लातेहार के तीन फीसदी स्कूली बच्चों को नहीं पता दूध का स्वाद

Updated at : 24 Jul 2018 6:56 AM (IST)
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लातेहार के तीन फीसदी स्कूली बच्चों को नहीं पता दूध का स्वाद

राजीव पांडेय डिपार्टमेंट ऑफ प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन (पीएसएम) विभाग ने लातेहार के 16 स्कूलों में सर्वे किया है. यह सर्वे पांच से 16 साल के बच्चों पर किया गया. इसमें पाया गया कि स्कूल जाने वाले इन बच्चों में से तीन फीसदी बच्चों ने कभी दूध का स्वाद ही नहीं चखा है. 80 फीसदी […]

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राजीव पांडेय
डिपार्टमेंट ऑफ प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन (पीएसएम) विभाग ने लातेहार के 16 स्कूलों में सर्वे किया है. यह सर्वे पांच से 16 साल के बच्चों पर किया गया. इसमें पाया गया कि स्कूल जाने वाले इन बच्चों में से तीन फीसदी बच्चों ने कभी दूध का स्वाद ही नहीं चखा है.
80 फीसदी ऐसे बच्चे हैं, जो प्रतिदिन दूध नहीं पीते हैं. रिम्स का पीएसएम विभाग झारखंड राज्य मिल्क फेडरेशन के सहयोग से शोध कर रहा है.
इसमें आठ स्कूलों के बच्चों को गिफ्ट मिल्क के तहत दूध पिलाया जा रहा है. वहीं आठ स्कूलों के बच्चों को दूध नहीं दिया जा रहा है. शोध के अंतिम चरण में पीएसएम विभाग यह पता करेगा कि जिन बच्चों ने दूध पीया व जिन बच्चों ने दूध नहीं पीया, उनके शरीर पर क्या प्रभाव पड़ा.
रांची : पीएसएम विभाग के शोधकर्ताओं की मानें, तो लातेहार के सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के 960 बच्चों का सर्वे किया गया है. इसमें 35 से 45 फीसदी बच्चे जनजातीय हैं. इनमें से 157 बच्चे विभिन्न प्रकार की समस्या से पीड़ित पाये गये.
एक चौथाई बच्चों में दूर दृष्टि की समस्या पायी गयी. कई बच्चाें में आंखों की जन्मजात समस्या पायी गयी. पीएसएम विभाग ने नवंबर 2017 से इस पर शोध कार्य शुरू किया है, जो अक्तूबर 2018 तक चलेगा. शोध कार्य में 16 स्कूलाें को दो ग्रुप में बांट दिया गया है. पहले ग्रुप में आठ स्कूलों के बच्चों को शामिल किया गया है. इन स्कूलों में झारखंड राज्य मिल्क फेडरेशन द्वारा प्रत्येक बच्चे को प्रतिदिन 200 एमएल दूध दिया जा रहा है. वहीं दूसरे ग्रुप के आठ स्कूलों के बच्चों को दूध नहीं दिया जा रहा है.
अक्तूबर 2018 में शोध पूरा होने पर पीएसएम विभाग की टीम स्कूलों का भ्रमण करेगी. वहां बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की जायेगी. जांच के बाद यह बताया जायेगा कि जिन बच्चों ने दूध पीया उनके शारीरिक व मानसिक स्थिति में क्या बदलाव हुआ. शोध की एक रिपोर्ट पीएसएम विभाग राज्य सरकार को भी देगा. इसके बाद सरकार इस बिंदु पर नीतिगत फैसला ले सकती है.
पीएसएम विभाग इन विषयों पर करेगा शोध
पीएसएम विभाग विलुप्त हो रही आदिम जनजाति बिरहोर पर भी शोध करेगा. इसके अलावा विभाग रोटावायरस के इंपैक्ट व इंवायरमेंट हेल्थ पर शोध करने की तैयारी में है. बिरहोर पर शोध के लिए टीआरआइ व रोटावायरस के लिए सीएमसी व टीएचएसटीआइ फंड मुहैया करायेगा. वहीं इंवायरमेंट हेल्थ के लिए भारत सरकार फंड देगी. इसके लिए देश के 20 सेंटर को चुना गया है, जिसमें धनबाद को चिह्नित किया गया है. शोध कार्य पीएसएम के विभागाध्यक्ष डॉ विवेक कश्यप, डॉ विद्यासागर, डॉ एसबी सिंह व डॉ देवेश की टीम कर रही है.
रिम्स के पीएसएम विभाग ने लातेहार के 16 स्कूलों में सर्वे किया, शोध कार्य जारी
झारखंड राज्य मिल्क फेडरेशन के सहयोग से लातेहार के स्कूलों में शोध कार्य चल रहा है. एक महीना वहां सर्वे किया गया है, जिसमें कई चौकाने वाले तथ्य सामने आये हैं. शोध कार्य जारी है. इसलिए नतीजा आने के बाद ही कुछ ठोस बातें कही जा सकती हैं. कई शोध कार्य पाइपलाइन में है. कुछ पूरा भी हो गया है.
डॉ विवेक कश्यप, विभागाध्यक्ष, पीएसएम
90% बच्चों का आइक्यू स्तर मानक से नीचे
पीएसएम विभाग के सर्वे में यह भी पाया गया कि 85 से 90 फीसदी बच्चों का बौद्धिक स्तर सही नहीं है. उनका आइक्यू 90 से कम है. शोध कार्य में जुटे पीएसएम के डॉ एसबी सिंह व डॉ देवेश कुमार ने बताया कि सामान्यत: आइक्यू का स्तर 90 से ज्यादा होना चाहिए , लेकिन अधिकांश बच्चों में यह काफी कम पाया गया है. 80 फीसदी बच्चे एनिमिया (खून की कमी) से पीड़ित हैं.
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