स्कूलों के विलय पर झारखंड के 12 सांसदों को एतराज, सीएम को लिखा पत्र, कहा, दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय है स्कूल बंद करना

Published at :10 Aug 2018 8:06 AM (IST)
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स्कूलों के विलय पर झारखंड के 12 सांसदों को एतराज, सीएम को लिखा पत्र, कहा, दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय है स्कूल बंद करना

रांची : भाजपा के सभी 12 सांसदों ने राज्य में प्राथमिक और मध्य विद्यालयों के विलय प्रक्रिया पर एतराज जताया है़ केंद्रीय मंत्री सुदर्शन भगत और जयंत सिन्हा सहित सभी सांसदों ने मुख्यमंत्री रघुवर दास को पत्र लिख कर विलय प्रक्रिया पर रोक लगाने का आग्रह किया है़ सीएम को लिखे संयुक्त पत्र में सांसदों […]

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रांची : भाजपा के सभी 12 सांसदों ने राज्य में प्राथमिक और मध्य विद्यालयों के विलय प्रक्रिया पर एतराज जताया है़ केंद्रीय मंत्री सुदर्शन भगत और जयंत सिन्हा सहित सभी सांसदों ने मुख्यमंत्री रघुवर दास को पत्र लिख कर विलय प्रक्रिया पर रोक लगाने का आग्रह किया है़ सीएम को लिखे संयुक्त पत्र में सांसदों ने कहा है कि छात्र संख्या के आधार पर प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों को निकटतम स्कूल में विलय कर विद्यालयों की संख्या कम करने की प्रक्रिया चल रही है़ सभी जिलों में यह प्रक्रिया प्रारंभ है. इससे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों में असंतोष है़
सांसदों ने कहा है कि निरक्षरता का कलंक समाप्त करने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल में सर्व शिक्षा अभियान के तहत गांवों में प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय खोले गये. बच्चों को साक्षर बनाने का अभियान चलाया गया था़ दुर्भाग्यवश ऐसे विद्यालय को बंद किया जा रहा है़
सांसदाें ने लिखा, सरकार के इस निर्णय से जनता में रोष है़ ऐसे विद्यालयों के लिए अच्छे भवन बने हुए हैं. बंद होने से खंडहर हो जायेगा या अनैतिक गतिविधियों का केंद्र हो जायेगा.
सांसदों ने पत्र में लिखा है कि गांव में जनसंख्या बढ़ी है, लेकिन शिक्षकों के कमी और अव्यवस्था के कारण निजी स्कूलों की ओर लोग भाग रहे हैं. सरकारी विद्यालयों को ठीक करना आवश्यक है. इस फैसले से छोटे गांव में अशिक्षा बढ़ेगी. इस परिस्थिति में सर्वशिक्षा अभियान के तहत खुले विद्यालयों को बंद करने का निर्णय अलोकप्रिय होगा. गांव और कस्बे विद्यालय विहीन हो जायेंगे और बच्चे शिक्षा से वंचित होंगे. यह स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण होगी. इससे उत्पन्न जन रोष का खमियाजा जन प्रतिनिधियों को भुगतना पड़ सकता है.
सांसदों ने मुख्यमंत्री को सुझाव दिया है कि शिक्षकों की संख्या बढ़ाते हुए प्रक्रिया को एक वर्ष के लिए कम से कम रोक कर विद्यालयों की स्थिति सुधारने का अवसर दिया जाये. विद्यालयों की स्थिति सुधारने का निर्देश अधिकारियों को दिया जाये. सांसदों ने कहा है कि सभी की भावना को देखते हुए प्रक्रिया पर रोक लगायी जाये.
सीएम को भेजे पत्र में जिन सांसदों के हस्ताक्षर हैं : जयंत सिन्हा, सुदर्शन भगत, लक्ष्मण गिलुवा, डॉ रवींद्र राय, वीडी राम, कड़िया मुंडा, पशुपतिनाथ सिंह, सुनील कुमार सिंह, विद्युतवरण महतो, निशिकांत दुबे, रवींद्र पांडेय, रामटहल चौधरी
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