रांची : वीरान जगह पर बना भवन, चहारदीवारी नहीं बनी

Updated at : 19 Mar 2019 9:26 AM (IST)
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रांची : वीरान जगह पर बना भवन, चहारदीवारी नहीं बनी

विभाग के अधिकारी ही उठा रहे हैं निर्माण कार्य पर सवाल बिना प्लानिंग के हुआ काम असुरक्षित होगा पूरा कार्यालय, जमीन के महत्वपूर्ण कागजात हो सकते हैं नष्ट एक करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो गये, 40 लाख की लागत में बना है कैंटीन रांची : हेहल गांव के नदी टांड़ इलाके में नव निर्मित […]

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  • विभाग के अधिकारी ही उठा रहे हैं निर्माण कार्य पर सवाल
  • बिना प्लानिंग के हुआ काम
  • असुरक्षित होगा पूरा कार्यालय, जमीन के महत्वपूर्ण कागजात हो सकते हैं नष्ट
  • एक करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो गये, 40 लाख की लागत में बना है कैंटीन
रांची : हेहल गांव के नदी टांड़ इलाके में नव निर्मित पुल के किनारे हेहल अंचल कार्यालय बनकर तैयार है. फिलहाल यह जगह वीरान है और यहां दूर-दूर तक कोई आबादी नहीं है. चिंता की बात यह है कि इस वीरान जगह पर अंचल कार्यालय बनाते समय इसकी सुरक्षा पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया गया, जिसे लेकर अब विभाग के अधिकारी ही सवाल उठने लगे हैं.
अधिकारियों की मानें, तो वीरान जगह पर अंचल कार्यालय की दो मंजिला बिल्डिंग तो खड़ी कर दी गयी, लेकिन इसकी चहारदीवारी नहीं की गयी है. निर्माण के समय ही विभाग के कुछ अफसरों ने इसकी सुरक्षा के लिए चहारदीवारी खड़ी करने की जरूरत बतायी थी, लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया गया. अब राजस्व अधिकारियों की अोर से यह सवाल खड़ा किया जा रहा है कि यह कार्यालय पूरी तरह असुरक्षित है. यहां जमीन संबंधी कागजात सुरक्षित नहीं होंगे, तो सर्ड से कार्यालय यहां कैसे शिफ्ट किया जाये?
काॅन्फ्रेंस हॉल में 10 कर्मी भी नहीं बैठक सकेंगे : इस अंचल कार्यालय के निर्माण में एक करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि खर्च हुई है.दावा किया जा रहा है कि यह कार्यालय पूरी तरह हाइटेक होगा. लेकिन, इस भवन की प्लानिंग पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. यहां काॅन्फ्रेंस हॉल एक चेंबर से भी छोटा है, जिसमें बमुश्किल 10 कर्मचारी भी ठीक से बैठकर मीटिंग नहीं पायेंगे. कुछ राजस्वकर्मियों ने इस भवन के निर्माण कार्य का एस्टिमेट भी जानना चाहा, लेकिन उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया है.
यही वजह है कि अब तक इस भवन को हैंडओवर नहीं लिया गया है. इधर, अंचल कार्यालय के ठीक सामने दो मंजिला कैंटीन भवन बनाया गया है. इस पर भी 40 लाख रुपये से ज्यादा खर्च किये गये हैं. राजस्वकर्मी इतने बड़े कैंटीन के औचित्य पर भी सवाल खड़ा कर रहे हैं.
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