चुनाव आते ही बन जाती हैं नयी पार्टियां

By Prabhat Khabar Digital Desk
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वर्ष 2005 के विधानसभा चुनाव में 50 और 2009 में 63 दलों ने लड़ा था चुनावआधे से अधिक पार्टियों की हुई थी जमानत जब्त, एक प्रतिशत से भी कम मत मिलेसतीश कुमार, रांची.आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर झारखंड में सरगरमी तेज हो गयी है. राजनीतिक दल प्रचार-प्रसार में जुट गये हैं. इधर, धड़ल्ले से नयी पार्टियों का गठन होना शुरू हो गया है. चुनाव से पहले नयी-नयी पार्टियां बन जाती हैं. इनकी ओर से व्यवस्था परिवर्तन के दावे किये जाते हैं, लेकिन परिणाम आने के बाद इनका आस्तित्व ही खत्म हो जाता है. ऐसा झारखंड में हुए पिछले दो विधानसभा चुनाव में देखने को मिला. वर्ष 2009 में हुए विधानसभा चुनाव में कुल 63 पार्टियों ने चुनाव लड़ा था. इसमें सात राष्ट्रीय, तीन राज्य स्तरीय पार्टियां शामिल थीं. इनके अलावा 53 निबंधित गैर मान्यता प्राप्त पार्टियों ने भी अपना प्रत्याशी खड़ा किया था. कई पार्टियों ने तो सिर्फ एक या दो सीट पर ही प्रत्याशी खड़े किये थे. चुनाव लड़नेवाले आधे से अधिक दलों के प्रत्याशियों का जमानत जब्त हो गया था. वर्ष 2005 में हुए विधानसभा चुनाव में 50 पार्टियों ने उम्मीदवार खड़ा किया था. वर्ष 2005 के विधानसभा चुनाव में 622 निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव लड़े थे, जिसमें से तीन विजयी हुए थे. वर्ष 2009 में 647 निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव लड़े थे,जिसमें सिर्फ दो विजयी हुए थे.बसपा ने खड़ा किया था सबसे अधिक उम्मीदवार, कोई नहीं जीतापिछले विधानसभा चुनाव में बसपा की ओर से सबसे अधिक प्रत्याशी खड़े किये गये थे. पार्टी की ओर से 81 विधानसभा सीटों में से 78 सीटों पर चुनाव लड़ा गया था, लेकिन पार्टी का कोई प्रत्याशी विजयी नहीं हुआ. पार्टी को कुल पड़े वोट का सिर्फ 2.44 प्रतिशत ही मत मिले थे. आधे दर्जन से अधिक दलों के प्रत्याशियों को तो एक हजार से भी कम मत मिले थे.पिछले विधानसभा चुनाव में प्रमुख दलों की स्थितिदलप्रत्याशीजीतेबसपा7800भाजपा6718सीपीआइ0800सीपीएम1000कांग्रेस6114एनसीपी1300राजद5605जदयू1402झामुमो7818झाविमो2511आजसू5405सीपीआइ (एमएल)3301
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