रांची : नहीं मिल रही जमीन, राजधानी की महत्वपूर्ण योजनाएं अधर में

By Prabhat Khabar Digital Desk
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धरातल पर उतरतीं ये योजनाएं तो राजधानीवासियों को होता फायदा, लेकिन...
रांची : सड़क चौड़ीकरण, फ्लाइओवर और सीवरेज-ड्रेनेज जैसी राजधानी रांची की कई महत्वपूर्ण योजनाएं जमीन नहीं मिलने के कारण अधर में लटकी हुई हैं.
शहर में पांच फ्लाइओवर बनने थे. इनमें से चार के लिए पर्याप्त जमीन नहीं मिली. ऐसे में जमीन के अभाव में फ्लाइओवर की तीन योजनाएं तो रद्द भी कर दी गयीं. जबकि, एक फ्लाइओवर के लिए कम से कम जमीन अधिग्रहित करने को कहा गया है. इधर, आनंद लोक अस्पताल खोलने के लिए भी सरकार जमीन नहीं दे पायी. तकनीकी विशेषज्ञों के मुताबिक अव्यावहारिक योजना के कारण सीवरेज-ड्रेनेज का काम भी लटका हुआ है.
जमीन के अभाव में ठंडे बस्ते में चली गयी तीन फ्लाइओवर की योजना
शहर में तीन फ्लाइओवर बनाने का डीपीआर तैयार हुआ था. सुजाता चौक फ्लाइओवर, मेन रोड फ्लाइओवर और लालपुर फ्लाइओवर पर काम कराना था, लेकिन जैसे ही जमीन लेने की बात हुई, विरोध शुरू हो गया. पथ निर्माण विभाग को निर्देश दिया गया कि अभी इस योजना पर आगे नहीं बढ़ा जाये और मामला सात साल से लटक गया.
हरमू रोड फ्लाइओवर की जमीन पर भी पेच, एनएचएआइ करेगा काम
हरमू रोड फ्लाइओवर के लिए किशोरगंज और आसपास की जमीन लेनी थी. इसका स्थानीय लोगों ने खुल कर विरोध शुरू कर दिया. इस बार भी लोग विरोध में सड़क पर आ गये. जमीन नहीं मिलने के कारण विभाग फ्लाइओवर निर्माण के मामले में आगे नहीं बढ़ सका. इस काम को नये सिरे एनएचएआइ शुरू करनेवाला है.
रातू रोड चौड़ीकरण व एलिवेटेड कॉरिडोर
रातू रोड चौड़ीकरण का काम 10 साल पहले ही हो जाता. चौड़ीकरण के लिए कहीं-कहीं जमीन की जरूरत थी. जमीन मिलने की आस कम थी. ऐसे में विभाग आगे नहीं बढ़ सका.
बाद में तय हुआ कि जितनी जमीन उपलब्ध है, उतने में ही सड़क बना दी जाये. इससे भी समस्या हल नहीं होता देख इसका रास्ता निकालने के लिए एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की योजना तैयार हुई. एनएचएआइ ने कमान संभाला. एलिवेटेड रोड के लिए कई रैयतों को नोटिस दिया गया, हालांकि अब तक जमीन नहीं ली जा सकी है. प्रोजेक्ट को तकनीकी कारणों से अभी रोका गया है.
आनंद लोक अस्पताल को जमीन नहीं
पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध आनंद लोक अस्पताल के लिए कांके में पांच एकड़ जमीन उपलब्ध करानी थी. अस्पताल प्रबंधन ने 100 करोड़ की लागत से यहां सुपर स्पेशियालिटी अस्पताल खोलने की योजना तैयार की थी. इसके बनने से यहां के लोगों को सस्ती दर पर इलाज मिलता, लेकिन प्रबंधन को जमीन ही नहीं मिली. कई बार के प्रयास के बाद भी जमीन उपलब्ध नहीं हुई. इस वजह से मामला लटक गया.
मेडिको सिटी का टेंडर ही नहीं हुआ
इटकी मेडिको सिटी का निर्माण इटकी में करना था. सरकारी की इस मत्वाकांक्षी परियोजना अगर सफल होती, तो राज्य के लोगों को काफी लाभ होता.
साथ ही मेडिकल छात्रों को फायदा होता. अब तक इसका चार बार टेंडर निकला. टेंडर में कोई भी कंपनी नहीं पहुंचती है. हर बार सिंगल टेंडर भी पड़ा. ऐसे में तकनीकी कारणों से टेंडर रद्द करना पड़ रहा है. सरकार की शर्तों पर यहां कंपनियां नहीं पहुंच रही हैं.
सीवरेज-ड्रेनेज सिस्टम अव्यावहारिक
राजधानी में चल रही सीवरेज-ड्रेनेज का भी बुरा हाल है. तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि सीवरेज-ड्रेनेज सिस्टम यहां की भौगोलिक व्यवस्था के मद्देनजर अव्यावहारिक योजना है. सरकार व कंपनी की तालमेल में भी थोड़ी कमी नजर आ रही है. इन कारणों से इसका काम ठीक से नहीं हो पा रहा है. योजना काफी पीछे है. केवल कुछ वार्डों में आधा-अधूरा काम हुआ है.
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