रांची : वर्ष 2019 में 72 हजार लोगों को कुत्तों ने काटा
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 17 Feb 2020 9:08 AM
विज्ञापन
संजय रांची : पिछले साल राज्य भर में 72 हजार लोगों को कुत्तों ने काटा है. यह आंकड़ा जनवरी 2019 से दिसंबर तक का है. गौरतलब है कि कुत्ते के काटने पर पांच सूई लेनी पड़ती है. लेकिन सिर के नजदीक, हाथ, पेट, कंधा व गला आदि में जख्म हो, तो चिकित्सक छह सूई लेने […]
विज्ञापन
संजय
रांची : पिछले साल राज्य भर में 72 हजार लोगों को कुत्तों ने काटा है. यह आंकड़ा जनवरी 2019 से दिसंबर तक का है. गौरतलब है कि कुत्ते के काटने पर पांच सूई लेनी पड़ती है. लेकिन सिर के नजदीक, हाथ, पेट, कंधा व गला आदि में जख्म हो, तो चिकित्सक छह सूई लेने की सलाह देते हैं.
क्योंकि रेबीज का इंफेक्शन ब्रेन पर असर डालता है. इधर डॉग बाइट की बड़ी संख्या के कारण विभिन्न जिलों में एंटी रेबीज इंजेक्शन की कमी हो गयी थी. इससे निबटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल 10 हजार एंटी रेबीज इंजेक्शन की खरीद की है, जिसे विभिन्न जिलों को जरूरत के आधार पर उपलब्ध कराया जा रहा है.
वहीं टेंडर के जरिये 5.5 लाख एंटी रेबीज वैक्सिन तथा 3.80 लाख एंटी रेबीज सिरम की खरीद के लिए टेंडर निकाल दिया गया है. चरणबद्ध तरीके से इसकी आपूर्ति ली जायेगी. झारखंड हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एंड प्रोक्योरमेंट कॉरपोरेशन के जरिये यह खरीद होगी. इससे पहले सभी जिलों के सिविल सर्जनों से कहा गया था कि वह अपने जिले में पूर्व के ट्रेंड के आधार पर इंजेक्शन की जरूरत बताएं. जिलों से मांग संबंधी सूचना मिलने के बाद ही इंजेक्शन खरीदने की प्रकिया शुरू हुई है. बाजार में कम स्टॉक व कोल्ड चेन में रखने की सीमित जगह के कारण इंजेक्शन की अापूर्ति कई चरणों में होगी.
कुत्तों का बंध्याकरण करें स्थानीय निकाय
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े एक अधिकारी का कहना है कि एंटी रेबीज इंजेक्शन न सिर्फ महंगे होते हैं, बल्कि बड़ी संख्या में इनकी खरीद भी अधिक मांग के कारण मुश्किल होती है.
डॉग बाइट की घटना कम करने के लिए यह जरूरी है कि स्थानीय निकाय (शहरी व ग्रामीण दोनों) कुत्तों की आबादी नियंत्रित करें. इसके लिए कुत्तों का बंध्याकरण का काम लगातार चलना चाहिए. पशु गणना-2012, जिसकी रिपोर्ट 2017 में जारी की गयी, के अनुसार झारखंड में कुत्तों की संख्या 1.80 लाख है. रांची में भी आवारा कुत्तों की भरमार है. पर इनके बंध्याकरण का काम करीब दो वर्षों से बंद है. दूसरे शहर व ग्रामीण इलाके की भी यही स्थिति है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन










