20,801 व्यापारियों का इ-वे बिल किया ब्लॉक

Updated at : 11 Feb 2020 3:28 AM (IST)
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20,801 व्यापारियों का इ-वे बिल किया ब्लॉक

रांची : सरकार ने नवंबर व दिसंबर का रिटर्न दाखिल नहीं करनेवाले राज्य के कुल 20801 व्यापारियों का इ-वे बिल ब्लॉक कर दिया है. सबसे ज्यादा इ-वे बिल ब्लॉक रांची वाणिज्यकर प्रमंडल के व्यापारियों का हुआ है. इस मामले में जमशेदपुर प्रमंडल दूसरे नंबर पर है. जिन व्यापारियों का इ-वे बिल ब्लॉक हुआ है,उनमें से […]

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रांची : सरकार ने नवंबर व दिसंबर का रिटर्न दाखिल नहीं करनेवाले राज्य के कुल 20801 व्यापारियों का इ-वे बिल ब्लॉक कर दिया है. सबसे ज्यादा इ-वे बिल ब्लॉक रांची वाणिज्यकर प्रमंडल के व्यापारियों का हुआ है. इस मामले में जमशेदपुर प्रमंडल दूसरे नंबर पर है. जिन व्यापारियों का इ-वे बिल ब्लॉक हुआ है,उनमें से 9743 व्यापारियों का प्रशासन सेंट्रल एक्साइज और 11058 का राज्य सरकार के पास है. इन व्यापारियों पर 80-90 करोड़ रुपये टैक्स बकाया होने का अनुमान है.

इस तरह इस्तेमाल होता है इ-वे बिल : व्यापारिक गतिविधियों में 50 हजार रुपये से अधिक मूल्य के वस्तुओं को एक से दूसरी जगह ले जाने के अलावा एक से दूसरे राज्य तक सामान लाने और ले जाने के लिए इ-वे बिल इस्तेमाल किया जाता है. निबंधित व्यापारी जीएसटी पोर्टल से इसे डाउनलोड करते हैं.
इस पोर्टल में ही एेसी व्यवस्था है कि दो माह तक रिटर्न दाखिल नहीं करने पर इ-वे बिल ब्लॉक हो जायेगा. रिटर्न दाखिल नहीं करने के अलावा इ-वे बिल में दर्ज सामग्री का मूल्य और दाखिल किये गये रिटर्न में अंतर पाये जाने पर भी इ-वे बिल ब्लॉक हो जाता है.
संबंधित व्यापारी द्वारा रिटर्न दाखिल करने या भूल सुधार करने के बाद इ-वे बिल डाउनलोड होता है. जिन व्यापारियों का इ-वे बिल ब्लॉक हुआ है, उन पर बकाया टैक्स की सही जानकारी उनके द्वारा रिटर्न दाखिल करने के बाद मिलेगी. विभाग ने रिटर्न दाखिल नहीं करने की वजह से मिलनेवाला जीएसटी इन व्यापारियों पर कम से कम 80-90 करोड़ रुपये बकाया होने का अनुमान किया है.
10% का प्रशासनिक अधिकार सेंट्रल एक्साइज को
राज्य के जिन 20,801 का इ-वे ब्लॉक हुआ है, उनमें 9,743 व्यापारी एेसे हैं, जिनका एडमिनिस्ट्रेशन सेंट्रल एक्साइज और 11058 का राज्य सरकार के वाणिज्यकर विभाग के पास है. जीएसटी लागू होने के बाद केंद्र सरकार ने राज्यों में निबंधित व्यापारियों में से 10% का प्रशासनिक अधिकार सेंट्रल एक्साइज और 90% का राज्य सरकार को दिया. यह व्यवस्था दो वर्षों तक कायम रही. इसके बाद निबंधित होनेवाले व्यापारियों के 50% का प्रशासनिक अधिकार सेंट्रल एक्साइज और 50% का राज्य सरकार को देने का फैसला किया.
सबसे अधिक रांची प्रमंडल व सबसे कम दुमका के व्यापारियों का इ-वे बिल ब्लॉक है
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