पांच चिल्ड्रेन होम जांच के घेरे में, आज भी होगी जांच

Updated at : 09 Jul 2018 3:38 AM (IST)
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पांच चिल्ड्रेन होम जांच के घेरे में, आज भी होगी जांच

जमशेदपुर : रांची स्थित मिशनरीज अॉफ चैरिटी के निर्मल हृदय चैरिटी होम से नवजातों की बिक्री का मामला उजागर होने के बाद चाइल्ड होम की जांच के घेरे में शहर के पांच ऐसे संस्थान आये हैं, जहां अनाथ बच्चे या परिवारवालों के द्वारा बच्चों को रखा जाता है. प्रशासन द्वारा गठित संयुक्त टीम ने शनिवार […]

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जमशेदपुर : रांची स्थित मिशनरीज अॉफ चैरिटी के निर्मल हृदय चैरिटी होम से नवजातों की बिक्री का मामला उजागर होने के बाद चाइल्ड होम की जांच के घेरे में शहर के पांच ऐसे संस्थान आये हैं, जहां अनाथ बच्चे या परिवारवालों के द्वारा बच्चों को रखा जाता है. प्रशासन द्वारा गठित संयुक्त टीम ने शनिवार को बाराद्वारी स्थित मिशनरीज अॉफ चैरिटी अौर सोनारी स्थित सहयोग विलेज की स्थलीय जांच की गयी थी.
रविवार को संस्थाअों के कार्यालय बंद रहने के कारण टीम ने जांच नहीं की. टीम सोमवार को सोनारी, टेल्को अौर बिरसानगर के चिल्ड्रेन होम की जांच करेगी. इन स्थानों में लावारिस मिले बच्चे, अनाथ बच्चों तथा किसी कारण से परिवार वालों के द्वारा पहुंचाये गये बच्चों को रखने की सूचना जांच टीम को मिली है.
जांच टीम तीनों स्थानों की स्थल जांच के साथ-साथ बच्चों को लाने, रखने अौर ले जाने के दस्तावेज की पड़ताल करेगी. शनिवार को बाराद्वारी स्थित मिशनरीज अॉफ चैरिटी की जांच में टीम को सोनारी के बच्चों से जुड़ी एक संस्था के कागजात मिले हैं, जिसके बाद उस संस्था की भी जांच करने का निर्णय टीम ने लिया है. दूसरी अोर, टेल्को में बच्चों के हित से जुड़ी सरकारी संस्था की पदाधिकारी द्वारा टेल्को में बच्चों का अनाथालय चलाने की सूचना है जिसकी पड़ताल टीम सोमवार को करेगी.
चार साल से जांच की मांग करते रहे, किसी ने नहीं दिया ध्यान. बाल मजदूर मुक्ति सेवा संस्थान के मुख्य संयोजक सदन कुमार ठाकुर 2014 से लगातार विभिन्न स्तरों पर पत्राचार कर शिशु केंद्रों की जांच की मांग करते रहे, लेकिन जांच-कार्रवाई किसी स्तर पर नहीं की गयी.
सदन कुमार ठाकुर ने 30 सितंबर 2014 को प्रधानमंत्री, 25 सितंबर को गृह मंत्री से लेकर जिला प्रशासन के पदाधिकारियों को लगातार पत्र भेज कर जमशेदपुर स्थित मिशनरीज अॉफ चैरिटी को कितने अनाथ बच्चे प्रशासन द्वारा दिये गये, वे बच्चे कहां हैं, इसकी जांच कर कार्रवाई करने की मांग की थी. लेकिन, पत्र पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. बच्चों के लिए सरकार द्वारा गठित समितियां भी इस अोर ध्यान नहीं दी.
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