रांची : कुम्हारों का दुख समझने वाले का ही देंगे साथ

Updated at : 28 Jan 2019 8:44 AM (IST)
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रांची : कुम्हारों का दुख समझने वाले का ही देंगे साथ

झारखंड कुम्हार समन्वय समिति की कुम्हार महापंचायत, अविनाश देव ने कहा झारखंड के सभी जिलों से हजारों की संख्या में आये लोगों ने इस महापंचायत में की शिरकत रांची : झारखंड कुम्हार समन्वय समिति ने रविवार को धुर्वा स्थित शहीद मैदान में कुम्हार महापंचायत का आयोजन किया. इसमें झारखंड के सभी जिलों से हजारों की […]

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झारखंड कुम्हार समन्वय समिति की कुम्हार महापंचायत, अविनाश देव ने कहा
झारखंड के सभी जिलों से हजारों की संख्या में आये लोगों ने इस महापंचायत में की शिरकत
रांची : झारखंड कुम्हार समन्वय समिति ने रविवार को धुर्वा स्थित शहीद मैदान में कुम्हार महापंचायत का आयोजन किया. इसमें झारखंड के सभी जिलों से हजारों की संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रूप में उपस्थित समिति के मुख्य संयोजक एवं माटी कला-बोर्ड के सदस्य अविनाश देव ने कहा कि झारखंड गठन के बाद लगातार झारखंड में निवास करनेवाले 35 लाख कुम्हारों की उपेक्षा होती रही है.
वर्तमान सरकार ने माटी कला बोर्ड तो दिया, लेकिन अब तक कई मांगें पूरी होनी बाकी है. इसलिए जो पार्टी कुम्हारों का दुख-दर्द को समझेगी, उसी को 2019 में समर्थन किया जायेगा. श्री देव ने कहा कि जो कुम्हार दूसरे के घरों को रोशन करते हैं, उनका खुद का घर अंधेरे में डूबा हुआ है. अब झारखंड के कुम्हार एक बैनर के तले आ चुके हैं. इसलिए इनकी उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जायेगी.
कार्यक्रम में पूज्य अतिथि सिद्धगिरी महाराज जी ने कहा कि कुम्हार ही सृष्टि के प्रथम राजा हैं. प्रजापति विश्व का सबसे बड़ा वैज्ञानिक है. जयपुर से आये अंजनी अमृत माटी के अध्यक्ष अंजनी किरोड़ीवाल ने कहा कि मिट्टी के बर्तन से ही जीवन निरोगी रह सकता है. झारखंड में अगर कुम्हारों के बर्तन की फैक्ट्री लगाने के लिए जरूरत पड़ी, तो वे सहयोग देंगे.
विश्लेषक इंद्रजीत वर्मा ने कहा कि पूरे देश में 18 करोड़ से अधिक कुम्हार निवास करते हैं, इसलिए एक-दो लोकसभा एवं विधानसभा सीट की बातें न करें. हमारी जाति का व्यक्ति देश के शीर्ष राजनीतिक पद पर बैठ सकता है. राष्ट्रीय प्रजापति महासंघ के शिवनाथ सिंह ने कहा कि वे लोग दिल्ली स्तर पर कार्य कर रहे हैं. बहुत जल्द प्रधानमंत्री से मिल कर राष्ट्रीय स्तर का मांग पत्र सौंपा जायेगा.
इन्होंने भी कार्यक्रम को किया संबोधित : सभा को मंगल सेन प्रजापति, सुरेंद्र प्रजापति, बालगोविंद प्रजापति, देवनारायण प्रजापति, डाॅ विपदा महतो, जनक महतो, नंदलाल महतो, ललिता देवी, नमिता देवी, वीणा महतो, रेखा देवी, कुंजलाल प्रजापति, कुलदीप प्रजापति, दिनेश प्रजापति, ललन प्रजापति, सीताराम प्रजापति, पितांबर महतो, मदन प्रजापति, अक्षय प्रजापति, महेंद्र प्रजापति, सुनील महतो, कृष्ण कुमार सहित कई लोगों ने अपने-अपने विचार रखे. कार्यक्रम की अध्यक्षता झारखंड कुम्हार महासभा के अध्यक्ष राजू प्रजापति ने किया.
यह है समाज की मांग
अन्य राज्यों की तरह झारखंड में कुम्हारों को अनुसूचित जाति सूची में शामिल किया जाये. ईंट उद्योग को सब्सिडी देकर कुम्हारों के लिए आरक्षित किया जाये.
कुम्हार की परंपरागत उद्योग विज्ञान के कारण छिन गये हैं. इसलिए अन्य उद्योगों (जैसे एजबेस्टेज सीट, प्लास्टिक के खिलौने, रसोई की सामग्री) में सब्सिडी देकर कुम्हारों के लिए आरक्षित किया जाये.
बरतन, कुल्हड़, मूर्ति बनाने के लिए मिट्टी कुम्हार कारीगरों के लिए बंदोबस्त किया जाये. हर जिला में कुम्हारों के कला प्रशिक्षण की व्यवस्था हो. सरकारी दफ्तरों एवं रेलवे स्टेशनों में कुल्हड़ का व्यवहार अनिवार्य किया जाये. राष्ट्रीय माटी कला बोर्ड के गठन के लिए सरकार केंद्र को अनुशंसा भेजे.
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