जमशेदपुर में जेइ के घर से बरामद हुए थे रुपये, 2.45 करोड़ की जांच नहीं कर पाया आइटी विभाग

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
रांची : जमशेदपुर में जेइ सुरेश प्रसाद वर्मा के घर से जब्त 2.45 करोड़ रुपये की जांच इनकम टैक्स विभाग नहीं कर सका. छापेमारी के दौरान जेइ के घर में मौजूद चीफ इंजीनियर के रिश्तेदार आलोक रंजन का बयान लेने के लिए आयकर विभाग के अधिकारी घटनास्थल पर दिनभर बैठे रहे. लेकिन, एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) के अधिकारी इसके लिए सहमत नहीं हुए. इनकम टैक्स विभाग ने इससे संबंधित सूचना राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीइओ) को दे दी है.
ज्ञात हो कि एसीबी ने शुक्रवार को ग्रामीण विकास विभाग के जेइ सुरेश प्रसाद वर्मा के घर पर छापा मार कर एक कमरे से 2.45 करोड़ रुपये नकद बरामद किये थे. एसीबी द्वारा रुपये जब्त किये जाने के बाद जमशेदपुर के वरीय पुलिस अधिकारियों की ओर से आयकर विभाग को रुपये पकड़े जाने की सूचना दी गयी.
साथ ही यह भी कहा गया कि आदर्श चुनाव आचार संहिता की अवधि में पकड़े गये रुपयों के सिलसिले में अगर वह कुछ जांच करना चाहते हैं, तो करें.
वरीय पुलिस अधिकारियों द्वारा दी गयी सूचना के आलोक में आयकर विभाग के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे. लेकिन, एसीबी के अधिकारियों द्वारा सहमति नहीं दिये जाने की वजह से चीफ इंजीनियर वीरेंद्र राम के रिश्तेदार आलोक रंजन का बयान नहीं ले सके. आयकर अधिकारियों का दल अलोक रंजन का बयान दर्ज करने के बाद चुनाव के दौरान मिले काले धन के नजरिये से इसकी जांच करना चाहता था. एसीबी ने अपनी प्रारंभिक कार्रवाई पूरी करने के बाद उसे जेल भेज दिया.
रुपये जब्त होने के बाद से लापता हैं वीरेंद्र राम : एसीबी ने जूनियर इंजीनियर के मकान के जिस कमरे से रुपये जब्त किये थे, उस कमरे को चीफ इंजीनियर ने किराये पर ले रखा है. रुपये पकड़े जाने के बाद से चीफ इंजीनियर वीरेंद्र राम लापता हैं.
वीरेंद्र राम की पत्नी राजकुमारी ने छह अगस्त 2019 को राज्य के बड़े नेताओं की उपस्थिति में भाजपा ज्वाइन किया था. ज्वाइनिंग के दिन जमशेदपुर के एक बड़े होटल में शानदार पार्टी हुई थी. ज्वाइनिंग सेरेमनी में शामिल लोगों को महंगा खाना खिलाया गया. हालांकि, इस पूरे समारोह से मीडिया को दूर रखा गया था. भाजपा ज्वाइन करने के बाद राजकुमारी को महान समाजसेवी बताते हुए समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित किया गया. चीफ इंजीनियर की पत्नी ने बीजेपी से टिकट की दावेदारी भी की थी. हालांकि, उसे कामयाबी नहीं मिल सकी.
पुल की जांच न करने पर वीरेंद्र राम को शो-कॉज
रांची : पाकुड़ में पुल ढहने के मामले में अब तक जांच नहीं हुई. ग्रामीण कार्य विभाग ने इसकी जिम्मेदारी विशेष प्रमंडल के मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम को सौंपी थी, लेकिन अब तक उन्होंने जांच रिपोर्ट नहीं सौंपी है. इस पर विभाग ने उनसे शो-कॉज जारी किया है. वीरेंद्र राम जमशेदपुर में 2.45 करोड़ रुपये की बरामदगी से चर्चा में आये हैं. ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल ने ‘मुख्यमंत्री ग्राम सेतु योजना’ के तहत पाकुड़ के चंडालमारा-घाटचेरी रोड पर बांसलोइ पुल बनवाया था.
चार साल पहले करीब छह करोड़ की लागत से बना यह पुल एक अक्तूबर 2019 को ढह गया. विभागीय सचिव आराधना पटनायक ने मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम को जांच की जिम्मेदारी सौंपी. वीरेंद्र राम की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कमेटी बनी, जिसे एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट देनी थी. शुरुआत में बारिश की बात कह कमेटी जांच के लिए नहीं गयी, लेकिन बारिश खत्म होने बाद भी कमेटी ने चुप्पी साधे रखी. विभाग ने इसके लिए दो बार रिमाइंडर भेजा, लेकिन टीम जांच के लिए मौके पर नहीं गयी.
    Share Via :
    Published Date
    Comments (0)
    metype

    संबंधित खबरें

    अन्य खबरें