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बिहार व झारखंड समेत देश के 10 राज्यों में कैश की किल्लत, एटीएम में नकदी नहीं

Updated at : 18 Apr 2018 7:01 AM (IST)
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बिहार व झारखंड समेत देश के 10 राज्यों में कैश की किल्लत, एटीएम में नकदी नहीं

नयी दिल्ली : बिहार व झारखंड समेत देश के 10 राज्यों में कैश की किल्लत से मंगलवार को आम लोग काफी परेशान रहे. माना जा रहा है कि कैश की मांग में अचानक आयी तेजी के कारण एटीएम खाली हो गये. उत्तर प्रदेश , राजस्थान, महाराष्ट्र , गुजरात , मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र […]

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नयी दिल्ली : बिहार व झारखंड समेत देश के 10 राज्यों में कैश की किल्लत से मंगलवार को आम लोग काफी परेशान रहे. माना जा रहा है कि कैश की मांग में अचानक आयी तेजी के कारण एटीएम खाली हो गये. उत्तर प्रदेश , राजस्थान, महाराष्ट्र , गुजरात , मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भी कैश की तंगी का व्यापक असर रहा. अधिकांश एटीएम में कैश नहीं होने की शिकायतें मिलीं, तो कुछ जगहों पर 2000 के नोटों और बैंक चेस्ट में करंसी की कमी की बात भी सामने आयी.
ऐसे में शादी व त्योहारी सीजन में लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. समस्या से निबटने के लिए सरकार तुरंत हरकत में आयी और उसने नकदी उपलब्ध कराने की योजना पर काम शुरू कर दिया. सरकार को संदेह है कि 2,000 रुपये के नोटों की जमाखोरी की जा रही है. इसे देखते हुए उसने 500 रुपये के नोटों की छपाई पांच गुना बढ़ाने की योजना बनायी है. वहीं विपक्षी दलों ने इसे नोटबंदी पार्ट-2 कहते हुए सरकार पर निशाना साधा.
रिजर्व बैंक ने नोटों की छपाई बढ़ायी : इस बीच रिजर्व बैंक ने कहा है कि कुछ स्थानों पर नकदी की कमी मुद्रा पहुंचाने की सुविधाओं से जुड़े मुद्दों की वजह से हो सकती है. सभी चार नोट मुद्रण कारखानों में काम तेज कर दियागया है. आरबीआइ के वॉलेट और करंसी चेस्ट में पर्याप्त नकदी है. सभी पहलुओं पर करीबी निगाह है.
एहतियातन उन इलाकों में अधिक नकदी भेजने का बंदोबस्त कर रहा है, जहां ज्यादा निकासी देखने को मिली है. वित्त राज्यमंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने कहा कि कुछ राज्यों में मुद्रा की कमी से निपटने के लिए सरकार ने एक समिति बनायी है. इसको अगले दो – तीन दिन में सुलझा लिया जायेगा. सरकार ने राज्यवार समिति बनायी है.
सरकार ने किया सतर्क, अफवाहों से रहें दूर
पर्याप्त से ज्यादा मुद्रा चलन में : जेटली
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि पर्याप्त से ज्यादा मुद्रा चलन में है. कुछ राज्यों में अस्थायी कमी की समस्या से जल्द निबट लिया जायेगा. कुछ राज्यों में मुद्रा की कमी है. देश में मुद्रा की स्थिति का आकलन किया है. असाधारण तरीके से अचानक बढ़ी मांग से मुद्रा की अस्थायी तौर पर कमी हुई है.
स्टाॅक में दो लाख करोड़ की मुद्रा : सचिव
आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष गर्ग ने कहा है कि रिजर्व बैंक नकदी की तंगी से निबटने के लिए 500 रुपये के नोट की छपाई को पांच गुना बढ़ाकर 2,500 करोड़ रुपये प्रतिदिन करेगा. वर्तमान में स्टाॅक में करीब दो लाख करोड़ रुपये की मुद्रा है और यह जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी है.
इधर, राहुल का आरोप : बैंकिंग प्रणाली बर्बाद
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि कई राज्यों में नकदी की कमी से देश फिर से ‘नोटबंदी के आतंक ‘ की गिरफ्त में है. पीएम मोदी पर नोटबंदी के अपने फैसले के साथ देश की बैंकिंग प्रणाली को तहस-नहस करने का आरोप लगाया.
परेशानी की वजहें
20 हजार करोड़ करेंसी की खपत अमूमन एक महीने में होती है. वहीं, अप्रैल के पहले 12-13 दिनों के दौरान लगभग 45 हजार करोड़ रुपये की निकासी अलग-अलग तरीकों से की जा चुकी है.
अप्रैल के पहले दो हफ्तों के दौरान अप्रत्याशित कैश निकासी आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, मध्यप्रदेश और बिहार में हुई. इन्हीं राज्यों में कैश संकट सबसे ज्यादा.
सरकारी खरीद का सीजन शुरू हो गया है और किसानों को दिया जाने वाला पेमेंट भी बढ़ा है .
सरकार के उपाय
500 के नोटों की छपाई पांच गुना करने की तैयारी. इस तरह से 70,000 से 75,000 करोड़ रुपये मूल्य के 500 के नोटों की आपूर्ति होगी.
मांग के मुताबिक कैश की आपूर्ति करेगा आरबीआइ. नोटों की ढुलाई संबंधी कारणों को दूर करेगा.
कर्नाटक, मध्यप्रदेश समेत अन्य चुनावी राज्यों में बड़े नोटों के जमाखोरी पर नकेल कसा जायेगा.
तीन तरह की समस्याएं एटीएम में कैश नहीं
बिहार, झारखंड, दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, पूर्वी महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र और तेलंगाना में पिछले हफ्ते से ही एटीएम में कैश की समस्या.
2000 के नोट नहीं
मध्य प्रदेश, गुजरात, झारखंड और बिहार के कुछ हिस्सों में 2000 और 500 रुपये के नोटों की किल्लत.
नकदी की कमी
कुछ राज्यों में स्टेट बैंक के करेंसी चेस्ट में क्षमता से कम नकदी की उपलब्धता. हालांकि, केंद्रीय बैंक ने इसे अस्वीकार किया है.
जनता के लिए राहत : यह नोटबंदी पार्ट -2 नहीं, दो दिन में दूर होगी समस्या
यह अस्थायी समस्या
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का मानना है कि फिलहाल नोटबंदी जैसे हालात नहीं हैं. नोटबंदी के वक्त पैसा सिस्टम से निकाला गया था, इसलिए दिक्कत हुई थी. वर्तमान समस्या अस्थायी है. यह हालात भौगोलिक वजहों से बने हैं. सरकारी खरीद का सीजन शुरू हो गया है और किसानों को दिया जाने वाला पेमेंट भी बढ़ा है .
नोटबंदी के बाद 99% नकदी चलन में
साल चलन में मौजूद नोटों का मूल्य
07 नवंबर, 2016 17.97 लाख करोड़ रुपये
06 जनवरी, 2017 08.98 लाख करोड़ रुपये
16 फरवरी, 2018 17.78 लाख करोड़ रुपये
(स्रोत : मीडिया रिपोर्ट )
झारखंड की स्थिति भी खराब
रांची : विभिन्न बैंकों के 350 से अधिक एटीएम हैं. सिर्फ स्टेट बैंक की 180 एटीएम हैं – इनमें आधे से अधिक एटीएम खराब या उनमें पैसे नहीं
मेदिनीनगर : जिले में कुल 85 एटीएम, स्टेट बैंक की 35. इनमें अधिकतर बंद – रोजाना 10 करोड़ रुपये की खपत है. लेकिन एक से दो करोड़ ही उपलब्ध
गढ़वा : कुल 42 एटीएम है. 32 एटीएम स्टेट बैंक की, पर इनमें तीन ही चालू – महीने में 150 करोड़ रुपये बैंकों को चाहिए. पर मात्र पांच से दस करोड़ ही मिल रहे
गुमला : शहर में 18 एटीएम. सिर्फ तीन में ही पैसे. प्रतिदिन तीन से साढ़े तीन करोड़ रुपये की जरूरत. पर पर्याप्त नहीं मिल रहा
चतरा : 40 एटीएम , सभी में कैश की कमी. ग्राहकों को मिल रही सीमित राशि
लोहरदगा : 38 एटीएम हैं जिले में, सिर्फ दो में ही मंगलवार का था कैश
रामगढ़ : 107 एटीएम हैं िजले में, कैश की कमी नहीं
हजारीबाग : कुल 110 एटीएम हैं िवभिन्न बैंकों के, 50-60 में कैश नहीं
कोडरमा : विभिन्न बैंकों के 79 एटीएम, 12-15 में कैश नहीं
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