एग्रो-फूड समिट : गांव का विकास नहीं होगा, तो देश भी खुशहाल नहीं होगा : राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 01 Dec 2018 5:18 AM

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खेलगांव में आयोजित दो दिवसीय एग्रीकल्चर एंड फूड समिट 2018 का समापन रांची : एग्रो-फूड समिट के समापन समारोह में राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि देश की 70 फीसदी आबादी गांव में रहती है़ हमारी अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है़ गांवों का विकास नहीं होगा, तो देश भी खुशहाल नहीं होगा़ गांवों को सदृढ़ करना […]

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खेलगांव में आयोजित दो दिवसीय एग्रीकल्चर एंड फूड समिट 2018 का समापन
रांची : एग्रो-फूड समिट के समापन समारोह में राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि देश की 70 फीसदी आबादी गांव में रहती है़ हमारी अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है़ गांवों का विकास नहीं होगा, तो देश भी खुशहाल नहीं होगा़ गांवों को सदृढ़ करना जरूरी है़ उन्होंने कहा कि झारखंड में कृषि के विकास की असीम संभावनाएं है़ं कृषि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था वर्षा पर निर्भर है़ झारखंड में पानी के अभाव में एक फसल होती है़ वर्षा पर आधारित कृषि होने के कारण हम केवल एक फसल धान उपजाते है़ं
इसको बहुफसली करने की जरूरत है़ राज्यपाल ने कहा कि इसके लिए जल संचयन को आगे बढ़ाना होगा़ बारिश के पानी का संचय करना होगा़ उन्होंने कहा कि झारखंड के किसान मेहनती और प्रगतिशील है़ं उन्होंने लक्ष्य हासिल कर दिखाया है़ राज्य को कृषि क्षेत्र मेें आगे बढ़ाने के लिए किसानों को, अधिकारियों को दिन-रात प्रयास करना होगा़ राज्य में सिंगल विंडो सिस्टम शुरू किया गया है़ यह बेहतर प्रयास है़
कृषि मंत्री रणधीर सिंह ने कहा कि सरकार किसानों की आय दोगुनी नहीं, चौगुनी करने के लिए काम कर रही है. कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में हो रहे कार्यों की वजह से किसानों के जीवन में परिवर्तन आया है. जल्द ही झारखंड की पहचान इसके खनिज से नहीं, बल्कि जैविक कृषि कार्यों से होगी. कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विभिन्न सामाजिक और गैर सरकारी संगठनों के सहयोग से राज्य में जैविक खेती को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है. जल्द ही राज्य से सब्जी, फल, अनाज समेत सभी कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग कर देशों में ही नहीं, विदेशों में भी भेजेंगे. इसके लिए राज्य में सैकड़ों फूड प्रोसेसिंग प्लांट लगाये जायेंगे.
मंगोलिया का रिसोर्स और झारखंड की मेहनत मिल कर करेगी कमाल
मंगोलिया के प्रतिनिधि गोन्चिंग गैनबोल्ड ने आयोजन के लिए सरकार को धन्यवाद दिया. कहा कि झारखंड में संभावनाएं हैं. कृषि में, विशेष रूप से फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में अभी काफी कुछ किया जा सकता है.
कृषि के क्षेत्र में मंगोलिया के रिसोर्स और झारखंड की मेहनत को मिला कर बहुत बेहतर कार्य किया जा सकता है. इन दोनों के मिलन से कृषि के क्षेत्र में कमाल किया जा सकता है.
कृषि सचिव ने पेश की आयोजन की रिपोर्ट
उद्योग सचिव के रविकुमार ने अतिथियों का स्वागत किया. कृषि सचिव पूजा सिंघल ने आयोजन की रिपोर्ट पेश की. मौके पर स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी, कल्याण मंत्री लुइस मरांडी, मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सुनील वर्णवाल, राज्यपाल के प्रधान सचिव सत्येंद्र सिंह समेत सरकार के कई अधिकारी व अतिथि व किसान उपस्थित थे.
कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में मॉडल राज्य बनेगा झारखंड
श्री सिंह ने कहा कि झारखंड कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में मॉडल राज्य बनने की ओर अग्रसर है. किसानों को निश्चित रूप दूध उत्पादन के क्षेत्र में राष्ट्रीय मानक पर लाने का काम चल रहा है. किसानों के द्वारा उत्पादित दूध को बाजार देने के लिए मिल्क फेडरेशन गठित किया गया है.
गांवों में बल्क मिल्क कूलर लगाये जा रहे हैं. देसी नस्ल की गायों में सुधार करते हुए दूध उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है. उद्यान्न के क्षेत्र में फूल, सोयाबीन की खेती के साथ मधुमक्खी पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है. ड्रिप एरिगेशन की सुविधा देकर कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी किसानों को उन्नत खेती के लिए तैयार किया जा रहा है. श्री सिंह ने कहा कि सरकार झारखंड के किसानों को अपने पैरों पर खड़ा करना चाहती है. इसके लिए कृषि बजट दोगुना किया गया है.
सरकारी योजनाओं का बेहतरीन क्रियान्वयन : विकास आयुक्त
राज्य के विकास आयुक्त डीके तिवारी ने कहा कि देश दुनिया के लोग एग्रीकल्चर समिट में प्रधानमंत्री के सपने को साकार करने के लिए किये जा रहे प्रयासों को देखने झारखंड आये हैं. इसके लिए राज्य के किसान, विशेष से सब्जी का उत्पादन करनेवाले किसान बधाई के पात्र हैं.
पिछले चार सालों में झारखंड फल और सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में देश भर में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है. टमाटर का उत्पादन करने में हर पांचवें स्थान पर हैं. मटर, बीन, गोभी और भिंडी पैदा करने में भी हम दूसरे राज्यों से बहुत आगे हैं. कम कीटनाशक और खाद के उपयोग से राज्य के किसान उत्पादन कर जैविक खेती कर रहे हैं. श्री तिवारी ने कहा कि कृषि को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार काफी कार्य कर रही है. हमारी फूड पॉलिसी देश में सबसे अच्छी है.
पूर्वोत्तर भारत का सबसे बड़ा प्लांट हमारे यहां है. सफल द्वारा झारखंड का मटर और मकई दिल्ली के लोग खा रहे हैं. सिंगापुर जैसे देशों से झारखंड को ऑर्डर मिल रहा है. राज्य से कटहल विदेश भेजे जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि राज्य ने कृषि क्षेत्र की विकास दर में 18 से 19 प्रतिशत की वृद्धि की है. सरकार की योजनाओं को राज्य में बेहतरीन तरीके से क्रियान्वित की जा रही हैं. कृषि यंत्रों और स्वायल हेल्थ कार्ड का वितरण कर केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को मूर्तरूप दिया जा रहा है.
विकास आयुक्त ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में झारखंड का नाम पूरे देश में लिया जा रहा है. प्रधानमंत्री भी कहते हैं कि पूरे देश में झारखंड इकलौता राज्य है, जहां किसानों को प्रीमियम की राशि नहीं देनी पड़ती है.
किसानों की बीमा का पूरा प्रीमियम सरकार वहन करती है. समारोह में उपस्थित किसानों को संबोधित करते हुए श्री तिवारी ने कहा कि हमारे सामने चुनौतियां भी हैं. स्वायल हेल्थ कार्ड बने हैं, लेकिन उसका उपयोग भी करें. आम, लीची, काजू का उत्पादन आगे बढ़ाना है. नये उन्नत कृषि औजारों का उपयोग करना है.
मछली पालन और गो पालन में नई तकनीक अपनानी है. जल संचयन करके तीन फसलें एक वर्ष में लेनी है. सुखाड़ का सामना करने के लिए जलवायु प्रतिरोधी अन्य फसलों को भी अपनाना है.
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