पूरी तरह ढह गया है मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा का पैतृक घर, आज जयंती पर टकरा में होंगे कई कार्यक्रम
Updated at : 03 Jan 2019 8:31 AM (IST)
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प्रवीण मुंडा रांची : मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा का पैतृक घर पूरी तरह ढह गया है. खूंटी के टकरा पाहन टोली स्थित खपड़ा व मिट्टी से बना घर देखरेख के अभाव में ढह गया. उसी घर में जयपाल सिंह मुंडा का जन्म हुआ था और वहीं उन्होंने अपने बचपन के कुछ साल गुजारे थे. […]
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प्रवीण मुंडा
रांची : मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा का पैतृक घर पूरी तरह ढह गया है. खूंटी के टकरा पाहन टोली स्थित खपड़ा व मिट्टी से बना घर देखरेख के अभाव में ढह गया. उसी घर में जयपाल सिंह मुंडा का जन्म हुआ था और वहीं उन्होंने अपने बचपन के कुछ साल गुजारे थे. जयपाल सिंह मुंडा जिस कद के व्यक्ति थे, वे चाहते तो अपने लिए आलीशान घर बना सकते थे, पर उन्होंने ऐसा नहीं किया. उस कच्चे घर के अलावा जयपाल सिंह का कोई और घर नहीं था.
जयपाल सिंह की कप्तानी में 1928 के ओलिंपिक में देश ने जीता था हॉकी का स्वर्ण पदक : जयपाल सिंह मुंडा का जन्म तीन जनवरी 1903 को खूंटी के टकरा पाहनटोली में हुआ था. उन्होंने एक राजनीतिज्ञ, खिलाड़ी, लेखक व संपादक के रूप में अपनी पहचान बनायी.
संत पॉल्स स्कूल रांची में पढ़ने के दौरान ही उन्हें इंग्लैंड जाने का मौका मिला. उनकी शिक्षा वहीं पर हुई. उनका चयन भारतीय सिविल सेवा (आइसीएस) में भी हुआ था, लेकिन उन्होंने इसकी जगह हॉकी को तरजीह दी. वे उस समय ऑक्सफोर्ड ब्लू का खिताब पाने वाले एकमात्र भारतीय थे. 1928 में उनकी कप्तानी में भारत ने एम्सटर्डम हॉकी में स्वर्ण पदक जीता. उन्होंने आजादी से पूर्व ही अलग झारखंड राज्य के आंदोलन की अगुवाई की. आजादी के बाद संविधान सभा में उन्होंने देश भर के आदिवासियों के अधिकार व पहचान पर मजबूती से अपनी बातें रखीं.
जयपाल सिंह के नाम पर चल रहा है स्कूल
जयपाल सिंह मुंडा मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा पिछले एक साल से टकरा में स्कूल का संचालन किया जा रहा है. इसमें गांव के लगभग 70 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं.
बच्चों को यहां अंग्रेजी भी सिखायी जा रही है. जयपाल सिंह मुंडा की परिजन सलोमी पाहन यहां कक्षाएं लेती हैं. इसके अलावा डॉ आशीष लकड़ा, सामाजिक कार्यकर्ता वासवी व पत्रकार संतोष किड़ो भी यहां कक्षाएं लेते हैं. खास बात यह है कि नेशनल स्कूल ऑफ डिजाइन अहमदाबाद के दो स्टूडेंट वर्षा अौर विपुल भी इन बच्चों को पढ़ा रहे हैं. पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों के लिए खेल और व्यक्तित्व विकास से संबंधित गतिविधियों का भी आयोजन होता है.
विश्वविद्यालय बनाने की है योजना
जयपाल सिंह मुंडा के परिजन, ग्रामीण और ट्रस्ट उनके नाम से टकरा में ही विश्वविद्यालय बनाना चाहते हैं. इसके लिए जमीन भी देख ली गयी है. विश्वविद्यालय के लिए फंड जुगाड़ करने और सरकार का सहयोग लेने पर बात चल रही है.
आज जयंती पर टकरा में होंगे कई कार्यक्रम
तीन जनवरी को जयपाल सिंह मुंडा की जयंती है. इस मौके पर उनके पैतृक गांव टकरा पाहनटोली (खूंटी) में कई कार्यक्रम होंगे. कार्यक्रम जयपाल सिंह मुंडा मेमोरियल ट्रस्ट अौर ग्रामीणों के सहयोग से होगा. इसमें जयपाल सिंह मुंडा के पुत्र जयंत जयपाल सिंह व सामाजिक कार्यकर्ता वासवी सहित अन्य लोग शामिल होंगे. इन कार्यक्रमों के तहत जयपाल सिंह मुंडा की कब्र पर पूजा कर उन्हें श्रद्धांजलि दी जायेगी. इसके अलावा खेल प्रतियोगिताएं भी होंगी.पिछले कई सालों से ग्रामीण जयपाल सिंह मुंडा की स्मृति में कार्यक्रम करते आ रहे हैं. पिछले साल हॉकी प्रतियोगिता हुई थी.
बड़ौदा में छह को व्याख्यान
गुजरात के बड़ौदा स्थित एमएस यूनिवर्सिटी में छह जनवरी को जयपाल सिंह मुंडा स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया है. वहीं तीन जनवरी को उन्हें श्रद्धांजलि दी जायेगी. छह जनवरी को होनेवाले कार्यक्रम में जयपाल सिंह मुंडा के पुत्र जयंत जयपाल सिंह शामिल होंगे.
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