रांची : विवि के दीक्षांत समारोह में अब भारतीय परिधान पहना जाये
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 28 Aug 2018 12:31 AM
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राज्यपाल के कहने के बाद प्रधान सचिव ने जारी किया आदेश विद्यार्थियों व अतिथियों को ब्रिटिशकालीन गाउन पहनने का मौका नहीं मिल सकेगा भारतीय संस्कृति एवं परंपरा को दर्शाने वाली साज-सज्जायुक्त पोशाक पहनने का निर्देश रांची : राज्यपाल सह कुलाधिपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्य के सभी विवि में आयोजित होनेवाले दीक्षांत समारोह में केवल पारंपरिक […]
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राज्यपाल के कहने के बाद प्रधान सचिव ने जारी किया आदेश
विद्यार्थियों व अतिथियों को ब्रिटिशकालीन गाउन पहनने का मौका नहीं मिल सकेगा
भारतीय संस्कृति एवं परंपरा को दर्शाने वाली साज-सज्जायुक्त पोशाक पहनने का निर्देश
रांची : राज्यपाल सह कुलाधिपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्य के सभी विवि में आयोजित होनेवाले दीक्षांत समारोह में केवल पारंपरिक भारतीय परिधान का ही इस्तेमाल करने का निर्देश दिया है. राज्यपाल के आदेश पर उनके प्रधान सचिव डॉ नितिन कुलकर्णी ने आदेश जारी कर दिया है.
इसमें कहा गया है कि अब जो भी दीक्षांत समारोह होंगे, वहां पूर्व से प्रचलित परिधान के स्थान पर पारंपरिक भारतीय परिधान का इस्तेमाल करें. राज्यपाल के आदेश के बाद से राज्य के विश्वविद्यालयों में अब दीक्षांत समारोह के दौरान विद्यार्थियों व अतिथियों को ब्रिटिश कालीन गाउन पहनने का मौका नहीं मिलेगा.
मालूम हो कि केंद्र के निर्देश के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने विवि के दीक्षांत समारोह के दौरान विद्यार्थियों व अतिथियों को भारतीय संस्कृति एवं परंपरा को दर्शाने वाली, साज-सज्जायुक्त पोशाक पहनने का निर्देश दिया था. यूजीसी ने भारतीय संस्कृति व परंपरायुक्त पोशाक के निर्माण व डिजाइन तय करने के लिए देश भर के डिजाइनरों से 10 अगस्त 2018 तक डिजाइन मांगा था.
देश के कई विवि में लागू हैं पारंपरिक पोशाक
देश के कई राज्यों में विवि में दीक्षांत समारोह के दौरान पारंपरिक परिधान पहनने की शुरुआत हो चुकी है.झारखंड में कोल्हान विवि में नवंबर 2017 में आयोजित दीक्षांत समारोह में पारंपरिक परिधान पहने गये थे. अब तक जिन विवि में पारंपरिक परिधान पहने जा रहे हैं, उनमें छात्रों के लिए कुर्ता-पाजामा और छात्राअों के लिए लाल पाड़ वाली सफेद साड़ी या सफेद सलवार सूट का चलन है.
अब तक दीक्षांत समारोह में काला, लाल व बैगनी गाउन पहने जा रहे हैं, साथ ही इसके लिए गाउन भाड़े पर मंगाये जाते हैं. विद्यार्थियों से निर्धारित शुल्क लिये जाते हैं. हालांकि समारोह की समाप्ति के बाद गाउन वापस करने पर शुल्क भी वापस कर दिया जाता है.
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