थित फ्लैट पर पड़ा छापा

अवैध बालू खनन मामले में बिहार के पूर्व डीएसपी के रांची स्थित फ्लैट पर छापा पड़ा है. आर्थिक अपराध इकाई की टीम ने तीन जिलों पर छापेमारी की है. अब तक की जांच में उन पर आय से अधिक 55 प्रतिशत संपत्ति (डीए) का खुलासा हुआ है.
रांची : अवैध बालू खनन में कथित संलिप्तता को लेकर औरंगाबाद के तत्कालीन डीएसपी अनूप कुमार के पटना, रांची और गया के ठिकानों पर आर्थिक अपराध इकाई (इओयू) की विशेष टीम ने छापेमारी की. औरंगाबाद में डीएसपी रहते हुए उन्होंने बालू माफियाओं से सांठ-गांठ कर करोड़ों की दौलत जुटायी. अब तक की जांच में उन पर आय से अधिक 55 प्रतिशत संपत्ति (डीए) का खुलासा हुआ है.
इओयू ने उनके पटना के भूतनाथ रोड स्थित आवास, गया के नूतन नगर स्थित पैतृक आवास और रांची के पिस्का मोड़ काजू बागान के नजदीक लवकुश अपार्टमेंट स्थित फ्लैट में छापा मारा. इस दौरान कई बैंक खाते, जमीन के दस्तावेज और निवेश से जुड़े कागजात मिले हैं. पटना और गया स्थित आवासों की तलाशी में कैश व जेवरात, तो नहीं मिले हैं, लेकिन कई स्थानों पर फ्लैट एवं जमीन के कागजात मिले हैं.
उनके नाम से कुम्हरार में 1250 वर्गफुट का फ्लैट, फुलवारीशरीफ के इस्माइलपुर मौजा में 6.25 डिसमिल कृषि भूमि, पटना के नंदलाल छपरा में 1200 वर्गफुट प्लॉट (मूल्य 75.68 लाख रुपये) के कागजात के अलावा पॉलिसी और अन्य स्थानों पर लाखों के निवेश के दस्तावेज मिले हैं. करीब एक दर्जन बैंक खाते भी मिले हैं, जिनमें भी लाखों रुपये जमा हैं.
फिलहाल सभी की गहन जांच चल रही है. रांची में रातू रोड के पिस्का मोड़ के पास काजू बागान के नजदीक मौजूद लवकुश अपार्टमेंट में तीन बीएचके का लग्जरी फ्लैट पत्नी के नाम से है. जांच में यह बात सामने आयी कि उन्होंने अपनी आय के वैध स्रोतों से 55% अधिक की अवैध संपत्ति जमा कर ली, जो करीब 85.77 लाख रुपये है. गया के नूतन नगर स्थित मकान में रह रहे किरायेदारों से भी पूछताछ की गयी.
1989 में दारोगा नियुक्त हुए अनूप कई स्थानों पर थानेदार भी रहे हैं. प्रोन्नति पाकर वह डीएसपी बने. 32 साल की नौकरी में पद का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति जमा की है.
अनूप कुमार के पास एक करोड़ 53 लाख 31 हजार रुपये की अवैध संपत्ति मिली है. उनकी आय में 89 लाख 31 हजार रुपये जरूरी खर्च भी शामिल है. उनके प्लॉट और फ्लैट की मूल्य सरकारी दर पर आंकी गयी है, जबकि इसका बाजार मूल्य कहीं ज्यादा है. फिलहाल उनके पास से बरामद सभी दस्तावेजों की गहन जांच चल रही है. इसके बाद इनकी अवैध संपत्ति का आंकड़ा बढ़ भी सकता है.
Posted by : Sameer Oraon
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