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फर्जी दस्तावेज पर लिया बेल, किया सरेंडर

Updated at : 10 Oct 2018 6:11 AM (IST)
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फर्जी दस्तावेज पर लिया बेल, किया सरेंडर

जमशेदपुर : तीन नाबालिग के अपहरण मामले में जमशेदपुर कोर्ट में फर्जी दस्तावेज पर जमानत लेने वाले मो सिराज को मंगलवार हाइकोर्ट ने सुनवाई के दौरान न्यायिक हिरासत में ले लिया. झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस कैलाश प्रसाद देव की अदालत क्रिमिनल अपील याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे जेल भेजने का आदेश दिया. हाइकोर्ट को […]

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जमशेदपुर : तीन नाबालिग के अपहरण मामले में जमशेदपुर कोर्ट में फर्जी दस्तावेज पर जमानत लेने वाले मो सिराज को मंगलवार हाइकोर्ट ने सुनवाई के दौरान न्यायिक हिरासत में ले लिया. झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस कैलाश प्रसाद देव की अदालत क्रिमिनल अपील याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे जेल भेजने का आदेश दिया.
हाइकोर्ट को भी मो सिराज द्वारा फर्जी जमानत पर रिहा होने की सूचना दे दी गयी थी. देर रात मो सिराज को कड़ी सुरक्षा में जमशेदपुर लाया गया, उसे बुधवार को जमशेदपुर कोर्ट में मामले की सुनवाई कर रही अदालत में प्रस्तुत किया जायेगा. इधर, आजादनगर पुलिस ने दो दिन पहले गलत दस्तावेज बनाकर मो सेराज की जमानत लेने का पुख्ता सबूत जमा करते हुए मामला दर्ज किया है.
आजादनगर थानेदार अंजनी कुमार तिवारी के बयान पर थाना में आरोपी मो सेराज (बगानशाही), जमानतदार सविता राय (दाइगुट्टू), मो अख्तर हुसैन (क्राॅस रोड नंबर 10), जमानतदार के पहचानकर्ता तैयबा खातून (बगानशाही) समेत जमानत कराने वाले दो अधिवक्ता को आरोपी बनाया है. दर्ज मामले के मुताबिक मो सेराज की जमानत के बाद जमानतदार बनी सबिता राय ने जिस टेंपो (जेएच05ए-1881) के दस्तावेज अदालत को जमा किये थे.
उसकी जांच करने पर पता चला कि वह नंबर कार का है और कार मालिक बीएम दास कदमा प्रोफेशनल फ्लैट बीएच एरिया में रहते हैं. इसी तरह से मो अख्तर हुसैन ने जिस गाड़ी (बीपीजे-3572) के दस्तावेज जमा किये थे. जांच में पता चला कि वह फर्जी दस्तावेज है और अख्तर हुसैन पांच वर्ष पूर्व मकान खाली कर शहर के जा चुके हैं. दोनों जमानतदार की पहचान करने वाली तैयब खातून का भी पता गलत है.
हाइकोर्ट से वर्ष 2004 में मिली थी जमानत
मंगलवार को हाइकोर्ट में मो सिराज अपने माता-पिता के साथ मौजूद था. उसने अदालत को बताया कि वह नोएडा में रह कर जीवन-यापन कर रहा है. इससे पहले सरकार की ओर से अधिवक्ता राजीव रंजन मिश्र ने अदालत को मो सेराज द्वारा फर्जी जमानतदारों द्वारा जमानत पर रिहा होने की जानकारी दी. मो सेराज को 2004 में जमानत मिली थी. जमानतदार भी नहीं मिल रहे हैं. जमानतदारों की पहचान मो सिराज की मां ने की थी. जिसके बाद अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में लेते हुए जेल भेजने का निर्देश दिया.
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