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कॉस्टिक तालाब से 46 घंटे बाद मलबा हटाने का काम शुरू, हिंडाल्को हादसे की जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी बनी

Updated at : 12 Apr 2019 7:38 AM (IST)
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कॉस्टिक तालाब से 46 घंटे बाद मलबा हटाने का काम शुरू, हिंडाल्को हादसे की जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी बनी

एनडीआरएफ ने एक पोकलेन को निकाला रांची : राज्य सरकार ने हिंडाल्को कॉस्टिक तालाब हादसे की जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी बनायी है. इसमें सीएमपीडीआइ और मेकन के एक-एक विशेषज्ञ, डीएफओ रांची तथा प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के क्षेत्रीय पदाधिकारी होंगे. कमेटी डंप यार्ड फेल होने की भी जांच करेगी. इसके अलावा जांच कमेटी गार्डवाल […]

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एनडीआरएफ ने एक पोकलेन को निकाला
रांची : राज्य सरकार ने हिंडाल्को कॉस्टिक तालाब हादसे की जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी बनायी है. इसमें सीएमपीडीआइ और मेकन के एक-एक विशेषज्ञ, डीएफओ रांची तथा प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के क्षेत्रीय पदाधिकारी होंगे. कमेटी डंप यार्ड फेल होने की भी जांच करेगी. इसके अलावा जांच कमेटी गार्डवाल बनाने का स्पेसिफिकेशन और रेड मड के पर्यावरण पर पड़ रहे प्रभाव की भी जांच करेगी.
इधर हिंडाल्को कॉस्टिक तालाब के धंसने के 46 घंटे बाद गुरुवार को मलबा हटाने का काम शुरू किया गया. दिन के 11.45 बजे पहला हाइवा मड लेकर निकला. मड की ढुलाई के साथ ही हाइवा व अन्य भारी गाड़ियों को गुजरने के लिए रास्ता बनाने का भी काम चल रहा है. मड निकालने के लिए हिंडाल्को प्रबंधन की ओर से तीन पोकलेन और 15 हाइवा लगाये गये हैं.
रात में भी काम निर्बाध रूप से हो सके, इसके लिए जेनरेटर भी लगाया गया है. जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शक्ति कुमार, एनडीआरएफ व हिंडाल्को के अधिकारी काम पर नजर रखे हुए हैं. इधर, रेलवे ने भी पटरियों से मलबे को हटाने के लिए दो पोकलेन लगाये हैं.
एनडीआरएफ ने एक पोकलेन को निकाला : एनडीआरएफ की टीम ने गुरुवार को मलबे में दबे एक पोकलेन को निकाल लिया. पोकलेन निकालने के बाद उसे मलबा हटाने के काम में लगा दिया गया. एनडीआरएफ ने बताया कि अभी एरिया का फिजिकल सर्वे किया गया है. किसी प्रकार के लीकेज या रेडिएशन का मामला नहीं मिला है.
इससे आश्वस्त होने के बाद मलबा हटाने का काम शुरू किया गया. एनडीआरएफ वेट एंड वाच की स्थिति में है. जैसे-जैसे मलबा हटेगा, जो भी चीजें निकलेंगी, उसकी जांच होगी. शव निकलने की स्थिति में पुलिस और अधिकारियों को सूचित किया जायेगा.
कृषि, पेयजल विभाग व प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने सैंपल लिये : मलबा हटाने के काम के साथ ही गुरुवार को कृषि, पेयजल विभाग व प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अधिकारियों ने पानी व मिट्टी के सैंपल कलेक्ट किये. अधिकारियों ने बताया कि प्रयोगशाला में इनकी जांच कर यह सुनिश्चित की जायेगी कि मलबे और रसायन के कारण यह कितना प्रदूषित हुआ है.
कृषि विभाग ने खेतों की मिट्टी, प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने स्वर्णरेखा नदी का पानी व प्रभावित इलाकों के कुएं के पानी का सैंपल लिया. पेयजल विभाग ने भी आसपास के गांवों के कुएं व तालाब से सात सैंपल लिये. इन सैंपलों की जांच कर रिपोर्ट सरकार को सौंपी जायेगी.
प्रभावित जमीन खेती के लायक नहीं : डीएओ
जिला कृषि पदाधिकारी अशोक सिंह ने हादसे से प्रभावित खेतों का निरीक्षण किया. उन्होंने बताया कि जिस इलाके में मलबा फैला है अथवा पानी का रिसाव हुआ है, वह जमीन अब खेती के लायक बिल्कुल नहीं है. अंचल कार्यालय की ओर से मापी के बाद ही पता चलेगा कि कितनी खेती योग्य जमीन बेकार हो गयी.
जांच अधिकारी ने अटेंडेंस रजिस्टर को देखा
सरकार द्वारा नियुक्त जांच अधिकारी आयुक्त शुभ्रा वर्मा को कंपनी ओर से अटेंडेंस रजिस्टर दिखाया गया. इसमें 26 लोगों की इंट्री है. इनमें से एक के लापता होने की बात कही गयी है. श्रीमती वर्मा ने सभी मजदूरों के आधार कार्ड की कॉपी ले ली है और अंटेडेंस रजिस्टर को जांच के लिए भेज दिया है.
बरसात से पहले मलबा हटाना बड़ी चुनौती
हादसे के बाद रेड मड से निकला मलबा आसपास के गांवों के करीब पहुंच चुका है. सबसे गंभीर बात सह है कि मलबे से थोड़ी ही दूर पर स्वर्णरेखा नदी बहती है. नदी तक जमीन ढलान है. बारिश के आते ही मलबा बहकर नदी में चला जायेगा. बरसात से पहले इस मलबे को हटाना सबसे बड़ी चुनौती है.
बताया जाता है कि रेड मड से निकला मलबा करीब 20 एकड़ में तीन से पांच मीटर ऊंचाई तक फैल चुका है. इसे हटाने में करीब एक महीने का समय लग सकता है.
तीन इंजीनियरिंग संस्थानों के प्रोफेसर को शो कॉज
झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने देश के तीन इंजीनियरिंग संस्थानों के प्रोफेसर को शो कॉज नोटिस जारी किया है. प्रबंधन द्वारा कहा गया था कि सीएसआइआर-सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट, रुड़की की डिजाइन के अनुरूप ही रेड मड डंप की ऊंचाई है.
इसके चीफ साइंटिस्ट ए घोष, आइआइटी मुंबई के प्रो डीएन सिंह और आइआइटी आइएसएम धनबाद के प्रो शरद कुमार दास ने स्टडी रिपोर्ट तैयार कर इसकी डिजाइन (ऊंचाई 42 मीटर) को सही ठहराया था. प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने पाया कि मड डंप की ऊंचाई बढ़ाने में मानक का अनुपालन नहीं किया गया है. इस कारण तीनों संस्थानों के प्रोफेसर को शो कॉज किया गया है.
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