रांची : बिना डीपीआर व इस्टीमेट के ही बनाया जू में एक्वेरियम

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 03 Dec 2018 6:54 AM

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मनोज सिंह सेंट्रल जू अथॉरिटी से नहीं ली गयी थी अनुमति, लोकायुक्त से की गयी है कार्रवाई नहीं करने की शिकायत रांची : ओरमांझी स्थित चिड़ियाघर में बिना सेंट्रल जू अथॉरिटी की अनुमति के ही एक्वेरियम का निर्माण कर दिया गया है. इस पर सेंट्रल जू अथॉरिटी ने आपत्ति भी जतायी है. द रिकोगनेशन ऑफ […]

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मनोज सिंह
सेंट्रल जू अथॉरिटी से नहीं ली गयी थी अनुमति, लोकायुक्त से की गयी है कार्रवाई नहीं करने की शिकायत
रांची : ओरमांझी स्थित चिड़ियाघर में बिना सेंट्रल जू अथॉरिटी की अनुमति के ही एक्वेरियम का निर्माण कर दिया गया है. इस पर सेंट्रल जू अथॉरिटी ने आपत्ति भी जतायी है. द रिकोगनेशन ऑफ जू रूल्स-2009 में मछली घर के निर्माण के लिए भी सीजेडए की अनुमति की जरूरत है.
10 मई 2018 को पत्र लिखकर सीजेडए ने अनुमति नहीं लिये जाने का जिक्र किया है. यहां मछली घर के निर्माण के लिए कोई डीपीआर भी नहीं बनाये जाने और बिना किसी विस्तृत इस्टीमेट के काम कराये जाने की शिकायत लोकायुक्त से की गयी है. लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रदेश सचिव अशोक वर्मा ने यह शिकायत की है.
संबंधित आरोपों के दस्तावेज के साथ की गयी शिकायत में कहा गया है कि 2016-17 में जू में एक्वेरियम स्थापित करने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट निकाला गया था. इसमें डीपीआर और स्पेशिफिकेशन इस्टीमेट का जिक्र नहीं किया गया था. इस टेंडर में दो कंपनियों ने बोली लगायी.
मुंबई की कंपनी उतेकर फिशरिज ने तीन करोड़ चार लाख और बेंगलुरु की स्टिल वाटर एक्टेवटिक्स ने तीन करोड़ 87 लाख रुपये की बोली लगायी. शिकायत में कहा गया है कि बोली लगाने वाली केवल दो ही एजेंसी थी. एेसे में अधिक से अधिक एजेंसियों की हिस्सेदारी के लिए एक और बोली लगायी जानी चाहिए थी. इसके बावजूद एल-1 आने वाली कंपनी को काम दे दिया गया.
एक्जीक्यूटिव कमेटी ने जतायी थी आपत्ति
टेंडर कमेटी की अनुशंसा झारखंड जू अथॉरिटी की एक्जीक्यूटिव कमेटी के पास एक सितंबर 2016 की बैठक में रखी गयी. इसमें कमेटी ने टेंडर कमेटी की अनुशंसा को पारित नहीं किया. इसके बावजूद विभाग से अनुमोदन ले लिया गया. 14 नवंबर 2016 को जू अथॉरिटी की गवर्निंग बॉडी की बैठक में टेंडर के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी गयी.
केवल बताया गया कि एक्वेरियम का निर्माण करीब 3.65 करोड़ रुपये में होगा. इसके वार्षिक मेंटेनेंस पर 39 लाख रुपये खर्च होंगे. इसमें काम करने की प्रशासनिक अनुमति दी गयी. शर्त रखा गया कि पैसा का आवंटन तभी होगा, जब वित्तीय नियम और कानून का पालन करा लिया जायेगा.
इन शर्तों को पूरा किये बिना ही तत्कालीन निदेशक ने एल-1 कंपनी को इसके निर्माण की स्वीकृति दे दी. शिकायत में कहा गया है कि इस निर्माण के लिए कोई इस्टीमेट भी तैयार नहीं हुआ. इसके लिए सक्षम कमेटी से तकनीकी स्वीकृति भी नहीं ली गयी. जू के एक रेंजर की रिपोर्ट के बाद क्रमबद्ध तरीके से एजेंसी को पैसे का भुगतान भी कर दिया गया.
पीसीसीएफ और विभागीय सचिव से की गयी थी डायरेक्टर की शिकायत
जू के तत्कालीन निदेशक अशोक कुमार के खिलाफ 16 अगस्त 2017 को तत्कालीन पीसीसीएफ (वाइल्ड लाइफ) ने पीसीसीएफ और विभाग के अपर मुख्य सचिव से शिकायत की थी. निदेशक पर वित्तीय नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया था. इस शिकायत के बाद श्री कुमार को जू से हटा तो दिया गया, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं किये जाने की शिकायत लोकायुक्त से की गयी है.
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