जमशेदपुर के सदर अस्पताल में एक भी सर्जन और एमडी नहीं, बिना इलाज कराये लौट रहे हैं मरीज

जमशेदपुर का खासमहल स्थित सदर अस्पताल में अब भी कई सुविधाओं का अभाव है. अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन डॉक्टरों की कमी से सभी मरीजों का ठीक तरह इलाज नहीं हो पा रहा है
जमशेदपुर: खासमहल स्थित सदर अस्पताल राज्य के श्रेष्ठ सदर अस्पतालों की श्रेणी में शामिल है. वर्ष 2013 में जब यह अस्पताल खुला, तो न केवल एमजीएम अस्पताल का लोड कम हुआ, बल्कि परसुडीह, बागबेड़ा, सुंदरनगर, कीताडीह, गोलपहाड़ी, स्टेशन व आसपास के लोगों को राहत मिली. नौ साल पहले जहां सदर अस्पताल में प्रतिदिन 50 से 100 मरीज आते थे, अब यह संख्या बढ़कर प्रतिदिन 700 से 800 पर पहुंच गयी है.
अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन डॉक्टरों की कमी से परेशानी बढ़ रही है. अब स्थिति ऐसी है कि डॉक्टर सभी मरीज को देख भी नहीं पाते हैं. कई मरीज बैरंग ही लौट जा रहे हैं. आये दिन इसको लेकर सदर अस्पताल में मरीजों की नाराजगी का सामना डॉक्टरों को झेलना पड़ता है. वहीं, डॉक्टरों की टीम भी इस समस्या से अस्पताल उपाधीक्षक और सिविल सर्जन को अवगत करा चुके हैं.
अधिकारियों ने भी विभाग को पत्राचार कर खाली पदों को भरने के साथ नवसृजन करने को लिखा है. लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. अस्पताल में व्यवस्था व डॉक्टरों की कमी को लेकर सिविल सर्जन डॉ जुझार माझी और सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ एबीके बाखला ने विभाग को पत्राचार किया है. आंख का पावर जांचने के टेकनीशियन तो है, लेकिन डॉक्टर नहीं : सदर अस्पताल में नेत्र रोग विभाग तो है, लेकिन यहां नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर की नियुक्ति नहीं है.
नेत्र रोग विभाग आंखों के पावर जांचने वाले (ऑप्टिमिस्ट एसिस्टेंट चच्छू सहायक) के भरोसे चल रहा है. मतलब यहां आंख की समस्या लेकर आने माले मरीजों का इलाज नहीं हो रहा है, बल्कि केवल पावर की जांच की जा रही है. जबकि आंख का पावर जांचने का काम केवल चश्मा के लिए होता है. आंखों से संबंधित रोग है, तो इसकी दवा व इलाज केवल विशेषज्ञ डॉक्टर ही कर सकते हैं. आइसीयू वार्ड बना, लेकिन नहीं हैं जर्नल सर्जन : सदर अस्पताल में मरीजों को बेहतर से बेहतर चिकित्सीय सुविधा मिले, इसको लेकर अपग्रेड करने का काम चलता आ रहा है.
लेकिन मूल सुविधा जो डॉक्टर की उपलब्धता है, उस ओर विभाग का ध्यान नहीं है. अस्पताल में आइसीयू वार्ड तो खोल दिया गया, लेकिन जर्नल सर्जन जैसे पद रिक्त हैं. जबकि अस्पताल में जर्नल सर्जन का होना अनिवार्य है.
डॉक्टरों की कमी है. अस्पताल पर मरीजों का लोड लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में डॉक्टरों की कमी को पूरा करने से ही समस्या का हल होगा. इसको लेकर हमने विभाग को पत्र लिखा है. अस्पताल को अपग्रेड करने का काम चल रहा है. लेकिन मूलभूत सुविधा की कमी अब भी समस्या है. बिजली का लोड भी बढ़ गया है. लेकिन व्यवस्था पुरानी होने से परेशानी हो रही है. उम्मीद है विभाग बहुत जल्द इस पर फैसला लेगा.
डॉ एबीके बाखला, उपाधीक्षक, सदर अस्पताल
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By Sameer Oraon
इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.
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