रांची : रिनपास में एक सप्ताह में दूर की जायेगी चिकित्सकों की कमी : मंत्री

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 05 Sep 2018 9:29 AM

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रांची : स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी ने कहा है कि रिनपास का इतिहास गौरवशाली रहा है. रांची का नाम इस संस्थान से जोड़ा जाता रहा है. यहां मनोरोगियों के इलाज के साथ-साथ नशा मुक्ति व मिर्गी जैसी बीमारी का इलाज भी किया जाता है. यहां चिकित्सकों की कमी है. इसे एक सप्ताह में दूर कर […]

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रांची : स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी ने कहा है कि रिनपास का इतिहास गौरवशाली रहा है. रांची का नाम इस संस्थान से जोड़ा जाता रहा है. यहां मनोरोगियों के इलाज के साथ-साथ नशा मुक्ति व मिर्गी जैसी बीमारी का इलाज भी किया जाता है.
यहां चिकित्सकों की कमी है. इसे एक सप्ताह में दूर कर लिया जायेगा. यहां के मरीजों को उपचार के साथ-साथ दवा नि:शुल्क उपलब्ध करायी जा रही है. राज्य गठन के समय 16 हजार मनोरोगी इलाज के लिए आ रहे थे, आज एक लाख से अधिक मरीज आ रहे हैं. यहां दूसरे राज्य के भी रोगी आते हैं. संस्थान का बिहार पर 70 करोड़ रुपये बकाया है. इस मामले में बिहार के मंत्री और केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से भी बात हुई है.
इसके मिलने की उम्मीद है. यहां ठीक होने वाले मरीजों को हाफ वे होम की सुविधा दी जायेगी. मनोरोग को लेकर लोगों में अच्छी धारणा नहीं है. जागरूकता लाकर दूर किया जायेगा. हेल्थ व वेलनेस सेंटर में इलाज के साथ-साथ जागरूकता, योग की जानकारी दी जायेगी. आयुष्मान भारत कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य बीमा दो से बढ़ा कर पांच लाख रुपये किया जायेगा.
वार्ड सात व तीन को अवार्ड : इस मौके पर अच्छे रखरखाव के लिए मेल वार्ड सात और फीमेल वार्ड तीन को अवार्ड दिया गया. ओटी सेक्शन में अच्छा काम करने के लिए मंजू व आलमगीर को सम्मानित किया गया. इस मौके पर संस्थान की स्मारिका का विमोचन भी किया गया.
हर जिले में मेंटल हेल्थ सेंटर की जरूरत
स्वास्थ्य विभाग की प्रधान सचिव निधि खरे ने कहा कि मानसिक रोग बड़ी समस्या है. इसके इलाज करनेवालों की कमी है. इसके लिए सीअाइपी के डिजिटल अकादमी कार्यक्रम के साथ मिल कर अधिक से अधिक सामान्य चिकित्सकों को मनोरोगियों के इलाज की डिग्री दिलायी जायेगी. इससे इस बीमारी का प्राथमिक इलाज हो सकेगा. जिस तेजी से मनोरोगी बढ़ रहे हैं, ऐसे में हर जिले में एक-एक मेंटल हेल्थ सेंटर खोलने की जरूरत है. विभाग के अपर सचिव बीरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि इस बीमारी को लेकर जागरूकता कार्यक्रम चलाने की जरूरत है.
लोगों को यह बताने की जरूरत है कि यह भी एक सामान्य बीमारी है, इसे दवा से ठीक किया जा सकता है. इस मौके पर सीअाइपी के निदेशक डॉ डी राम ने भी विचार रखे. संस्थान के निदेशक डॉ सुभाष सोरेन ने मनरोग के पहलू और केंद्र और राज्य सरकार की भूमिका पर विचार रखा. धन्यवाद ज्ञापन डॉ अमित कुमार शर्मा ने किया.
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