मानवीय संवेदना के साथ क्रूर मजाक

Updated at : 26 Dec 2014 5:54 AM (IST)
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मानवीय संवेदना के साथ क्रूर मजाक

कोडरमा बाजार : मानवीय संवेदना पर क्रूर मजाक किस कदर होता है. इसका नजारा समाहरणालय के पीछे स्थित जंगल में गुरुवार को देखने को मिला. जंगल में लावारिस हालत में एक शव को देखा गया. बताया जाता है कि बीते बुधवार को सदर अस्पताल से उक्त शव को जंगल में फेंका गया है. साथ ही […]

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कोडरमा बाजार : मानवीय संवेदना पर क्रूर मजाक किस कदर होता है. इसका नजारा समाहरणालय के पीछे स्थित जंगल में गुरुवार को देखने को मिला. जंगल में लावारिस हालत में एक शव को देखा गया. बताया जाता है कि बीते बुधवार को सदर अस्पताल से उक्त शव को जंगल में फेंका गया है.

साथ ही बताया जाता है कि बीते 21 दिसंबर को उक्त शव सतगावां थाना क्षेत्र अंतर्गत बासोडीह मरचोई के बीच नदी पुल के समीप लावारिस हालत में सतगावां थाना को मिला था. शव किसी वृद्ध पुरुष का था. सतगावां पुलिस उसे अंत्यपरीक्षण के लिए सदर अस्पताल भेज दिया. अंत्यपरीक्षण के बाद लगभग दो दिन तक किसी के द्वारा उक्त शव को शिनाख्त नहीं होने पर उसे लावारिस समझ कर स्वास्थ्य विभाग ने जंगल में फेंक दिया. जबकि लावारिस शव का दाह संस्कार कराना प्रशासन की जिम्मेवारी है.

इस संबंध में पूछे जाने पर एसडीओ लियाकत अली ने बताया कि सतगावां थाना से शव को डिस्पोजल करने का आवेदन उनके कार्यालय में आया था व उनके द्वारा डिस्पोजल करने का निर्देश भी जारी किया गया था. शव को बिना दाह संस्कार या दफनाये बिना जैसे-तैसे नहीं फेंकना चाहिए था. जब उनसे पूछा गया कि लावारिस शवों की दाह संस्कार के लिए क्या सरकारी प्रावधान है. उन्होंने बताया कि पुलिस द्वारा शव का दाह संस्कार के बाद खर्च की राशि की मांग की जाती है. उसका भुगतान जिला प्रशासन के माध्यम से किया जाता है.

गलत काम हुआ है, जांच कर कार्रवाई करेंगे : सीएस : सीएस एसएन तिवारी ने कहा कि लावारिस शवों के दाह संस्कार की जिम्मेवारी स्वास्थ्य विभाग की नहीं है, बल्कि प्रशासन की है. किसके आदेश से स्वास्थ्यकर्मियों ने शव को जंगल में फेंका. इसकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे.

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