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सुनिए झारखंड के नायकों को : साहित्य अकादमी शाखा की स्थापना की जाये

Updated at : 29 Nov 2019 7:47 AM (IST)
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सुनिए झारखंड के नायकों को : साहित्य अकादमी शाखा की स्थापना की जाये

शंभु बादल असमान शिक्षा व्यवस्था सामान्य लोगों की प्रगति के लिए बड़ी बाधा आठवें दशक में उभरने वाले कवियों में शंभु बादल प्रमुख हैं. पैदल चलने वाले पूछते हैं,सपनों से बनते हैं सपने, मौसक को हांक चलो जैसे उनके चर्चित काव्य-संग्रह हैं. हजारीबाग से प्रसंग पत्रिका का संपादन करते हैं. विनोबा भावे विवि, हजारीबाग स्नातकोत्तर […]

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शंभु बादल
असमान शिक्षा व्यवस्था सामान्य लोगों की प्रगति के लिए बड़ी बाधा
आठवें दशक में उभरने वाले कवियों में शंभु बादल प्रमुख हैं. पैदल चलने वाले पूछते हैं,सपनों से बनते हैं सपने, मौसक को हांक चलो जैसे उनके चर्चित काव्य-संग्रह हैं. हजारीबाग से प्रसंग पत्रिका का संपादन करते हैं. विनोबा भावे विवि, हजारीबाग स्नातकोत्तर हिंदी विभागाध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त हुए हैं. राधाकृष्ण पुरस्कार, त्रिवेणीकांत साहित्य पुरस्कार एवं अन्य पुरस्कारों से सम्मानित हैं. फिलहाल, वे स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं.
झारखंड अपनी बहु भाषिकता के साथ ही बहु संस्कृति व समृद्धि के लिए प्रसिद्ध है. यहां हिंदी के साथ ही उरांव, मुंडारी, मगही, भोजपुरी, मैथिली, बांग्ला व अन्य भाषाएं प्रचलन में हैं. यहां इनके साहित्य की मजबूत परंपरा रही है.
लेकिन अभी तक केंद्रीय साहित्य अकादमी की शाखा की स्थापना नहीं हो सकी है. राजनेता व सरकार इसकी गंभीरता को समझें. इसकी स्थापना से भाषा, साहित्य व संस्कृति के विकास में मदद मिलेगी. असमान शिक्षा व्यवस्था सामान्य लोगों की प्रगति के लिए एक बड़ी बाधा है. सरकारी स्कूलों और प्राइवेट स्कूलों की शिक्षा में बहुत अधिक गुणात्मक अंतर है. सरकारी स्कूलों में अच्छी पढ़ाई के प्रति प्राय: वैसी प्रतिबद्धता नहीं दिखती, जैसी प्राइवेट स्कूलों में दिखती है. सस्ता रहने के कारण गरीब बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं. जबकि महंगा होने के बावजूद आर्थिक रूप से समृद्ध बच्चे प्राइवेट स्कूल में. ऐसी ही स्थिति सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों की है.
अच्छी व्यवस्था की कमी के कारण समर्थ लोग प्राय: सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने से बचते हैं. बेरोजगारी बढ़ती जा रही है.रोजगारोन्मुख शिक्षा और रोजगार की सृजन आज की बड़ी जरूरत है. इस अोर ध्यान देना होगा. स्वच्छता और पर्यावरण पर जोर दिया जा रहा है. हालांकि इस ओर कुछ प्रगति तो हो रही है. लोगों में जागरूकता आ रही है, लेकिन व्यावहारिक स्तर पर गंदगी, कूड़े-कचड़े इधर उधर प्राय: दिखाई पड़ते हैं. नदियों में गंदगी बहती है. व्यापक सफाई क्षेत्र में सघन और सतत कार्य करते रहने की जरूरत है. झारखंड को प्रदूषण से बचाने और हरा-भरा बनाने के लिए विभिन्न तरह के पौधे पर्याप्त संख्या में यथासमय लगाये जाने चाहिए.
वोट की अपील
हमें अपने मताधिकार का प्रयोग अवश्य करना चाहिए. हमें वैसे उम्मीदवार के पक्ष में मत देना चाहिए, जो सच्चे अर्थ में जनसेवी तथा योग्य, सक्रिय और अपने क्षेत्र के विकास में गहरी रुचि रखनेवाला दृष्टिसंपन्न व्यक्ति हो.
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