लोहरदगा एसपी सड़क हादसे में बाल-बाल बचे, चालक की मौत
Updated at : 20 May 2019 1:56 AM (IST)
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रांची : रांची के पिस्का नगड़ी के पास शनिवार की देर रात सड़क हादसे में लोहरदगा एसपी प्रियदर्शी आलोक बाल-बाल बच गये. हालांकि दुर्घटना में उनके ड्राइवर राम रतन सिंह की मौत हो गयी. जानकारी के अनुसार एसपी प्रियदर्शी आलोक रांची से लोहरदगा वापस जा रहे थे. इस बीच रात लगभग 12 बजे उनकी स्काॅर्पियो […]
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रांची : रांची के पिस्का नगड़ी के पास शनिवार की देर रात सड़क हादसे में लोहरदगा एसपी प्रियदर्शी आलोक बाल-बाल बच गये. हालांकि दुर्घटना में उनके ड्राइवर राम रतन सिंह की मौत हो गयी. जानकारी के अनुसार एसपी प्रियदर्शी आलोक रांची से लोहरदगा वापस जा रहे थे. इस बीच रात लगभग 12 बजे उनकी स्काॅर्पियो नगड़ी स्थित ममता होटल के समीप छड़ लदे ट्रक (जेएच 01एल-3698)से टकरा गयी.
ट्रक ड्राइवर के अचानक ब्रेक लगाने के कारण यह हादसा हुआ. इस हादसे में एसपी के ड्राइवर राम रतन सिंह गंभीर रूप से घायल हो गये. तत्काल उन्हें रिम्स ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गयी. वह मूल रूप से रामगढ़ के रहनेवाले थे.
रिम्स में पोस्टमार्टम करने के बाद रविवार को राम रतन सिंह का पार्थिव शरीर न्यू पुलिस लाइन लोहरदगा ले जाया गया, जहां एसपी समेत जिले के तमाम पुलिस पदाधिकारियों व जवानों ने अंतिम सलामी दी. राम रतन सिंह की बहाली 12 नवंबर 2008 को लोहरदगा में ही हुई थी. बहाली से अब तक वे लोहरदगा में ही सेवा दे रहे थे. लोहरदगा पुलिस विभाग में वे काफी लोकप्रिय थे़ इधर पुलिस ने छड़ लदे ट्रक को जब्त कर लिया है.
तीन भाइयों में सबसे बड़े थे राम रतन सिंह : राम रतन सिंह के पिता रामचंद्र सिंह सीसीएल के सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं. उनका पूरा परिवार रामगढ़ में सीसीएल के क्वार्टर में रहता है. तीन भाइयों में राम रतन सिंह सबसे बड़े थे. उनके दो भाई राम अवतार सिंह व ललन सिंह रामगढ़ में ही रहते हैं.
राम रतन सिंह के दो पुत्र व दो बेटियां हैं. बड़ी बेटी काजल (13), बेटा लक्की (11), बेटी अंजना (सात) और एक छोटा बेटा है. उनकी पत्नी गृहिणी हैं. अपने भाई का पार्थिव शरीर ले जाने पहुंचे राम अवतार सिंह ने बताया कि परिजनों को सुबह लगभग तीन-चार बजे गिद्दी थाना से सूचना मिली कि राम रतन सिंह की सड़क दुर्घटना में मौत हो गयी है.
दुर्घटना के पांच घंटे पहले पत्नी से की थी बातचीत : उनकी मौत की सूचना जैसे ही घरवालों को मिली, वैसे ही घर में मातम छा गया. उनकी पत्नी सोनपुर अपने मायके में थीं. उन्हें रामगढ़ बुलाया गया़ राम रतन ने अपनी पत्नी से दुर्घटना से पांच घंटे पहले फोन पर बातचीत की थी. उन्होंने बच्चों से कहा था कि चुनाव का समय है. छुट्टी नहीं मिल रही है, लेकिन 10-11 जून को हम गिद्दी जरूर आयेंगे.
- मूल रूप से रामगढ़ के रहनेवाले थे रामरतन सिंह
- 12 नवंबर 2008 को लोहरदगा में ही हुई थी बहाली
- न्यू पुलिस लाइन लोहरदगा में दी गयी अंतिम सलामी
मेरे जीवन का सबसे बुरा दिन है : प्रियदर्शी आलोक
रांची से जैसे ही चालक राम रतन सिंह का पार्थिव शरीर लोहरदगा पहुंचा, पूरा माहौल गमगीन हो गया. एसपी प्रियदर्शी आलोक भी खुद को रोक नहीं पाये. उन्होंने जवानों के साथ कंधा देकर शव को वाहन से उतारा. एसपी ने कहा कि आज मेरे जीवन का सबसे बुरा दिन है.
मौके पर एसपी ने चालक के भाई राम अवतार सिंह को व्यक्तिगत रूप से 50 हजार रुपये दिये. वहीं जिले के अन्य पुलिस कर्मियों ने भी अपनी-अपनी ओर से आर्थिक सहायता की. पुलिस लाइन से पूरे सम्मान के साथ चालक के शव को उनके पैतृक गांव रामगढ़ भेजा गया.
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