रांची : मास्टर क्लास में रिम्स के डॉक्टरों ने सीखी स्कलबेस सर्जरी की तकनीक

Updated at : 29 Oct 2018 8:53 AM (IST)
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रांची : मास्टर क्लास में रिम्स के डॉक्टरों ने सीखी स्कलबेस सर्जरी की तकनीक

रिम्स में आयोजित किया गया वर्कशाॅप, देश-दुनिया के डॉक्टरों ने देखा बिना चीरा लगाये इंडोस्कोपी विधि से हुई मस्तिष्क, नाक, कान और गले की सर्जरी प्रसिद्ध इएनटी और स्कलबेस सर्जन डॉ टीएन जानकीराम ने सिखायी तकनीक रांची : राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स के इएनटी विभाग के माॅड्यूलर ओटी में रविवार को इंडोस्कोपी विधि […]

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रिम्स में आयोजित किया गया वर्कशाॅप, देश-दुनिया के डॉक्टरों ने देखा
बिना चीरा लगाये इंडोस्कोपी विधि से हुई मस्तिष्क, नाक, कान और गले की सर्जरी
प्रसिद्ध इएनटी और स्कलबेस सर्जन डॉ टीएन जानकीराम ने सिखायी तकनीक
रांची : राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स के इएनटी विभाग के माॅड्यूलर ओटी में रविवार को इंडोस्कोपी विधि से मस्तिष्क, नाक, कान एवं गले के ट्यूमर की जटिल सर्जरी की गयी. सर्जरी चेन्नई स्थित रॉयल पर्ल हॉस्पिटल के इएनटी रोग विशेषज्ञ और स्कलबेस सर्जन डॉ टीएन जानकीराम की देखरेख में हुई. इसमें रिम्स के इएनटी विभाग के डॉक्टरों ने सहयोग किया. साथ ही इसका प्रशिक्षण भी लिया. खास बात यह रही कि सर्जरी की पूरी प्रक्रिया का सीधा प्रसारण वेब टेक्नोलॉजी के माध्यम से किया गया, जिसे देश-दुनिया के डॉक्टरों ने देखा.
मास्टर क्लास के नाम से आयोजित इस सर्जरी वर्कशाॅप में सबसे जटिल सर्जरी मुजफ्फरपुर निवासी 55 वर्षीय उर्मिला देवी की थी. उन्हें पीट्यूटरी एडिनोमा (ब्रेन में स्थित पीयूष ग्रंथी के ट्यूमर) है. चूंकि, शाम पांच बजे तक उनका ब्लड प्रेशर सामान्य नहीं हो पाया था, इसलिए डॉक्टरों ने तय किया कि जब ब्लड प्रेशर नॉर्मल होगा, तो सोमवार को उनकी सर्जरी की जायेगी. इसके अलावा लोहरदगा निवासी 14 साल की सबना, रांची निवासी 28 साल की सोनी कुमारी, गुमला निवासी 60 साल की रोपनी देवी का ऑपरेशन भी किया गया.
मास्टर क्लास का विधिवत उदघाटन रिम्स के निदेशक डॉ आरके श्रीवास्तव ने किया. उन्होंने कहा कि रिम्स के लिए यह गौरव का क्षण है. यहां पहली बार स्कलबेस सर्जरी की जा रही है, जिसे देश-दुनिया के डाॅक्टर देख रहे हैं. ऐसे आयोजन हमेशा होना चाहिए, ताकि डॉक्टरों को नयी-नयी जानकारी मिले. कार्यक्रम में वरिष्ठ इएनटी रोग विशेषज्ञ डॉ राघव शरण और जमशेदपुर के डॉ गौतमदास गुप्ता को सम्मानित किया गया. विभागाध्यक्ष डॉ पीके सिंह ने कहा कि स्कलबेस तकनीक नयी है, जिसका उपयोग हो रहा है.
डॉ जानकीराम द्वारा दी गयी जानकारी से राज्य के इएनटी विशेषज्ञों को लाभ मिलेगा. मौके पर डॉ बीके सिंह, डॉ संजीव कुमार, डॉ आरके झा, डॉ एके ठाकुर, डॉ एके झा, न्यूरो सर्जरी के विभागाध्यक्ष डॉ अनिल कुमार, डॉ उषा, डॉ वीवी सिन्हा, डॉ अश्वनी कुमार, डॉ सत्येंद्र शर्मा, डॉ चंद्रकांती बिरुआ, डॉ संदीप कुमार, डॉ जाहिद, डॉ आरके चौधरी, डॉ इजाजलूक हक, डॉ समित लाल, डाॅ हर्ष कुमार सहित कई डॉक्टर माैजूद थे.
स्कलबेस सर्जरी की डिमांड बढ़ी : डाॅ जानकीराम
रॉयल पर्ल हॉस्पिटल, चेन्नई के इएनटी रोग विशेषज्ञ व स्कलबेस सर्जन डॉ टीएन जानकीराम ने कहा कि स्कलबेस सर्जरी की डिमांड बढ़ गयी है.
इसके माध्यम से ब्रेन के किसी भी भाग में स्थित ट्यूमर को इंडोस्कोपी द्वारा हटाया जा सकता है. इससे मरीज को तीन से पांच दिन में अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है. हम रोबोटिक सर्जरी भी कर रहे हैं. देश के विभिन्न शहराें में जाकर हम मास्टर क्लास के माध्यम से स्कलबेस सर्जरी का प्रशिक्षण दे रहे हैं. मेरी तीन इंटरनेशनल किताबों को दुनिया के मेडिकल कॉलेज में पढ़ायी जा रही हैं.
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