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1.79 करोड़ का अधिक भुगतान, देखते रहे तीन आइएएस

19 Apr, 2016 8:09 am
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1.79 करोड़ का अधिक भुगतान, देखते रहे तीन आइएएस

वर्तमान सचिव ने फाइल दबाये रखी एसबीटीइ ने उत्तर पुस्तिका व अॉनलाइन रिजल्ट प्रकाशन के लिए एक एजेंसी को 1.79 करोड़ का अधिक भुगतान कर दिया संजय रांची : विज्ञान व प्रावैधिकी (अब उच्च व तकनीकी शिक्षा) विभाग से संबद्ध राज्य तकनीकी शिक्षा पर्षद (एसबीटीइ) ने उत्तर पुस्तिका तथा अॉनलाइन रिजल्ट प्रकाशन के लिए एक […]

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वर्तमान सचिव ने फाइल दबाये रखी
एसबीटीइ ने उत्तर पुस्तिका व अॉनलाइन रिजल्ट प्रकाशन के लिए एक एजेंसी को 1.79 करोड़ का अधिक भुगतान कर दिया
संजय
रांची : विज्ञान व प्रावैधिकी (अब उच्च व तकनीकी शिक्षा) विभाग से संबद्ध राज्य तकनीकी शिक्षा पर्षद (एसबीटीइ) ने उत्तर पुस्तिका तथा अॉनलाइन रिजल्ट प्रकाशन के लिए एक एजेंसी को करीब 1.79 करोड़ रुपये का अधिक भुगतान कर दिया.
एजेंसी को वेबसाइट बनाने, अॉनलाइन रिजल्ट जारी करने तथा प्रमाण पत्र का सत्यापन जैसे कार्य भी करने थे. एजेंसी के जरिये सचिव सहित पर्षद के अन्य अधिकारियों ने फरजी भुगतान का लंबा खेल खेला़ इसे पकड़ने में उस दौरान विभागीय सचिव रहे तीन आइएएस अफसर भी नाकाम रहे. इनमें एल खियांग्ते, डॉ विनोद कुमार अग्रवाल व डॉ एके पांडेय (अब सेवानिवृत्त) शामिल हैं.
इस काम के लिए जिस एजेंसी मेवेरिक कंसलटेंसी सर्विसेस, रांची का चयन किया गया, वह निविदा की शर्तें व अर्हता भी पूरी नहीं करती थी. इस कंपनी का एमडी तारा शाहदेव मामले में चर्चा में आये रंजीत कोहली उर्फ रकीबुल का दोस्त रोहित रमण है़ डॉ अग्रवाल तथा विभाग के पूर्व निदेशक डॉ अरुण कुमार ने तो एजेंसी को भुगतान करने का बाकायदा दबाव भी बनाया था.
ये सारे तथ्य उस जांच रिपोर्ट तथा इसके प्रस्ताव का हिस्सा हैं, जो पर्षद में हुए घोटाले की सूचना के बाद तैयार की गयी थी. रिपोर्ट पर कार्रवाई अभी होनी है. इधर, विभाग के वर्तमान सचिव अजय कुमार ने पहले तो दो माह तक फाइल को दबाये रखा. अब इसे यह लिख कर फाइल डाउन किया है कि आइएएस अफसरों से स्पष्टीकरण मांगने का आधार बताया जाये.
इधर, मामले के सबसे बड़े दोषी एसबीटीइ के पूर्व सचिव अारके साहा ने तो अपने स्पष्टीकरण (12.06.15) में ज्यादातर आरोप को स्वीकार भी कर लिया है. दरअसल लंबे समय से दबी रही जांच रिपोर्ट पर अग्रतर कार्रवाई व समीक्षा का जिम्मा विभाग के निवर्तमान संयुक्त सचिव दिलीप झा को मिला था. वर्तमान सचिव अजय कुमार को प्रेषित जांच रिपोर्ट, इसकी अनुशंसा तथा इससे संबंधित प्रस्ताव में श्री झा ने लिखा है कि यह मामला घोर वित्तीय अनियमितता, जालसाजी व धोखाधड़ी के जरिये लोकधन का गबन किये जाने से संबंधित है. उन्होंने जांच रिपोर्ट के साथ अपनी अनुशंसा/प्रस्ताव भी संलग्न किया था.
प्रस्ताव के मुख्य बिंदु
एसबीटीइ सचिव आरके साहा व अन्य के संबंध में
तत्कालीन सचिव, एसबीटीइ आरके साहा का स्पष्टीकरण न सिर्फ पूर्णत: असंतोषजनक, भ्रामक व तथ्य से परे है, बल्कि उन्होंने ज्यादातर अारोप स्वयं स्वीकार कर लिया है. इन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए इनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही चलाने संबंधी अनुमोदन मुख्यमंत्री से प्राप्त किया जा सकता है.
एसबीटीइ में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत विनय कुमार तिवारी व शैलेश मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए इनके विरुद्ध भी विभागीय कार्यवाही चलायी जा सकती है. श्री साहा तथा मेवेरिक कंसलटेंसी के एमडी रोहित रमण तथा विनय कुमार तिवारी के खिलाफ स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश भी दिया जा सकता है. एसबीटीइ में प्रतिनियुक्त अोम प्रकाश कुमार, व्याख्याता रांची पॉलिटेक्निक से पूछा जा सकता है कि क्यों नहीं फरजी विपत्र पर काउंटर साइन करने तथा भुगतान में सहयोग करने के लिए उनके विरुद्ध प्रशासनिक व कानूनी कार्रवाई की जाये.
तत्कालीन विभागीय सचिव एल खियांग्ते के संबंध में
किसी व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने की मंशा से निष्पादित टेंडर के लिए तैयार एमअोयू का पुनरीक्षण न ही वित्त विभाग अौर न ही विधि विभाग से कराया गया था. तत्कालीन प्रधान सचिव एल खियांग्ते से यह पूछा जा सकता है कि किस परिस्थिति में विषय वस्तु की समीक्षा किये बगैर उन्होंने विभागीय मंत्री से एमअोयू की स्वीकृति प्राप्त कर ली. इतना ही नहीं एमअोयू की स्वीकृति के पूर्व ही एजेंसी को कार्यादेश निर्गत किया जा चुका था.
तत्कालीन अपर मुख्य सचिव आइएएस डॉ विनोद अग्रवाल व डॉ एके पांडेय तथा तत्कालीन निदेशक डॉ अरुण कुमार के संबंध में : इन तीनों से इस आशय का स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है कि किस परिस्थिति में बिना समुचित जांच किये इन लोगों के द्वारा करोड़ों रुपये का गलत/फर्जी बिल भुगतान की स्वीकृति दी जाती रही. यही नहीं डॉ अग्रवाल व डॉ अरुण कुमार ने भुगतान के लिए दबाव भी बनाया.
क्रय समिति के सदस्यों संबंध में : समिति के सदस्यों आरके साहा, विभाग के तत्कालीन सहायक निदेशक डॉ राजशेखर प्रसाद, वित्त विभाग के उप सचिव हरदेव नारायण सिंह व उद्योग विभाग के अवर सचिव लेअो मिंज के खिलाफ झारखंड विनिर्दिष्ट भ्रष्ट आचरण निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश एसबीटीइ को दिया जा सकता है.
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